CEC Gyanesh Kumar: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने का नोटिस; TMC की अगुवाई में 193 सांसदों के हस्ताक्षर, लगाए 7 गंभीर आरोप

भारतीय इतिहास में पहली बार मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को हटाने के लिए संसद में नोटिस दिया गया है। TMC के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने ज्ञानेश कुमार पर पक्षपात, मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने और SIR में धांधली जैसे 7 आरोप लगाए हैं। जानें क्या है हटाने की पूरी प्रक्रिया।

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के प्रस्ताव के नोटिस दोनों सदनों में जमा कर दिए गए हैं. CEC को हटाने के लिए सांसदों के जरूरी हस्ताक्षरों का, TMC के नेतृत्व वाले विपक्ष का पत्र दोनों सदनों में जमा कर दिया गया है. इसमें CEC के खिलाफ 7 बिंदुओं वाले आरोप-पत्र में शामिल हैं. उन्होंने बिहार में SIR को जिस तरह से संभाला. मतदाताओं को मताधिकार से वंचित किया गया. राजनीतिक दलों के प्रति पक्षपातपूर्ण रवैया, दुर्व्यवहार साबित हुआ है. इसमें सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला दिया गया है.

TMC की अगुवाई में विपक्षी सांसदों ने ये नोटिस दिया है. दोनों सदनों को नोटिस सौंप दिया गया है. प्रस्ताव पर 190 विपक्षा सांसदों का हस्ताक्षर है. विपक्ष दोनों सदनों में इसे ला रहा है, जिससे इसकी जांच के लिए जो कमेटी बने उसमें दोनों सदनों के सांसद हों.

विपक्ष के ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मुख्य रूप से 3 आरोप हैं-

  • मतदाता से वोट अधिकार छीनना
  • जब टीएमसी नेता उनसे मिलने गए तो दुर्व्यवहार किया
  • SIR में संविधान को नहीं मानना

नियमों के मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए नोटिस पर लोकसभा के कम से कम 100 सांसदों और राज्यसभा के 50 सांसदों के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं. यह पहली बार है जब मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने के लिए इस तरह का नोटिस दिया गया है.

सीईसी को हटाने का प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है और इसे पारित होने के लिए विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है. सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत और उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत है.

बीजेपी का पक्ष लेने का आरोप

अगर इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया जाता है, तो यह पहला ऐसा मामला होगा जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए नोटिस दिया गया हो. सूत्रों के मुताबिक, इस नोटिस में कुमार पर सात आरोप लगाए गए हैं. इनमें पद पर रहते हुए पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण रवैया, चुनावी धोखाधड़ी की जांच में जान-बूझकर रुकावट डालना और बड़े पैमाने पर लोगों के वोट देने के अधिकार से वंचित करना शामिल हैं. विपक्षी दलों ने CEC पर कई मौकों पर सत्ताधारी BJP का पक्ष लेने का आरोप लगाया है. खासकर मतदाता सूचियों के चल रहे ‘विशेष गहन संशोधन’ (SIR) के संबंध में. उनका दावा है कि इसका मकसद केंद्र में सत्ताधारी पार्टी को फायदा पहुंचाना है.

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