Delhi Assembly: 15 साल बाद सदन में पेश हुई CAG रिपोर्ट; विजेंद्र गुप्ता बोले— विभागों को अब देना होगा जवाब
दिल्ली विधानसभा में 15 साल बाद लोक लेखा समिति (PAC) ने CAG रिपोर्टों को अपनाया है. स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने बताया कि पूर्ववर्ती सरकार ने रिपोर्टें नहीं रखी थीं, पर अब सभी सीएजी रिपोर्ट सदन में हैं.
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि 15 से अधिक वर्षों के बाद सदन ने PAC की रिपोर्टो को अपनाया है. जैसा कि आप सभी जानते हैं कि पूर्ववर्ती सरकार ने सदन में सीएजी की प्रतियां नहीं रखीं और पीएसी को व्यावहारिक रूप से निष्क्रिय कर दिया गया. उस अवधि में एक भी रिपोर्ट सदन में नहीं रखी गई. मगर, अब सरकार को मिलीं सभी सीएजी रिपोर्ट सदन के समक्ष रखी जा चुकी हैं और उन्हें पीएसी व सीओजीयू को संदर्भित किया गया है.
विजेंद्र गुप्ता ने कहा, पीएसी सदन की सर्वाधिक महत्वपूर्ण समितियों में से एक है, जिस पर कार्यपालिका एवं वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित करने का महत्त्वपूर्ण दायित्व है. मुझे खुशी है कि दिल्ली विधानसभा पीएसी को फिर से पटरी पर लाई है. एक साल की अवधि में पीएसी ने स्वास्थ्य, आबकारी एवं वाहन प्रदूषण पर सीएजी रिपोर्टों के आधार पर सफलतापूर्वक तीन रिपोर्ट पेश की हैं.
पीएसी के अध्यक्ष एवं सदस्यों को बधाई
उन्होंने कहा, मैं इस सराहनीय प्रयास के लिए पीएसी के अध्यक्ष एवं सदस्यों को बधाई देता हूं. समिति ने अपने निष्कर्षों पर अत्यंत ठोस अनुशंसाएं की हैं. समिति ने रिपोर्ट किया है कि विभागों ने अपने कार्य में पाई गई अनियमितताओं एवं कमियों को दूर करने के लिए सुधारात्मक उपाय करने शुरू कर दिए हैं. संसदीय परंपरा एवं परिपाटी के अनुसार विभागों से अपेक्षित है कि वे पीएसी की अनुशंसाओं पर अपने कार्रवाई विवरण (एटीएन) पेश करें.
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा, सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया जाता है कि वो रिपोर्टों में उल्लिखित निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपने एटीएन पेश करें. विधानसभा सचिवालय को निर्देशित किया जाता है कि वह उक्त रिपोर्ट तत्काल संबंधित विभागों को आगे की कार्रवाई हेतु प्रेषित करे.
CAG के मुताबिक, 2017-18 से 2021-22 के बीच दिल्ली जल बोर्ड के कामकाज
- दिल्ली में जल की मांग और आपूर्ति के बीच बढ़ती खाई
- रेणुका, लखवार और किशाऊ बांध परियोजनाओं के क्रियान्वयन में ज्यादा देरी
- जल की आवश्यकता के नियोजन हेतु कोई जल नीति का अभाव
- पारेशन हानियों में वृद्धि और प्रति व्यक्ति पेयजल उपलब्धता अत्यंत कम.
- भूजल संसाधनों के विनियमन, नियंत्रण एवं विकास हेतु कोई योजना नहीं
- गैर-राजस्व जल के कारण DJB को अपात्र अनुमानित राजस्व ₹4,988 करोड़
- 1,080 अनाधिकृत कॉलोनियों से उत्पन्न 212.59 MGD सीवेज को बिना शोधन के तूफानी जल नालों में प्रवाहित किया जा रहा था
- 25 STP द्वारा यमुना में छोड़ा गया शोधित प्रवाह, DPCC द्वारा निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करता था
- NIT शर्तों और CPWD दिशानिर्देशों के उल्लंघन में कार्यों के आकलन, आवंटन एवं क्रियान्वयन में अनियमितताएं पाई गईं
- राजस्व प्रबंधन प्रणाली दोषपूर्ण पाई गई और कार्यात्मक कमियों से ग्रस्त थी
- कर्मचारियों की गंभीर कमी तथा संहिता-बद्ध औपचारिकताओं के उल्लंघन में अनियमित नियुक्तियां पाई गईं