IPO Market Update: रिलायंस जियो और NSE के लिए खुला रास्ता! बड़ी कंपनियों के लिए बदले IPO नियम, अब 2.5% शेयर बेचना ही होगा काफी
भारतीय शेयर बाजार में अब बड़ी कंपनियों के लिए IPO लाना आसान होगा। सरकार ने ₹5 लाख करोड़ से ज्यादा वैल्यू वाली कंपनियों के लिए न्यूनतम शेयर बिक्री का कोटा घटाकर 2.5% कर दिया है। जानें रिलायंस जियो और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर इसका क्या होगा असर।
भारत ने स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होते समय बड़ी कंपनियों द्वारा बेचे जाने वाले शेयरों का रेश्यो अनुपात कम कर दिया है, जिससे नेशनल स्टॉक एक्सचेंज और रिलायंस जियो के लिए IPO लाने का रास्ता खुल गया है. रेगुलेटर ने पिछले साल प्रस्ताव दिया था कि बड़ी कंपनियों को अपने IPO में जितने न्यूनतम शेयर ऑफर करने होते हैं, उस मात्रा को आधा कर दिया जाए. इसके तहत, लिस्टिंग के बाद 5 लाख करोड़ रुपए (57 अरब डॉलर) से ज्यादा वैल्यू वाली कंपनियां अपनी ‘पेड-अप कैपिटल’ का सिर्फ 2.5 फीसदी हिस्सा ही बेच पाएंगी. सरकार ने अब इसे औपचारिक रूप से नोटिफाई कर दिया है, जिससे यह नियम लागू हो गया है. ये बदलाव शुक्रवार देर रात जारी किए गए गए हैं. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर रेगुलेटर ने नियमों में किस तरह के बदलाव किए हैं?
रेगुलेटर ने किए ये अहम बदलाव
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- इक्विटी शेयरों की हर कैटेगिरी में से कम से कम 2.5 फीसदी शेयर आम जनता को ऑफर किए जा सकते हैं.
- 25 फीसदी public shareholding तक पहुंचने के लिए एक अनिवार्य ‘ग्लाइड पाथ’ (समय-सीमा) तय की गई है. लिस्टिंग के समय जिन कंपनियों की पब्लिक शेयरहोल्डिंग 15 फीसदी से कम होगी, उन्हें 15 फीसदी तक पहुँचने के लिए 5 साल और 25 फीसदी तक पहुंचने के लिए 10 साल का समय मिलेगा.
- यदि लिस्टिंग के समय ‘पब्लिक फ़्लोट’ (बाज़ार में उपलब्ध शेयर) 15 फीसदी से ज़्यादा है, तो कंपनी को 25 फीसदी तक पहुंचने के लिए 5 साल का समय मिलेगा.
- जिन कंपनियों का ‘मार्केट कैपिटलाइजेशन’ (बाज़ार पूंजीकरण) 1 लाख करोड़ रुपए से 5 लाख करोड़ रुपए के बीच है, उनके लिए न्यूनतम ‘पब्लिक फ्लोट’ 2.75 फीसदी तय किया गया है.
- जिन कंपनियों का ‘मार्केट कैपिटलाइज़ेशन’ 50,000 करोड़ रुपए से 1 लाख करोड़ रुपए के बीच है, उनके लिए न्यूनतम ‘पब्लिक फ्लोट’ 8 फीसदी तय किया गया है.
- अन्य प्रावधानों में एक शर्त यह भी शामिल है कि यदि कोई कंपनी, जिसके पास ‘सुपीरियर वोटिंग राइट्स’ (ज़्यादा वोटिंग अधिकार) वाले इक्विटी शेयरों की कोई कैटेगिरी मौजूद है, अपने ‘साधारण शेयर’ (ordinary shares) लिस्ट करती है, तो उसे अनिवार्य रूप से ‘सुपीरियर वोटिंग राइट्स’ वाले शेयरों को भी लिस्ट करना होगा.