Noida News: नोएडा में प्राइवेट बसों का बोलबाला! परिवहन विभाग ने रोडवेज की 10 मिनी बसें क्यों लौटाईं? जानें असली वजह

नोएडा और ग्रेटर नोएडा में निजी बसों के दबदबे के कारण रोडवेज की 10 मिनी डीजल बसों को मुख्यालय वापस भेजना पड़ा है. परिवहन विभाग ने घाटे की आशंका के चलते यह निर्णय लिया है.

उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले में एक तरफ सरकार सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के प्रयास कर रही है, तो वहीं दूसरी तरफ निजी बस संचालकों की मनमानी के चलते रोडवेज की बसों का संचालन प्रभावित हो रहा है. हालात ऐसे हो गए हैं कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा डिपो को मिली 10 मिनी डीजल बसों को सड़क पर उतरने से पहले ही मुख्यालय वापस भेजना पड़ गया.

बताया जा रहा है कि इन मिनी बसों का संचालन नोएडा गाजियाबाद और बुलंदशहर के विभिन्न रूटों पर किया जाना था. इसके लिए परिवहन विभाग ने पूरी तैयारी भी कर ली थी. लेकिन शहर के प्रमुख चौराहों पर निजी बसों के दबदबे के कारण रोडवेज की बसों को पर्याप्त सवारियां नहीं मिल पा रही थीं. ऐसे में विभाग को नुकसान होने की आशंका के चलते इन बसों को वापस भेजने का फैसला लेना पड़ा. परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ग्रेटर नोएडा के परी चौक और नोएडा के सेक्टर 37 में प्राइवेट बसों का सबसे ज्यादा दबदबा है.

रोडवेज बस में यात्रियों की संख्या हो रही कम

यहां निजी बस चालक मुख्य सड़क और चौराहों के पास बस खड़ी कर सवारियां बैठा लेते हैं, जबकि परिवहन निगम की बसों को नियमों के तहत मुख्य मार्ग से हटकर निर्धारित स्थानों से ही सावरियां लेनी होती हैं. इसी वजह से रोडवेज बसों में यात्रियों की संख्या कम हो रही है और निगम को घाटा उठाना पड़ रहा है. अधिकारियों को कहना है कि निजी बस संचालक सर्विस रोड के अलावा मुख्य चौराहों पर भी बसें खड़ी कर सवारियां बैठाते हैं, जिससे रोडवेज बसों का संचालन प्रभावित हो रहा है.

जानें क्यों प्राइवेट बस में सफर करते हैं लोग

इस संबंध में जब नोएडा और ग्रेटर नोएडा के रहने वाले लोगों से बात की तो उन्होंने बताया कि सरकारी बसों के भरोसे घंटे खड़े रहना पड़ता है, जबकि प्राइवेट बस हर 5 मिनट में मौके पर मौजूद रहती है. जिससे ज्यादातर लोग प्राइवेट बसों में ही सफर करते हैं. नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बढ़ती आबादी को देखते हुए शासन को बसों की संख्या बढ़नी चाहिए या फिर इलेक्ट्रिक बसों को सड़कों पर उतारना चाहिए, ताकि सफर करने में आसानी हो और विभाग का भी नुकसान ना हो.

’10 मिनी डीजल बस वापस भेजी गईं’

क्षेत्रीय प्रबंधक आरएम मनोज सिंह ने बताया कि प्राइवेट बसों की मनमानी के कारण परिवहन विभाग को लगातार आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा था. उन्होंने बताया कि कई बार संबंधित अधिकारियों से निजी बसों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की गई, लेकिन स्थिति में अभी तक ज्यादा सुधार नहीं हो पाया. इसी कारण फिलहाल 10 मिनी डीजल बसों को मुख्यालय वापस भेजना पड़ गया.

CNG बसों की संख्या में भी हो सकती कटौती

अब ऐसे में सीएनजी बसों की संख्या में भी कटौती करनी पड़ सकती है, क्योंकि सड़कों पर प्राइवेट बस संचालकों का दबदबा है. जब इस मामले में डीसीपी ट्रैफिक से बात की गई तो उन्होंने बताया कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा में प्राइवेट बसों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जाती है. कई बसों के चालान भी काटे गए हैं और अभियान लगातार समय-समय पर चलाया जाता है. उन्होंने कहा है कि प्रयास किया जा रहा है कि जल्द ही निजी बसों की मनमानी पर पूरी तरीके से रोक लगाई जा सके, ताकि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित हो सके.

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