Noida Yuvraj Case: बेटे को खोया, अब देश भी छोड़ा; बेटी के साथ लंदन शिफ्ट हुए युवराज के पिता, SIT जांच पर सस्पेंस बरकरार।

नोएडा: बेटे युवराज की मौत के बाद अकेले पड़े पिता, बेटी के साथ लंदन गए; SIT रिपोर्ट पर सस्पेंस कायम नोएडा के सेक्टर-150 में 16 जनवरी को हुए हादसे में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत हो गई थी. युवराज की कार बेसमेंट के लिए खोदे गए पानी भरे गड्ढे में गिर गई थी. घटना को एक महीना बीतने के बावजूद एसआईटी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है.

नोएडा के सेक्टर-150 में हुए सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की हादसे में मौत को करीब एक महीना बीत चुका है, लेकिन अब तक इस मामले में गठित विशेष जांच टीम (एसआईटी) की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जा सकी है. 16 जनवरी को हुए इस हादसे में युवराज की कार बेसमेंट निर्माण के लिए खोदे गए पानी से भरे गहरे गड्ढे में गिर गई थी, जिससे उनकी मौत हो गई थी.

घटना के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशासनिक लापरवाही की जांच के लिए एसआईटी गठित की थी और पांच दिनों में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे. हालांकि बताया जा रहा है कि रिपोर्ट शासन को सौंपे जाने के लगभग 20 दिन बाद भी उसे सार्वजनिक नहीं किया गया है, जिससे परिजनों और स्थानीय लोगों में असंतोष और सवाल बढ़ते जा रहे हैं.

हादसे के बाद सदमे में परिजन

युवराज मेहता अपने पिता के साथ रहते थे और वर्क-फ्रॉम-होम के कारण घर से ही नौकरी कर रहे थे. उनकी मां का पहले ही निधन हो चुका था और बहन विदेश में रहती थी. बेटे की अचानक मौत ने पिता को पूरी तरह तोड़ दिया है. कुछ समय के लिए रिश्तेदार उनके पास रहने आए, लेकिन बाद में वे भी लौट गए. अकेलेपन और सदमे की स्थिति में रह रहे पिता से मिलने घटना के करीब 16 दिन बाद बहन ग्रेटर नोएडा आई. दो दिन साथ रहने के बाद वह उन्हें दिल्ली ले गई और फिर अपने साथ लंदन रवाना हो गई. इस तरह बेटे को खोने के बाद वे भी भारत छोड़कर बेटी के पास चले गए.

हादसे वाली रात क्या हुआ?

16 जनवरी की रात युवराज अपनी कार से लौट रहे थे, तभी वाहन अनियंत्रित होकर नाले की दीवार तोड़ते हुए उस प्लॉट में जा गिरा, जहां बेसमेंट निर्माण के लिए गहरा गड्ढा खोदा गया था और उसमें पानी भरा हुआ था. सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल विभाग, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं. लगभग पांच घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद कार और युवराज को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उनकी मृत्यु हो चुकी थी. स्थानीय निवासियों ने निर्माण स्थल पर पर्याप्त बैरिकेडिंग और सुरक्षा व्यवस्था न होने को हादसे की प्रमुख वजह बताया था.

रिपोर्ट सार्वजनिक न होने से उठ रहे सवाल

घटना के बाद शासन ने जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया था. हादसे के दो दिन बाद ही प्राधिकरण के तत्कालीन सीईओ को पद से हटा दिया गया और कुछ इंजीनियरों पर कार्रवाई की गई. इसके बावजूद एसआईटी रिपोर्ट सार्वजनिक न होने से सबसे बड़ा प्रश्न यही बना हुआ है कि इस लापरवाही के लिए वास्तव में कौन जिम्मेदार है और दोषियों पर ठोस कार्रवाई कब होगी.

युवराज मेहता की असमय मृत्यु आज भी शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है. लोग इसे शहरी विकास परियोजनाओं में सुरक्षा मानकों की अनदेखी का उदाहरण मान रहे हैं. दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि जांच प्रक्रिया पूरी होते ही आवश्यक कार्रवाई की जाएगी. लेकिन रिपोर्ट के सार्वजनिक होने में हो रही देरी से पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर लोगों की चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं.

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