Balod News: बालोद का औराटोला बना छत्तीसगढ़ का पहला ‘लखपति ग्राम’, महिलाएं बनीं मिसाल

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले का औराटोला गांव बना 'लखपति ग्राम'। बिहान योजना से जुड़कर 20,982 महिलाएं बनीं 'लखपति दीदी'। मछली पालन, पशुपालन और फाइल पैड यूनिट से बदली किस्मत।

छत्तीसगढ़ राज्य का बालोद जिला गौरव की अलग ही गाथा लिख लहा है. यहां महिलाओं को आर्थिक रुप से मजबूत और छोटे व्यवसाओं से जोड़ा जा रहा है. डौंडी ब्लॉक का औराटोला गांव जिले का प्रथम ‘लखपति ग्राम बनकर उभरा है. इस गांव ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि सही मार्गदर्शन और दृढ़ इच्छा शक्ति हो तो सामूहिक प्रयास से गरीबी को मात दी जा सकती है. औराटोला की सफलता के पीछे बिहान योजना और महिलाओं की अटूट मेहनत है. यहां की महिलाओं ने पारंपरिक खेती के दायरे से बाहर निकलकर बहुआयामी आजीविका को अपनाया.

औराटोला गांव में अब दर्जनों ऐसी महिलाएं हैं जिनकी वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक है. इसके अंतर्गत महिलाओं ने खाली पड़ी जमीनों पर उन्नत किस्म की सब्जियां उगाना शुरू किया. महिलाओं ने उन्नत नस्ल के पशु और वैज्ञानिक तरीके से देखरेख करना, गांव में उन महिलाओं का समूह बनाया गया जो अन्य महिलाओं को भी आर्थिक नियोजन सिखाती हैं. बालोद जिले के औराटोला जैसे गांवों की प्रेरणा लेकर यह तीन महिलाओं की काल्पनिक लेकिन यथार्थवादी सफलता की कहानियां दर्शाती हैं कि कैसे अलग-अलग क्षेत्रों में काम करके महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन रही हैं.

एक लाख 17 हजार रुपए सालाना इनकम

कुमेश्वरी मसिया ने बताया कि उन्होंने प्रेरणा स्वयं सहायता समूह से जुड़कर मत्स्य विभाग से मत्स्य पालन का प्रशिक्षण लिया. उन्होंने समूह के माध्यम से 50 हजार रुपए का ऋण लिया और तालाब की सफाई करवाकर उसमें रोहू और कतला मछलियों के बीज डाले. मछली पालन के साथ-साथ कुमेश्वरी ने पैतृक भूमि 20 डिसमिल में सब्जी बाड़ी का कार्य प्रारंभ किया. मछलीपालन हेतु वर्तमान में मत्स्य विभाग द्वारा उन्हें मछली जाल एवं आईस बॉक्स प्रदान किया गया है. कुमेश्वरी साल में दो बार मछली की खेप बेचती हैं और सब्जी बेचकर एवं खर्च काटकर उनकी वार्षिक शुद्ध आय 1 लाख 17 हजार रुपए तक पहुंच गई है.

वहीं, बिहान योजना के तहत अटल महिला स्व-सहायता समूह के अध्यक्ष लाकेश्वरी दीदी बताती है कि समूह के 10 सदस्यों ने फाइल पैड बनाने का प्रशिक्षण लिया और सभी सदस्य सहमत होकर बिहान के माध्यम से एक लाख रुपए बैंक से ऋण लेकर फाइल पैड की एक छोटी यूनिट स्थापित की. फाइल पैड विक्रय हेतु उन्होंने केवल शहर पर निर्भर रहने के बजाय आसपास के लोकल बुक डिपो, एवं शासकीय कार्यालय में कम कीमत पर फाइल पैड उपलब्ध कराया जा रहा हैं. फाइल पैड अच्छी गुणवत्ता और कम दाम के कारण मांग बढ़ गई. इस प्रकार सभी खर्च निकालने पर प्रत्येक माह सभी सदस्य 7 से 8 हजार रुपए आय अर्जित कर रही हैं.

दूध-खोवा और पनीर से भी मुनाफा

प्रेरणा स्व-सहायता समूह की लोकेश्वरी साहू ने लखपति दीदी पहल के तहत पशु पालन हेतु ‘पशु सखी’ से प्रशिक्षण लिया और बिहान के माध्यम से 1 लाख का ऋण लेकर दो उन्नत नस्ल की जर्सी गाय खरीदी. उन्होंने पारंपरिक चारे के बजाय ‘अजोला’ और संतुलित पशु आहार का उपयोग शुरू किया. पशु पालन के साथ-साथ लोकेश्वरी ने आरसेटी के माध्यम से सिलाई मशीन का प्रशिक्षण लिया. इसके बाद सिलाई कार्य प्रारंभ किया और मशरुम उत्पादन हेतु लोकेश्वरी दीदी ने कृषि विज्ञान केन्द्र अरौद से मशरूम का प्रशिक्षण प्राप्त कर उत्पादन शुरू किया. उन्होंने कहा कि प्रति दिन 10-15 किग्रा मशरूम उत्पादन कर 200 रुपए प्रति किग्रा की दर से लोकल बाजार, सीएलएफ. मीटिंग एवं स्कूल, जिले एवं जिला कार्यालय एवं अन्य विभागों में जाकर विक्रय कर रही हैं.

जिले भर में 20,982 लखपति दीदी

जिला पंचायत के सीईओ सुनील कुमार चंद्रवंशी ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश के अनुसार एवं उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन तथा कलेक्टर दिव्या मिश्रा के नेतृत्व में बिहान टीम के साथ लखपति पहल की मुहिम को जिले में पूरी सक्रियता से आगे बढ़ाया जा रहा है. इससे लखपति दीदी के वर्तमान आय, आंकलन एवं अभिसरण के माध्यम से आवश्यक वित्तीय एवं तकनीकी हस्तक्षेप पर फोकस किया गया है.

जिले में 26 हजार लक्ष्य के विरूद्ध 20 हजार 982 दीदियों को लखपति श्रेणी में लाया जा चुका है. शेष को जनवरी से मार्च तक के चौथे क्वार्टर की डिजिटल आजीविका रजिस्टर की एंट्री अप्रैल में होनी है, जिसका लक्ष्य भी पूर्ण कर लिया जाएगा. लखपति दीदी पहल के क्रियान्वयन में इस विषय पर विशेष ध्यान दिया गया है. उनके वर्तमान आय स्त्रोत को ही विकसित कर दो से तीन गतिविधियों से जोड़कर आय में बढ़ोतरी किया जाना है.

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