हरियाणा सोलर मिशन: 2.2 लाख घरों पर लगेंगे सोलर प्लांट, बिजली बिल 90% कम

हरियाणा में सौर ऊर्जा का धमाका! 2026-27 तक 2.2 लाख घरों पर सोलर प्लांट का लक्ष्य। अंत्योदय परिवारों को ₹25,000 की अतिरिक्त मदद। जानें कैसे मिलेगी 25 साल मुफ्त बिजली।

चंडीगढ़ : हरियाणा में सौर ऊर्जा को प्रोत्साहन देने, कृषि क्षेत्र के उत्थान, आवासीय व इंडस्ट्रीयल (कमर्शियल) क्षेत्र को लाभान्वित करने की दिशा में अलग-अलग विभाग और एजेंसियां तेजी से काम कर रही हैं। इनमें डी. एन. आर.ई., हरेडा के अलावा उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम हैं।

उत्तर हरियाणा बिजली निगम के प्रवक्ता ने बताया कि सौर ऊर्जा के क्षेत्र में हरियाणा देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है, जबकि सोलर पंप की इंस्टॉलेशन के मामले में महाराष्ट्र के बाद देश भर में दूसरा स्थान हासिल करने वाला राज्य बना है। हालांकि हरियाणा में 2026-27 तक 2.2 लाख घरों पर रूफटॉप सोलर प्लांट लगाने का लक्ष्य तय किया गया है। पी.एम. सूर्य घर योजना के तहत अब तक राज्य में 61875 रूफटॉप सोलर प्लांट लगाए जा चुके हैं।

प्रवक्ता ने बताया कि प्रदेश में किसान, आम व्यक्ति और उद्योगपति हर कोई सौर ऊर्जा के माध्यम से भारी भरकम बिजली बिल की बचत, ग्रिड को अतिरिक्त बिजली यूनिट बेचने और केंद्र व राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं से आर्थिक लाभअर्जित कर रहे हैं। उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम के प्रवक्ता ने बताया कि केंद्र की पी.एम. सूर्य घर योजना के साथ साथ हरियाणा की राज्य सरकार भी अतिरिक्त सबसिडी के अंतर्गत अंत्योदय परिवारों और विशिष्ट श्रेणियों को अतिरिक्त धनराशि का लाभ दिया जा रहा है। इसके अतिरिक्त राज्य सरकार द्वारा सौर ऊर्जा प्रोत्साहन योजना भी लाई गई है जिसके तहत आवासीय उपभोक्ताओं को मुख्य रूप से 3 श्रेणियों में विभाजित किया गया है। नतीजतन बिजली बिल में 90 प्रतिशत तक की कमी और 25 साल तक मुफ्त बिजली मिलती है।

गैर-डिफाल्टर अंत्योदय उपभोक्ताओं के लिए आर्थिक सहायता

अन्य वित्तीय सहायता के अलावा अंत्योदय परिवारों के लिए पहले से चल रही राज्य वित्तीय सहायता को और अधिक सरल एवं आकर्षक बनाया गया है। जिनकी वार्षिक आय 1.80 लाख रुपए तक है, ऐसे अंत्योदय उपभोक्ता का कोई बिजली बिल बकाया नहीं है और उनकी वार्षिक खपत 2400 यूनिट से कम है वे 2 किलोवाट तक की क्षमता का रुफटोफ सोलर प्लांट स्थापित करने के लिए 25,000 रुपए या वास्तविक लागत का 40 प्रतिशत जो भी कम हो, राज्य वित्तीय सहायता के लिए पात्र हैं।

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