Rajasthan News: बाल विवाह पर सख्ती, शादी के कार्ड पर जन्मतिथि छपवाना अनिवार्य
राजस्थान में आखातीज पर बाल विवाह रोकने के लिए नया नियम: अब निमंत्रण पत्र पर लिखनी होगी वर-वधू की जन्मतिथि। हलवाई, पंडित और टेंट वालों पर भी होगी कार्रवाई।
राजस्थान में आखातीज (अक्षय तृतीया) और पीपल पूर्णिमा जैसे अबूझ सावों पर होने वाले सबसे ज्यादा बाल विवाह को रोकने के लिए प्रशासन ने इस बार विशेष तैयारी की है. सरकार ने इन दोनों अबूझ सावों पर होने वाली शादी के निमंत्रण पत्र में वर-वधु की जन्मतिथि छापने पर जोर दिया है, ताकि वर-वधु की उम्र का सत्यापन किया जा सके और वर-वधू के बालिग और नाबालिग होने का पता चल सके.
24 घंटे मॉनिटरिंग और हेल्पलाइन शुरू की
राजस्थान सरकार ने 24 घंटे मॉनिटरिंग के साथ गांव में जागरूकता और सख्त कार्रवाई के निर्देश देते हुए बाल विवाह की सूचना देने के लिए 181 और 100 हेल्पलाइन नंबर भी जारी कर दिए हैं. दरअसल, राजस्थान में बाल विवाह का चलन अभी भी कई गांवों में देखा जा सकता है. आखातीज और पीपल पूर्णिमा की अबूझ सावों पर आज भी बाल विवाह किए जा रहे हैं.
बाल विवाह रोकने के लिए बनाया गया कानून
बाल विवाह को रोकने के लिए राज्य में विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 भी बनाया हुआ है. इस अधिनियम के तहत बाल विवाह को अपराध मानते हुए इसे रोकने के लिए सरकार की ओर से बड़े स्तर पर अभियान चलाए जाते हैं. गृह विभाग ने अक्षय तृतीया और पीपल पूर्णिमा जैसे अवसरों पर अब प्रशासन को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में अक्षय तृतीया और पीपल पूर्णिमा वाले दिन ही सबसे ज्यादा बाल विवाह किए जाते हैं.
इन लोगों पर होगी कार्रवाई
बाल विवाह को रोकने के लिए प्रशासन ने टेंट, हलवाई, पंडित, बैंड और ट्रांसपोर्टर को भी जिम्मेदार बनाया है. इनसे बाल विवाह में सहयोग नहीं करने का आश्वासन भी लिया जाएगा और कानून की जानकारी दी जाएगी. वहीं बाल विवाह करवाने में इनके सहयोग की जानकारी मिलने पर इनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं.