PM मोदी की मेरठ रैली से पहले भारी बवाल! बाबरी मस्जिद के नाम पर चंदा वसूली का आरोप, विधायक बोले- ‘बड़ी साजिश’
मेरठ में प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम से पहले बाबरी मस्जिद के नाम पर चंदा मांगने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. स्थानीय लोगों और विधायक अमित अग्रवाल ने आरोप लगाया कि बाहरी लोग जबरन वसूली कर रहे थे और एक बड़ी साजिश की आशंका जताई. हालांकि, पुलिस ने आरोपों को खारिज किया है.
उत्तर प्रदेश के मेरठ में 22 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम से पहले शहर के कैंट विधानसभा क्षेत्र के सदर इलाके में कथित तौर पर चंदा मांगने आए कुछ लोगों को लेकर विवाद खड़ा हो गया. क्षेत्र के कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि मुस्लिम समाज से जुड़े कुछ लोग घरों और दुकानों में जबरन घुस कर बाबरी मस्जिद के नाम पर चंदा मांग रहे थे. इस संबंध में स्थानीय लोगों ने पुलिस से शिकायत की है.
मामले की जानकारी मिलने पर कैंट विधायक अमित अग्रवाल मौके पर पहुंचे और पुलिस अधिकारियों से बातचीत की. उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित लोग कश्मीर, बंगाल और असम जैसे राज्यों से आए बताए जा रहे हैं. चंदा मांगने के बहाने घरों में घुस रहे हैं. विधायक ने इन लोगों की जांच और गिरफ्तारी की मांग की है. हालांकि उनका आरोप है कि पुलिस ने बिना ठोस पूछताछ के ही उन्हें छोड़ दिया.
क्या बोले विधायक अमित अग्रवाल
विधायक अमित अग्रवाल ने इस पूरे मामले को गंभीर बताया है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम से पहले किसी बड़ी साजिश की आशंका जताई है. उन्होंने कहा कि जब शहर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत की मौजूदगी की चर्चा है, साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कार्यक्रम प्रस्तावित है, ऐसे में संदिग्ध गतिविधियों को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए था.
उन्होंने कहा कि पुलिस को इस मामले की गहराई से जांच करनी चाहिए थी. विधायक ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के बाद वह इस मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों से करेंगे और गृह सचिव को भी पत्र लिखेंगे.
पूरे मामले पर पुलिस प्रशासन की सफाई
विधायक के आरोपों को पुलिस प्रशासन ने खारिज किया है. पुलिस ने कहा कि रमजान के महीने में हर साल कुछ लोग अलग-अलग राज्यों से आकर चंदा इकट्ठा करते हैं. जिन लोगों के खिलाफ शिकायत की गई थी, उन्हें थाने लाकर पूछताछ की गई. पुलिस के अनुसार, संबंधित व्यक्तियों में बिहार, बंगाल और असम के लोग शामिल थे और जांच के बाद उन्हें वापस भेज दिया गया.