आबकारी नीति मामला: केजरीवाल और सिसोदिया को दिल्ली हाई कोर्ट का आखिरी अल्टीमेटम

दिल्ली हाई कोर्ट ने आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को जवाब दाखिल करने का आखिरी मौका दिया। ईडी की याचिका पर जस्टिस स्वर्णकांत शर्मा का सख्त रुख।

दिल्ली की आबकारी नीति मामले में ईडी की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य को जवाब दाखिल करने के लिए आखिरी मौका दिया है. ईडी ने इन सबको आरोपमुक्त करने के निचली अदालत के फैसले में जांच एजेंसियों के खिलाफ टिप्पणी को हटाने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है. जस्टिस स्वर्णकांत शर्मा ने कहा, अगर अब भी जवाब दाखिल नहीं हुए तो ये सभी पक्षकार जवाब दाखिल करने का अपना अधिकार खो देंगे.

बता दें कि ईडी ने आबकारी नीति जांच में समन जारी होने के बावजूद पेश ना होने के मामलों में अरविंद केजरीवाल को बरी किए जाने के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है. इस मामले में बीते दिन अदालत ने समन से जुड़े मामलों में बरी किए जाने के खिलाफ ईडी की याचिका पर केजरीवाल को नोटिस जारी किया.

हाई कोर्ट ने बीते दिन कही थी ये बात

हाई कोर्ट ने बुधवार को केजरीवाल से ईडी की उस याचिका पर उनका पक्ष जानना चाहा था जिसमें आबकारी नीति मामले में समन जारी होने के बाद भी जांच एजेंसी के सामने पेश ना होने के कारण उनके खिलाफ दर्ज 2 अलग-अलग मामलों में उन्हें बरी किए जाने को चुनौती दी गई है.

कोर्ट ने निचली अदालत के आदेशों के खिलाफ ईडी द्वारा दायर याचिकाओं पर केजरीवाल को नोटिस जारी किया और सुनवाई 29 अप्रैल के लिए तय की. कोर्ट ने कहा, प्रतिवादी ने पहले से सूचना मिलने के बाद भी पेश ना होने का विकल्प चुना. इसको देखते हुए नया नोटिस जारी किया जाए और 29 अप्रैल को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करें.

ईडी ने अपनी शिकायत में ये आरोप लगाया

उधर, निचली अदालत में ईडी ने कहा, अरविंद केजरीवाल ने समन पर जानबूझकर अमल नहीं किया और जांच में शामिल नहीं हुए. इतना ही नहीं केजरीवाल ने बेबुनियाद आपत्तियां उठाईं. जानबूझकर ऐसी दलीलें दीं जिससे उन्हें जांच में शामिल ना होना पड़े. इससे पहले निचली अदालत ने कहा था कि ईडी यह साबित करने में विफल रही कि अरविंद केजरीवाल ने जानबूझकर जारी हुए समन का उल्लंघन किया.

‘अन्य आरोपी केजरीवाल के संपर्क में थे’

ईडी का कहना है कि मामले के अन्य आरोपी दिल्ली के पूर्व सीएम केजरीवाल के संपर्क में थे. उन्होंने रद्द की जा चुकी आबकारी नीति को तैयार करने में मदद की थी. इसके बदले उन्हें अनुचित लाभ मिला. फिलहाल मनी लॉन्ड्रिंग मामले में केजरीवाल अंतरिम जमानत पर हैं.

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