Share Market Crash: ट्रंप की धमकी से बाजार में हाहाकार, निवेशकों के ₹1.72 लाख करोड़ डूबे

ईरान-अमेरिका तनाव के बीच सेंसेक्स 600 अंक टूटा, कच्चा तेल $110 के पार। जानें क्यों शेयर बाजार में मची बिकवाली और किन शेयरों में आई सबसे ज्यादा गिरावट।

पिछले हफ्ते शेयर बाजार में काफी जोश देखने को मिला था. लगातार दो कारोबारी दिनों की तेजी के बाद उम्मीद जगने लगी थी कि सोमवार को जब शेयर बाजार खुलेंगे तो एक बार फिर से निवेशकों में जोश भर देंगे. लेकिन कुछ देर की तेजी के बाद एक बार फिर से शेयर बाजार ने अपना लाल रंग दिखाला शुरू कर दिया. सुबह 11 बजे के बाद सेंसेक्स और निफ्टी बड़ी गिरावट की ओर बढ़ चले हैं. जहां सेंसेक्स में करीब 600 से ज्यादा अंकों की गिरावट देखने को नहीं मिली.

वहीं दूसरी ओर निफ्टी ने करीब 150 अंकों का गोता लगा. वास्तव में ये गिरावट ट्रंप और ईरान के बीच बढ़ती ​अदावत का संकेत है. जिसकी वजह से कच्चे तेत के दाम 110 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा हो गए हैं. जिसकी वजह से शेयर बाजार में दबाव देखने को मिल रहा है. इस गिरावट की वजह से शेयर बाजार निवेशकों को 1.72 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हो चुका है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर शेयर बाजार में किस तरह के आंकड़े देखने को मिल रहे हैं.

शेयर बाजार में फिर गिरावट

शेयर बाजार में एक बार फिर से गिरावट का दौर शुरू हो गया है. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 590 अंकों की गिरावट के साथ 72,728.66 अंकों पर आ गया. वैसे सेसेंक्स 73,477.53 अंकों के साथ ओपन हुआ था और जल्द ​ही 73,588.75 अंकों के साथ दिन के हाई पर पहुंच गया. उसके बाद सेंसेक्स में बिकवाली शुरू हो गई. सुबह 11 बजकर 25 मिनट पर सेंसेक्स 388 अंकों की तेजी के साथ 72,932.44 अंकों पर कारोबार कर रहा था.

दूसरी ओर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक निफ्टी करीब 150 अंकों की गिरावट के साथ 22,542.95 अंकों पर आ गया था, जोकि दिन का लोअर लेवल है. जबकि सुबह निफ्टी तेजी के साथ 22,780.30 अंकों पर ओपन हुआ था और कारोबारी सत्र के दौरान 22,798.25 अंकों के साथ दिन के हाई लेवल पर पहुंच गया था. वैसे सुबह 11 बजकर 27 मिनट पर निफ्टी 95.45 अंकों की गिरावट के साथ 22,617.65 अंकों पर कारोबार कर रहा था.

किन शेयरों में आई सबसे ज्यादा गिराट

सेंसेक्स में सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले शेयरों में IndiGo, Kotak Mahindra Bank, Reliance Industries (RIL), Sun Pharma, Adani Ports और ICICI Bank शामिल थे, जिनमें 1-4% से ज्यादा की गिरावट आई. इसके विपरीत, Zudio (पैरेंट कंपनी Trent), Tech Mahindra, Titan, Infosys और Power Grid के शेयरों में 1-4% की बढ़त देखने को मिली. NSE पर करीब 1,702 शेयरों में गिरावट आई, जबकि 1,036 शेयरों में बढ़त हुई और 85 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ. Nifty Oil & Gas सबसे ज़्यादा नुकसान उठाने वाले सेक्टोरल इंडेक्स में से एक था, जिसमें 1.3 फीसदी से ज़्यादा की गिरावट आई. इसके विपरीत, Nifty PSU Bank में 1 फीसदी से ज्यादा की बढ़त हुई. इस बीच, India Vix में करीब 4 फीसदी की उछाल देखने को मिली.

ईरान-अमेरिका युद्ध बढ़ने की आशंकाएं बढ़ीं

रविवार को ट्रंप ने दावा किया कि अगर ईरान Hormuz स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को नहीं खोलता है – जो तेल और अन्य व्यापार के आवागमन के लिए एक महत्वपूर्ण जलमार्ग है – तो मंगलवार को अमेरिका ईरान पर अपने हमले बहुत ज्यादा तेज कर देगा. Truth Social पर एक कड़े शब्दों वाले पोस्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति ने लिखा, “मंगलवार का दिन ईरान के लिए ‘पावर प्लांट डे’ और ‘ब्रिज डे’ होगा – ये दोनों ही एक साथ होंगे. ऐसा पहले कभी नहीं हुआ होगा!!!

एक और इंटरव्यू में, उन्होंने कहा कि बातचीत अभी भी चल रही है और डेडलाइन से पहले कोई डील हो सकती है. उन्होंने कहा कि जल्द ही डील पूरी होने की अच्छी संभावना है, लेकिन अगर तेहरान ऐसा करने में नाकाम रहता है, तो वह “वहां सब कुछ उड़ा देंगे”. गौरतलब है कि ट्रंप ने बार-बार दावा किया है कि अमेरिकी प्रशासन ईरान के टॉप लीडर्स के साथ बातचीत कर रहा है, लेकिन ईरान ने बार-बार इस दावे को खारिज किया है. वहीं दूसरी ओर ईरान के अधिकारियों और नेताओं ने ट्रंप की भाषा में जवाब दिया.

तेल की कीमतें 110 डॉलर से ऊपर

ईरान को लेकर ट्रंप की नई धमकियों ने तेल से समृद्ध मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने की चिंताओं को बढ़ा दिया, जिससे तेल की कीमतें और ऊपर चली गईं. ब्रेंट क्रूड वायदा लगभग 1 फीसदी बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था. वहीं, WTI क्रूड वायदा 111.5 डॉलर प्रति बैरल के आसपास घूम रहा था. इस साल फरवरी के आखिर में युद्ध शुरू होने के बाद से तेल की कीमतों में काफी उछाल आया है. मार्च में होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के बाद तेल की कीमतें 100 डॉलर के अहम लेवल को पार कर गईं. 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद यह पहली बार हुआ था.

रुपया में बढ़त

सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 0.1 फीसदी की बढ़त के साथ 93 पर खुला, जबकि पिछले सत्र में यह 93.10 पर बंद हुआ था. भारतीय मुद्रा में हाल ही में तेजी से सुधार देखने को मिला है. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि RBI ने रुपए की सट्टेबाजी पर लगाम लगाने के लिए कुछ नए कदम उठाए हैं, जिससे ट्रेडर्स को उम्मीद है कि अपनी पोजिशंस को खत्म करने (unwinding) की वजह से देश के अंदर डॉलर की बिक्री में भारी उछाल आएगा.

बुधवार को RBI ने करेंसी को सहारा देने के अपने प्रयासों को और तेज कर दिया. इसके तहत बैंकों को देश के अंदर और बाहर रहने वाले ग्राहकों को ‘रुपया नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड्स’ (NDF) बेचने से रोक दिया गया है, और कंपनियों को रद्द किए गए फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स को दोबारा बुक करने से भी मना कर दिया गया है.

FII की बिकवाली जारी

पिछले दो सत्रों में बाज़ारों में बढ़त दर्ज होने के बावजूद, विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली का सिलसिला जारी रहा, जिससे निवेशकों का मनोबल कमजोर बना रहा. NSE के आंकड़ों के अनुसार, FII लगातार 23वें सत्र में भी भारतीय शेयरों के शुद्ध विक्रेता बने रहे. गुरुवार को उन्होंने लगभग 9,931 करोड़ रुपए के शेयर बेचे. हालांकि ये आंकड़े आज की गतिविधियों को नहीं दर्शाते हैं, लेकिन हाल के सत्रों में लगातार हो रही पूंजी की निकासी (outflows) ने निवेशकों के मनोबल पर नकारात्मक असर डाला है.

ग्लोबल मार्केट बाजार

ग्लोबल बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला, क्योंकि निवेशक लंबे समय से चल रहे युद्ध और ट्रंप की धमकियों के संभावित प्रभावों का आकलन कर रहे थे. इन चिंताओं के बावजूद, जापान का निक्केई सूचकांक 1% से अधिक चढ़ा, जबकि दक्षिण कोरिया के कोस्पी सूचकांक में लगभग 0.65% की बढ़त दर्ज की गई.

‘गुड फ्राइडे’ के अवसर पर शुक्रवार को वॉल स्ट्रीट और अन्य प्रमुख बाज़ार बंद रहे. गुरुवार को, डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में 0.13% की गिरावट आई, जबकि S&P 500 में 0.11% और नैस्डैक कंपोजिट में 0.18% की बढ़त दर्ज की गई. डॉव जोन्स के वायदा सौदे (futures) फिलहाल लगभग स्थिर बने हुए हैं.

आगे क्या?

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को लेकर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं. ऐसे में, जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार (Chief Investment Strategist) वीके विजयकुमार का मानना ​​है कि बाज़ार में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा, और यह संभावित अच्छी या बुरी खबरों पर अपनी प्रतिक्रिया देता रहेगा. उन्होंने कहा कि अगले कुछ दिनों में युद्ध के और अधिक भड़कने की आशंका काफी अधिक है. बाजार युद्ध से जुड़ी घटनाओं के प्रति कच्चे तेल की कीमतों की प्रतिक्रिया पर पैनी नज़र रखेगा. यदि किसी भी तरह से ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Hormuz Strait) को खोल दिया जाता है, तो बाज़ार सकारात्मक प्रतिक्रिया देगा, भले ही संघर्ष जारी रहे.

इस बीच, बाजार में कुछ ऐसे अहम रुझान हैं जिनसे निवेशक फायदा उठा सकते हैं. पूरे बाजार में कमजोरी के बावजूद IT सेक्टर मजबूत बना हुआ है. IT सेक्टर में शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग का मौका है, क्योंकि Q4 के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहने की संभावना है और रुपए में आई गिरावट से इस सेक्टर को फायदा मिलेगा. इसी तरह, बैंकिंग शेयरों में भी लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए एक अच्छा मौका है, क्योंकि इन शेयरों की वैल्यूएशन काफी आकर्षक है.

उन्होंने आगे कहाबैंकिंग सेक्टर, खासकर प्राइवेट बैंकों के शेयरों की कीमतों में आई तेज गिरावट की एकमात्र वजह FII (विदेशी संस्थागत निवेशकों) की लगातार बिकवाली है. इस सेक्टर के फंडामेंटल्स काफी मजबूत हैं और प्रमुख संकेतकों से पता चलता है कि जमा और क्रेडिट ग्रोथ काफ़ी अच्छी रहेगी. सब्र रखने वाले निवेशकों को इसका अच्छा इनाम मिलेगा.

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