हरियाणा सरकार का ऐतिहासिक फैसला: विदेश में युवा की मृत्यु पर आश्रितों को मिलेगी आर्थिक मदद

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की बड़ी घोषणा! विदेश में रोजगार के दौरान मृत्यु होने पर हरियाणा के युवाओं के परिवारों को मिलेगी आर्थिक सहायता। जानें 'प्रवासी हरियाणा कल्याण कोष' के नियम।

चंडीगढ़: हरियाणा के उन हजारों परिवारों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर आई है, जिनके बच्चे सुनहरे भविष्य का सपना लेकर सात समंदर पार जाते हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली हरियाणा सरकार ने एक ऐतिहासिक नीतिगत निर्णय लेते हुए घोषणा की है कि विदेश में रोजगार के दौरान किसी युवा की मृत्यु होने पर उसके आश्रितों को विशेष आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। यह कदम उन परिवारों को ध्यान में रखकर उठाया गया है जो न केवल अपने चिराग को खो देते हैं, बल्कि अक्सर एजेंटों को दिए गए भारी कर्ज के बोझ तले दब जाते हैं।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस योजना के लिए एक समर्पित ‘प्रवासी हरियाणा कल्याण कोष’ का गठन किया जा रहा है। इस फंड का उपयोग न केवल मृत्यु की स्थिति में आर्थिक मदद देने के लिए होगा, बल्कि विदेशों में फंसे हरियाणा के युवाओं को कानूनी सहायता या आपातकालीन स्थिति में वापस लाने के लिए भी किया जा सकेगा।

इस नीति की सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि सहायता केवल उन युवाओं के परिवारों को मिलेगी जो वैध (Legal) दस्तावेजों और वर्क परमिट के साथ विदेश गए थे। जानकारों का मानना है कि यह सरकार की ओर से ‘डंकी रूट’ (अवैध घुसपैठ) के खिलाफ एक ‘साइकोलॉजिकल सर्जिकल स्ट्राइक’ है। सरकार का संदेश साफ है— यदि आप वैध रास्ते से जाते हैं, तो आपकी और आपके परिवार की जिम्मेदारी सरकार की है; लेकिन अवैध रास्ता चुनने पर जोखिम केवल आपका होगा।

भ्रष्ट एजेंटों पर कसता शिकंजा
इस योजना के साथ ही हरियाणा पुलिस और विदेश सहयोग विभाग ने उन अवैध कबूतरबाजों (एजेंटों) के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है जो युवाओं को झूठे प्रलोभन देकर अवैध रास्तों से भेजते हैं। अब HKRN (हरियाणा कौशल रोजगार निगम) के माध्यम से पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया को बढ़ावा दिया जा रहा है।

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