Moradabad News: मुरादाबाद में मेयर बनाम प्रशासन; बुलडोजर एक्शन पर छिड़ी जंग, मेयर बोले- ‘ये सरकारी जमीन नहीं’
मुरादाबाद में सरकारी भूमि पर बुलडोजर कार्रवाई को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. महापौर इसे अपनी निजी संपत्ति बता रहे हैं, जबकि जिला प्रशासन राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर इसे सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा बता रहा है. दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों के चलते यह मामला अब उच्च अधिकारियों के पास पहुंच गया है और अब जांच के बाद ही सच्चाई सामने आएगी.
मुरादाबाद में सरकारी भूमि पर की गई बुलडोजर कार्रवाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. बरेलीमुरादाबाद नेशनल हाईवे के पुराने टोल के पास स्थित जमीन पर जिला प्रशासन की कार्रवाई के बाद मुरादाबाद के महापौर और तहसील प्रशासन आमने-सामने आ गए हैं. दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों के चलते मामला अब उच्च अधिकारियों तक पहुंच गया है.
जानकारी के अनुसार मुरादाबाद सदर तहसील के गांव धीमरी की गाटा संख्या 1086/3, 1087 और 1088 सहित करीब दो हेक्टेयर भूमि और बिलारी तहसील के गैर आबाद गांव वीरपुर और फरीदपुर से जुड़ी जमीन राजस्व अभिलेखों में सरकारी भूमि के रूप में दर्ज बताई गई है. इसी आधार पर तहसील प्रशासन ने राजस्व विभाग की टीम को मौके पर पैमाइश के लिए भेजा था.
पैमाइश के बाद चली बुलडोजर कार्रवाई
राजस्व टीम ने मौके पर पहुंचकर जमीन की पैमाइश की और रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी. रिपोर्ट में अतिक्रमण पाए जाने की बात सामने आने के बाद प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर कब्जा हटाने की कार्रवाई की. अधिकारियों का कहना है कि राजस्व रिकॉर्ड में जमीन सरकारी दर्ज है और इस पर अवैध कब्जा किया गया था. प्रशासन के अनुसार भविष्य में यहां कंपोजिट विद्यालय बनाने का प्रस्ताव है.
महापौर ने जताई आपत्ति
बुलडोजर कार्रवाई के बाद मुरादाबाद के महापौर ने इस पर आपत्ति जताते हुए दावा किया कि जिस जमीन पर कार्रवाई की गई है, वह उनकी निजी संपत्ति है. उनका आरोप है कि बिना पूरी जांच और प्रक्रिया के प्रशासन ने कार्रवाई कर दी.
जांच के बाद ही होगा फैसला
वहीं दूसरी ओर तहसील प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह राजस्व अभिलेखों और पैमाइश रिपोर्ट के आधार पर की गई है. अधिकारियों के मुताबिक संबंधित गाटा संख्या की जमीन सरकारी रिकॉर्ड में राजस्व भूमि के रूप में दर्ज है, इसलिए अतिक्रमण हटाया गया.
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि उक्त जमीन की खरीद-फरोख्त किसी चांद बाबू के नाम से हुई बताई जा रही है. ऐसे में अगर जमीन सरकारी है तो उसकी बिक्री कैसे हुई, यह भी जांच का विषय बन गया है. पूरे मामले को उच्च अधिकारियों के पास भेज दिया गया है और शासन स्तर पर जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी.