Bhiwani News: नगर परिषद का मास्टर प्लान, अब गोबर से बनेगी ‘लकड़ी’ और बढ़ेगी कमाई

भिवानी में सीवर जाम से मिलेगी मुक्ति! नगर परिषद डेयरियों से गोबर इकट्ठा कर बनाएगी लकड़ीनुमा गुटके। नंदीशाला के पास लगेगा प्लांट, प्रदूषण और गंदगी से मिलेगी राहत।

भिवानी। शहरी क्षेत्र में पशु डेयरियों से निकलने वाला गोबर अब सीवर जाम करने के बजाय नगर परिषद की आमदनी का नया जरिया बनेगा। इसके लिए नगर परिषद ने मास्टर प्लान तैयार कर लिया है जिसे जल्द ही लागू किया जाएगा। डेयरियों से गोबर एकत्रित कर लकड़ीनुमा गुटके तैयार किए जाएंगे। इनकी बिक्री से आय बढ़ाने के साथ-साथ ईंधन का विकल्प भी उपलब्ध होगा। नगर परिषद द्वारा नंदीशाला के पास इस कार्य के लिए प्लांट स्थापित करने की तैयारी है।

शहर में 60 से अधिक पशु डेयरियां हैं जिनसे प्रतिदिन लगभग 50 क्विंटल गोबर निकलता है। परिषद जल्द ही चिह्नित डेयरियों से डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन की तर्ज पर गोबर एकत्रित करने का कार्य शुरू करेगी। वर्तमान में यही गोबर शहरी सीवर सिस्टम को जाम कर रहा है। सुपर सकर मशीनों से मुख्य सीवर लाइनों की सफाई के दौरान बड़ी मात्रा में गोबर निकल रहा है। सफाई के दौरान जहरीली गैस उत्पन्न होती है और सफाई कर्मचारियों की जान का खतरा बना रहता है। नगर परिषद के मास्टर प्लान के तहत दो नए ट्रैक्टर-ट्रॉली भी खरीदे जाएंगे ताकि सफाई व्यवस्था प्रभावित न हो और केवल गोबर संग्रहण का कार्य अलग से किया जा सके। ये ट्रैक्टर-ट्रॉली चिह्नित डेयरियों से गोबर एकत्रित कर प्लांट तक पहुंचाएंगे जहां ऑटोमेटिक मशीनों की सहायता से लकड़ीनुमा गुटके तैयार किए जाएंगे।

शहर के इन हिस्सों में हैं पशु डेयरियां
शहर के दिनोद गेट, हालुवास गेट, बैंक कॉलोनी, फ्रेंड्स कॉलोनी, सेक्टर 13 व 23 के रिहायशी इलाके, राजीव कॉलोनी, ढाणा रोड, कोंट रोड, लक्ष्मी नगर, खाकी बाबा मंदिर क्षेत्र, जगत कॉलोनी, डीसी कॉलोनी, पुराना बस स्टैंड क्षेत्र, फैन्सी चौक सहित पुराने शहर की कई रिहायशी कॉलोनियों में अवैध पशु डेयरियां संचालित हो रही हैं। इसके अलावा घनी आबादी वाले अंदरूनी क्षेत्रों में भी पशुपालन किया जा रहा है। पशुबाड़ों से निकलने वाला गोबर सीधे मुख्य सीवर लाइन में पहुंच रहा है।

मक्खी-मच्छरों और प्रदूषण से मिलेगी राहत
पशु डेयरियों से निकलने वाला गोबर मक्खी-मच्छरों की तादाद बढ़ाने के साथ-साथ प्रदूषण का कारण भी बन रहा है। इसके उचित निस्तारण से इन समस्याओं से राहत मिलेगी। हालांकि बड़ी गोशालाओं में गोबर गैस प्लांट स्थापित हैं जहां हजारों टन गोबर का निस्तारण हो रहा है लेकिन छोटी डेयरियों में ऐसी व्यवस्था नहीं है।

सीवर सफाई पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च
जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग को मुख्य और अन्य सीवर लाइनों की सफाई पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। इसके लिए दिल्ली से सुपर सकर और सुपर हैवी सकर मशीनें मंगवानी पड़ती हैं जिनसे सीवर लाइनों की रुकावट दूर कर दूषित पानी का प्रवाह सुचारू किया जाता है। नगर परिषद की इस पहल से जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग और नगर परिषद दोनों को राहत मिलने की उम्मीद है।

नगर परिषद पशु डेयरियों से गोबर कलेक्शन और उसके निस्तारण को लेकर अलग से प्लांट लगाने जा रही है। शहर के अंदर चिह्नित पशु डेयरियों से रोजाना गोबर कलेक्शन होगा और प्लांट तक लाकर लकड़ी नुमा गुटके तैयार किए जाएंगे। इसके लिए नंदीशाला के पास प्लांट स्थापित करने की जगह चिह्नित की जा चुकी है। गोबर की वजह से शहर में सीवर जाम होते हैं और प्रदूषण भी फैलता है।

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