Vice President Jagdeep Dhankhar: ‘मैं शाकाहारी हूं, पर कश्मीरी छात्रों को नॉनवेज खिलाया’, खान-पान पर उपराष्ट्रपति का बड़ा बयान

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने 'खाने की आजादी' यानी 'डाइटरी फ्रीडम' का समर्थन किया है, जिसमें हर व्यक्ति को अपनी पसंद का भोजन चुनने का हक है. उन्होंने दूसरों की भावनाओं का सम्मान करने पर जोर दिया.

देश के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने खाने की आजादी यानी डाइटरी फ्रीडम की वकालत की है. उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी पसंद का खाना खाने का हक है. यही वजह है कि हमें एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए. उन्होंने इस दौरान एक पुराना किस्सा भी बताया. जब वे झारखंड के राज्यपाल हुआ करते थे और उन्होंने शाकाहारी होने के बाद भी कश्मीरी छात्रों के लिए मांसाहारी खाने का इंतजाम कराया था.

जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में यूनिवर्सिटी ऑफ कश्मीर के 21वें दीक्षांत समारोह में बोलते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सबकी भावनाओं की कद्र होनी चाहिए. उन्होंने कहा, हम अपनी पसंद पर गर्व कर सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम दूसरों की पसंद को नीचा दिखाएं.

यूनिवर्सिटी के इस कार्यक्रम जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी मौजूद थे. इस दौरान करीब 60,000 डिग्रियां दी गई.

उपराष्ट्रपति सुनाया सालों पुराना किस्सा

उपराष्ट्रपति ने छात्रों को संबोधित करते हुए कई मुद्दों पर चर्चा की. इस दौरान उन्होंने बताया कि जब वह झारखंड के राज्यपाल थे, तब एक भारत श्रेष्ठ भारत कार्यक्रम के तहत जम्मू-कश्मीर से छात्रों का एक दल रांची के राजभवन आया था.

 

उन्होंने कहा कि वह खुद शाकाहारी (वेजिटेरियन) हैं, लेकिन उन्होंने उस समय अधिकारियों को आदेश दिया था कि कश्मीरी छात्रों को नॉन-वेज खाना परोसा जाए, क्योंकि ज्यादातर छात्र नॉन-वेज खाते हैं. उनका मानना था कि मेहमानों को उनकी पसंद का खाना मिलना चाहिए. अपने मन का खाना हर कोई खाना चाहता है, हमेशा लोगों को अपने मन का ही खाना खाना चाहिए. ऐसा करने में किसी को भी किसी तरह की कोई समस्या भी नहीं होनी चाहिए.

 

महिलाएं जम्मू-कश्मीर की तरक्की की मिसाल

वाइस प्रेसिडेंट ने दीक्षांत समारोह में महिला प्रतिनिधित्व पर भी खुशी जाहिर की है. उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में उच्च शिक्षा मंत्री एक महिला हैं. यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर भी महिला हैं. गोल्ड मेडल पाने वालों में ज्यादातर छात्राएं थीं. उन्होंने इसे जम्मू-कश्मीर में महिलाओं की तरक्की और सशक्तिकरण की बड़ी मिसाल बताया है.

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