Chhattisgarh News: खल्लारी मंदिर में बड़ा रोपवे हादसा; केबल टूटने से गिरी ट्रॉली, 1 महिला की मौत, 16 घायल

महासमुंद के खल्लारी मंदिर में रविवार सुबह रोपवे का केबल टूटने से बड़ा हादसा हो गया. इस घटना में रायपुर की आयुषी सतकर की मौत हो गई, जबकि 16 अन्य श्रद्धालु घायल हुए हैं.

छत्तीसगढ़ के महासमुंद स्थित प्रसिद्ध तीर्थ स्थल खल्लारी मंदिर में रविवार सुबह एक बड़ा हादसा हो गया. नवरात्रि के दौरान दर्शन करने आए श्रद्धालुओं से भरी रोपवे ट्रॉली का केबल अचानक टूट गया, जिससे वह ऊंचाई से सीधे जमीन पर आ गिरी. इस दर्दनाक हादसे में रायपुर की रहने वाली एक 28 वर्षीया महिला की मौके पर ही मौत हो गई है. जबकि, 16 लोग अब तक घायल हुए हैं.

जानकारी के अनुसार, यह घटना सुबह करीब 10 बजे की है. नवरात्रि के चलते खल्लारी माता मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी थी. मंदिर दर्शन के बाद श्रद्धालु रोपवे ट्रॉली के जरिए नीचे उतर रहे थे. इसी दौरान ट्रॉली को थामने वाला मुख्य केबल अचानक झटके के साथ टूट गया. ऊंचाई अधिक होने के कारण ट्रॉली अनियंत्रित होकर नीचे गिर गई और पलट गई. हादसे के वक्त ट्रॉली में क्षमता से अधिक दबाव या तकनीकी खराबी की आशंका जताई जा रही है.

रायपुर की आयुषी की मौत, 4 की हालत नाजुक

इस भीषण दुर्घटना में रायपुर निवासी आयुषी सतकर (28 वर्ष) की जान चली गई. वहीं, कुल 16 लोग घायल हुए हैं. घायलों को तत्काल स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां से उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए 04 मरीजों को रायपुर रेफर कर दिया गया है. रायपुर रेफर किए गए श्रद्धालुओं की हालत बेहद चिंताजनक बताई जा रही है.

प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल

हादसे के बाद मंदिर परिसर में अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई. सूचना मिलते ही पुलिस और जिला प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और बचाव कार्य शुरू किया. स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों ने रोपवे के रखरखाव पर सवाल उठाए हैं. प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं. फिलहाल रोपवे सेवा को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया गया है.

800 सीढ़ियां चढ़कर पहुंचते हैं मंदिर में

महासमुंद से 25 किमी. दक्षिण की ओर खल्लारी गांव की पहाड़ी के शीर्ष पर खल्लारी माता का मंदिर स्थित है. प्रतिवर्ष क्वांर और चैत्र नवरात्र के दौरान बड़ी संख्या में भक्तों की भीड़ इस दुर्गम पहाड़ी में दर्शन के लिए आती है. हर साल चैत्र मास की पूर्णिमा के अवसर पर वार्षिक मेले का आयोजन किया जाता है. मंदिर तक पहुंचने के लिए करीब 800 सीढ़ियां चढ़नी होती है. ऐसा माना जाता है कि महाभारत युग में पांडव अपनी यात्रा के दौरान इस पहाड़ी की चोटी पर आए थे.

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