Dharmendra Pradhan: ‘बंगाल में सिंडिकेट, कटमनी और कुशासन राज…’ धर्मेंद्र प्रधान का ममता सरकार पर तीखा हमला
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पश्चिम बंगाल की TMC सरकार पर जनता का भरोसा तोड़ने और भय, अराजकता फैलाने का आरोप लगाया है.
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि टीएमसी सरकार से जनता का भरोसा पूरी तरह से टूट चुका है. ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस का शासन आज भय, अराजकता और अविश्वास का पर्याय बन चुका है. इसी सच्चाई को सामने रखते हुए शनिवार को कोलकाता में गृह मंत्री अमित शाह द्वारा चार्जशीट जारी की गई. यह चार्जशीट बंगाल की जनता के आक्रोश, पीड़ा और परिवर्तन के दृढ़ संकल्प की सशक्त अभिव्यक्ति है.
चार्जशीट पेश करने के अवसर पर शाह ने कहा कि यह चार्जशीट, टीएमसी सरकार के 15 वर्षों के काले कारनामों का संकलन है. ‘सोनार बांग्ला’ का स्वप्न दिखाकर सिंडिकेट राज स्थापित कर बंगाल की जनता का शोषण करने वाले शासन की कहानी है.
टीएमसी के कुशासन में बंगाल भ्रष्टाचार की प्रयोगशाला बन चुका है. ऊपर से नीचे तक आपराधिक सिंडिकेट जनता को परेशान कर रहे हैं. विकास के अभाव में बंगाल उद्योग के लिए एक प्रकार से कब्रगाह बन चुका है.
घुसपैठ और राजनीतिक हिंसा को संरक्षण
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पश्चिम बंगाल में पिछले 15 वर्षों से एक ऐसी सरकार सत्ता में है जिसने घुसपैठ, राजनीतिक हिंसा, तुष्टिकरण और भ्रष्टाचार को न केवल संरक्षण दिया, बल्कि उसे व्यवस्था का हिस्सा बना दिया.
उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस का शासन आज भय, अराजकता और अविश्वास का पर्याय बन चुका है, जनता का भरोसा पूरी तरह टूट चुका है.
TMC राज में अव्यवस्था और अराजकता
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि यह चुनाव सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि राष्ट्र की सुरक्षा का प्रश्न है. बंगाल की सीमाएं देश की सुरक्षा से सीधी जुड़ी हैं और यहां की विफल नीतियों ने इस चुनौती को और गंभीर बना दिया है. सोनार बांग्ला के नाम पर सिंडिकेट, कटमनी और भ्रष्टाचार वाले कुशासन राज में जनता के साथ छल किया गया है.
उन्होंने कहा कि महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध, बेरोजगार युवा, बदहाल किसान, चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्था और गिरता शिक्षा स्तर, हर क्षेत्र में विफलता ही बंगाल की पहचान बनती जा रही है. TMC के राज में अव्यवस्था, अराजकता और आर्थिक पतन ने बंगाल को पीछे धकेल दिया है.