LPG vs Induction: गैस सिलेंडर की किल्लत के बीच इंडक्शन की भारी डिमांड; जानें गैस और बिजली में से किस पर खाना पकाना है सबसे सस्ता?
भारत में एलपीजी की कमी और एस्मा (ESMA) लागू होने के बाद महानगरों में इंडक्शन कुकटॉप आउट ऑफ स्टॉक हो गए हैं। क्या गैस छोड़कर बिजली पर खाना पकाना फायदेमंद है? जानें गैस सिलेंडर और इंडक्शन के बीच खर्च का पूरा गणित और महीने भर की बचत का आंकड़ा।
मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव का असर अब सीधे आम आदमी की रसोई तक पहुंचने लगा है. वैश्विक स्तर पर तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे भारत में भी एलपीजी (LPG) को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं. हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू उत्पादन में वृद्धि हुई है और घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है. आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने के लिए सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम (एस्मा/ESMA) भी लागू कर दिया है. इसके बावजूद, रिफिल बुकिंग में हो रही देरी और गैस की बढ़ती कीमतों की खबरों ने उपभोक्ताओं के बीच बेचैनी पैदा कर दी है. इसी डर का नतीजा है कि लोग न सिर्फ अतिरिक्त गैस सिलेंडर जमा कर रहे हैं, बल्कि खाना पकाने के वैकल्पिक तरीकों की ओर भी तेजी से रुख कर रहे हैं.
महानगरों में आउट ऑफ स्टॉक हुए इंडक्शन
गैस की संभावित किल्लत की खबरों ने बाजार के समीकरण बदल दिए हैं. बिजली से चलने वाले कुकटॉप यानी इंडक्शन की बिक्री में अचानक भारी उछाल आया है. स्थिति यह है कि दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई और कोलकाता जैसे प्रमुख महानगरों के कई इलाकों में इंडक्शन आउट ऑफ स्टॉक हो गए हैं. बड़े शोरूम्स से लेकर छोटी दुकानों तक, हर जगह इंडक्शन की भारी कमी देखी जा रही है. इस अफरा-तफरी के बीच हर उपभोक्ता के मन में एक ही सवाल है कि क्या पारंपरिक गैस स्टोव को छोड़कर बिजली के इंडक्शन पर खाना पकाना आर्थिक रूप से एक समझदारी भरा कदम है? आइए इसके पीछे का पूरा गणित समझते हैं.
गैस सिलेंडर या इंडक्शन किसमें खाना पकाना है सस्ता?
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- गैस स्टोव का नुकसान: जब गैस स्टोव पर खाना पकाया जाता है, तो उत्पन्न होने वाली लगभग 60 प्रतिशत गर्मी बर्तन के किनारों से होकर हवा में उड़ जाती है. इसका सीधा अर्थ यह है कि आप गैस के लिए जो कीमत चुका रहे हैं, उसका सिर्फ 40 प्रतिशत हिस्सा ही आपके भोजन को पकाने में काम आ रहा है.
- इंडक्शन की कार्यक्षमता: इसके विपरीत, इंडक्शन की तकनीक कहीं अधिक आधुनिक और वैज्ञानिक है. यह शीशे की सतह के नीचे लगे तांबे के कॉइल और चुंबकीय क्षेत्र (मैग्नेटिक फील्ड) के सिद्धांत पर कार्य करता है. जब इस पर कोई ऐसा बर्तन रखा जाता है जो चुंबकीय गुण रखता हो, तो गर्मी सीधे बर्तन की धातु के भीतर उत्पन्न होती है. इस सटीक तकनीक के कारण इंडक्शन की कार्यक्षमता 90 प्रतिशत तक होती है और ऊर्जा की बर्बादी न के बराबर होती है.
हर महीने बचेंगे इतने रुपये
- गैस का खर्च: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के आंकड़ों पर गौर करें तो एक बिना सब्सिडी वाले 14.2 किलोग्राम के एलपीजी सिलेंडर की कीमत फिलहाल 913 रुपये के आसपास है.
- बिजली का खर्च: यदि आप एक पूरे सिलेंडर से मिलने वाली गर्मी के बराबर की ऊर्जा इंडक्शन से प्राप्त करना चाहते हैं, तो इसके लिए लगभग 78 यूनिट बिजली खर्च होगी. अगर बिजली की दर 8 रुपये प्रति यूनिट भी मान ली जाए, तो महीने भर का कुल खर्च मात्र 624 रुपये बैठेगा.
- सीधी बचत: यानी, गैस सिलेंडर की तुलना में आप हर महीने लगभग 300 रुपये की सीधी बचत कर सकते हैं. तमिलनाडु जैसे राज्यों में, जहां घरेलू उपभोक्ताओं के लिए शुरुआती 100 यूनिट बिजली मुफ्त है, वहां यह बचत का आंकड़ा और भी बड़ा हो सकता है.
शुरुआती निवेश इंडक्शन में ज्यादा
इंडक्शन पर पूरी तरह निर्भर होने के लिए आपको शुरुआत में कुछ पूंजी लगानी होगी. एक अच्छी गुणवत्ता वाले इंडक्शन कुकटॉप की कीमत 2,000 से 4,000 रुपये के बीच होती है. साथ ही, इसके लिए आपको फ्लैट बॉटम वाले स्टेनलेस स्टील या कास्ट आयरन के विशेष बर्तनों का सेट भी खरीदना होगा. बिजली की लगातार खपत आपके बिल को ऊपरी स्लैब में भी ले जा सकती है, लेकिन दैनिक खर्च इतना कम है कि एक आम परिवार इस शुरुआती निवेश की भरपाई साल भर के भीतर आसानी से कर लेता है. इसका एक अतिरिक्त लाभ यह भी है कि रसोई का तापमान सामान्य रहता है और साफ-सफाई में भी सहूलियत होती है. वहीं 14.2 kg का सिलेंडर 1,200 रुपये से 1500 रुपये के बीच हो मिल जाता है. इसमें से गैस के दाम के अलावा पैसा सुरक्षा (Security Deposit) के तौर पर होता है.
रेस्टोरेंट और होटलों के लिए यह बदलाव आसान क्यों नहीं?
घरेलू स्तर पर इंडक्शन भले ही एक किफायती और सुरक्षित विकल्प नजर आता हो, लेकिन व्यावसायिक स्तर पर खासकर रेस्टोरेंट और होटलों के लिए यह राह इतनी आसान नहीं है.
- बिजली का लोड: अधिकांश रेस्टोरेंट ‘लो टेंशन’ (Low Tension) बिजली कनेक्शन पर संचालित होते हैं. वे अचानक इंडक्शन कुकिंग का भारी इलेक्ट्रिक लोड सहन नहीं कर सकते. ‘हाई टेंशन’ (High Tension) कनेक्शन लेना व्यावसायिक रूप से काफी खर्चीला होता है.
- महंगे उपकरण: कमर्शियल इलेक्ट्रिक उपकरणों का शुरुआती खर्च एलपीजी उपकरणों की तुलना में बहुत अधिक होता है. एक कमर्शियल इंडक्शन बर्नर स्थापित करने में ही लगभग 3.5 लाख रुपये तक का भारी-भरकम खर्च आ सकता है.
- समय और पावर बैकअप: कोयंबटूर एयरपोर्ट का उदाहरण लें, तो वहां सुरक्षा कारणों से गैस सिलेंडर पर प्रतिबंध है और इलेक्ट्रिक तवे का उपयोग किया जाता है. लेकिन इसमें एलपीजी की तुलना में खाना पकने में अधिक समय लगता है. साथ ही, पावर कट की स्थिति में लगातार जनरेटर या बैकअप की जरूरत एक बड़ी चुनौती है. इन्हीं व्यावहारिक कारणों से आज भी कमर्शियल रसोई में एलपीजी को ही प्राथमिकता दी जाती है.