ईरान बना रहा ‘न्यूक्लियर जैकेट’ बम? जेडी वेंस की चेतावनी से अमेरिका में हड़कंप

क्या ईरान बना रहा है 'सुसाइड न्यूक्लियर बम'? अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने जताई आशंका। छोटे परमाणु हथियारों और स्लीपर सेल्स के जरिए अमेरिका पर हमले का खतरा।

जंग के बीच ईरान जैकेट वाला न्यूक्लियर बम बना सकता है. अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इसकी आशंका जाहिर की है. वेंस का कहना है कि ईरान बड़ी चालाकी से आगे बढ़ रहा है. वो ऐसा हथियार बनाना चाह रहा है, जिससे अमेरिका में कोहराम मचाया जा सके. ईरान सुसाइड बॉम्बर की तर्ज पर सुसाइड न्यूक्लियर बॉम्बर तैयार करना चाह रहा है. इसके लिए वो न्यूक्लियर वाला जैकेट तैयार कर सकता है.

वेंस ने यह भी संकेत दिया कि यह जैकेट वाला न्यूक्लियर बम सबसे छोटे परमाणु बम को ध्यान में रखकर बनाया जा सकता है. अमेरिका के पास दुनिया का सबसे छोटा परमाणु बम है, जिसमें 23 किलोग्राम वॉरहेड ले जाया जा सकता है. इसकी कुल क्षमता 10 टन TNT है.

जैकेट वाले न्यूक्लियर बम की आशंका क्यों?

ईरान की IRGC समर्थित तस्नीम न्यूज एजेंसी ने एक संपादकीय लेख में एनपीटी से बाहर निकलने की बात कही है. तस्नीम का कहना है कि जब दुनिया के देश नियम कानून नहीं मान रहे हैं, तो हम क्यों मानें? NPT एक न्यूक्लियर संधि प्रस्ताव है.

ईरान के पास 60 प्रतिशत तक संवर्धित 440 किलो यूरेनियम है. एक परमाणु बम बनाने के लिए 90 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम की जरूरत होती है. 440 किलो यूरेनियम से 11 परमाणु हथियार तैयार किए जा सकते हैं.

यह अमेरिका के लिए खतरनाक क्यों है?

1. ईरान के पास फिलहाल ऐसा कोई जेट या मिसाइल नहीं है, जो अमेरिका तक पहुंच सके. यानी परमाणु हथियार बनाने के बाद भी ईरान अमेरिका पर हमला नहीं कर सकता है. दूसरी तरफ अगर ईरान का जैकेट वाला न्यूक्लियर बम तैयार कर लेता है तो उसके जरिए वो अमेरिका पर भी हमला कर सकता है. यही वजह है कि अमेरिका इस बम से डरा हुआ है.

2. ईरान की इस्लामिक गणराज्य से जुड़े स्लीपर सेल अमेरिका में भी एक्टिव हैं. आसानी से ये स्लीपर सेल अमेरिका में कोहराम मचा सकते हैं. ईरान को डर है कि अगर न्यूक्लियर जैकेट वाला बम बनाया जाता है तो उसे रोकना काफी मुश्किल हो सकता है. क्योंकि, ईरानी स्लीपर सेल को अमेरिका में घुसने से रोकना काफी मुश्किल काम है.

3. जैकेट वाले न्यूक्लियर बम से भले बड़े स्तर पर तबाही नहीं मचाई जा सकती है, लेकिन छोटे-छोटे स्तर पर इसका इस्तेमाल कारगर साबित हो सकता है. जेडी वेंस के मुताबिक अगर एक साथ हजारों लोग मारे जाते हैं और एक इलाका शहर का बर्बाद होता है तो पूरी दुनिया में इससे त्राहिमाम मच सकता है.

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