ट्रंप बनाम नाटो: क्या यूक्रेन को चुकानी होगी कीमत? पुतिन के साथ ‘सीक्रेट डील’ की आहट!
होर्मुज जलडमरूमध्य पर नाटो से नाराज डोनाल्ड ट्रंप क्या पुतिन के साथ करेंगे डील? जानें यूक्रेन युद्ध पर अमेरिकी नीति के बदलाव और यूरोप पर बढ़ते दबाव का पूरा विश्लेषण।
मिडिल ईस्ट में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बढ़ते तनाव ने सिर्फ तेल बाज़ार को ही नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति को भी हिला दिया है. इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की NATO देशों से बढ़ती नाराज़गी अब सीधे यूक्रेन युद्ध को प्रभावित करती दिख रही है. सवाल है कि क्या अमेरिका और यूरोप के बीच दरार की कीमत यूक्रेन को चुकानी पड़ेगी? और क्या ट्रंप व्लादिमीर पुतिन के साथ कोई डील कर सकते हैं?
विवाद की जड़ क्या है?
अमेरिका ने नाटो देशों खासकर ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस से होर्मुज जलडमरूमध्य में वॉरशिप भेजने की मांग की थी. लेकिन ज्यादातर यूरोपीय देशों ने इससे इनकार कर दिया. इसी के बाद ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाया.
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा:
- नाटो बड़ी गलती कर रहा है
- अमेरिका उनकी सुरक्षा करता है, लेकिन वे साथ नहीं देते
- अगर यही हाल रहा तो नाटो का भविष्य खराब होगा
यूक्रेन पर क्या असर पड़ेगा?
- अमेरिकी मदद और घट सकती है- अमेरिका पहले ही यूक्रेन को दी जाने वाली सैन्य मदद कम कर चुका है. अगर तनाव बढ़ा, तो यह मदद और घट सकती है.
- यूरोप पर बढ़ेगा बोझ- ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट नीति के तहत अब यूक्रेन की जिम्मेदारी यूरोप पर डाली जा रही है. लेकिन कई यूरोपीय देश आर्थिक दबाव में हैं. जनता भी युद्ध से थक चुकी है.
- रूस को मिल सकता है फायदा- अगर अमेरिका पीछे हटता है और यूरोप पूरी तरह साथ नहीं देता, तो
- रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को बढ़त मिल सकती है
- इससे युद्ध का पूरा संतुलन बदल सकता है
- NATO में दरार से रूस को संकेत मिलेगा कि पश्चिम एकजुट नहीं है
- इससे यूक्रेन की स्थिति और भी ज्यादा कमजोर हो सकती है
क्या ट्रंप-पुतिन डील हो सकती है?
यह सबसे बड़ा सवाल है. क्योंकि ट्रंप पहले ही कह चुके हैं कि वे जल्दी शांति समझौता चाहते हैं. उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की को भी कठिन नेता बताया है, लेकिन संभावित डील में क्या हो सकता है?
- यूक्रेन को कुछ कब्जाए गए इलाकों पर समझौता करना पड़ेगा. यानी को कुछ इलाके छोड़ने पड़ सकते हैं
- यूक्रेन की नाटो में शामिल होने की योजना रुक सकती है
- रूस पर लगे कुछ प्रतिबंध कम हो सकते हैं या उनमें ढिलाई होगी और इन सबसे शांति तो हो सकती है, लेकिन यूक्रेन के लिए नुकसानदायक होगा.
रूस को क्या फायदा और उसका क्या असर होगा?
अगर NATO कमजोर पड़ता है:
- पुतिन की रणनीति सफल मानी जाएगी
- पश्चिमी एकता टूटेगी
- भविष्य में और आक्रामक कदम उठाने का हौसला बढ़ सकता है
नाटो से ट्रंप की नाराज़गी अब सिर्फ बयान नहीं, बल्कि एक बड़ा वैश्विक मुद्दा बन चुकी है. इसका सीधा असर यूक्रेन युद्ध पर पड़ सकता है. और अगर ट्रंप और पुतिन के बीच कोई समझौता होता है, तो यूक्रेन को सैन्य और राजनीतिक नुकसान होगा ही. रूस को रणनीतिक बढ़त मिल सकती है और दुनिया एक नए पावर शिफ्ट की ओर बढ़ सकती है. यानी सबसे बड़ी कीमत यूक्रेन चुकाएगा लेकिन इसका असर पूरे यूरोप पर होगा.