UP Beer Industry Investment: उत्तर प्रदेश में 5,500 करोड़ का निवेश करेगा बीयर उद्योग; 2026-27 की नई आबकारी नीति का बड़ा असर

उत्तर प्रदेश की नई आबकारी नीति से उत्साहित बीयर उद्योग राज्य में ₹5,500 करोड़ का निवेश करेगा। ब्रूअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BAI) के अनुसार, नई ब्रूअरीज, एल्युमीनियम कैन और ग्लास प्लांट से प्रदेश में रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।

बीयर उद्योग अगले तीन साल में उत्तर प्रदेश में नई इकाइयां और सहायक सुविधाएं स्थापित करने पर करीब 5,500 करोड़ का निवेश करेगा. ब्रूअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया यानी बीएआई ने कहा कि बीयर उद्योग उत्तर प्रदेश पर बड़ा दांव लगा रहा है. राज्य सरकार द्वारा घोषित नई आबकारी नीति का स्वागत करते हुए, उद्योग ने इसे प्रगतिशील बताया है. बीएआई ने कहा कि यह उद्योग की वृद्धि के लिए एक बेहद संतुलित रुख को दर्शाता है. बीएआई के महानिदेशक विनोद गिरि ने कहा कि बीयर उद्योग और उसकी सहायक इकाइयां अगले तीन साल में राज्य में 5,500 करोड़ रुपए का निवेश करेंगी. परियोजनाओं की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि करीब 1,500 करोड़ रुपए की लागत वाली दो नई ब्रूअरीज पर काम पहले से ही चल रहा है.

प्रदेश में पैदा होंगी जॉब्स

गिरी ने बताया कि इसी तरह, 2,000 करोड़ रुपए के निवेश वाले दो बड़े एल्युमीनियम कैन उत्पादन संयंत्र भी पाइपलाइन में हैं, जबकि 2,000 करोड़ रुपए की कुछ ग्लास प्रोडक्शन यूनिट्स भी जल्द लगाई जाएंगी. गिरि ने कहा कि साथ ही माल्टिंग यूनिट और पेपर बॉक्स बनाने वाली यूनिट्स की भी योजना पर काम चल रहा है. उन्होंने कहा कि इन सभी निवेश से उद्योग को काफी बढ़ावा मिलेगा और राज्य में नौकरियां पैदा होंगी. बीएआई तीन प्रमुख कंपनियों…यूनाइटेड ब्रूअरीज लिमिटेड (यूबीएल), एबीइनबेव और कार्ल्सबर्ग का प्रतिनिधित्व करती है, को कुल मिलाकर 55 से ज्यादा ब्रूअरीज का परिचालन करती हैं. देश में बिकने वाली कुल बीयर में इन कंपनियों की हिस्सेदारी 85 प्रतिशत है. हाल ही में, उत्तर प्रदेश सरकार 2026-27 के लिए अपनी आबकारी नीति लेकर आई है. बीएआई के मुताबिक, यह नीति लाइसेंसिंग और मंजूरी प्रक्रिया में ज्यादा पारदर्शिता लाती है. इसके अलावा यह लाइसेंसिंग, वितरण और कराधान की स्थिति को बेहतर तरीके से स्पष्ट करती है.

नई पॉलिसी से नहीं पड़ेगा नेगेटिव असर

हाल ही में घोषित इस एक्साइज पॉलिसी में बीयर पर टैक्स बनाए रखा गया है, जबकि स्पिरिट्स पर थोड़ा बढ़ाया गया है. IMFL की कीमतों पर कुल मिलाकर असर लगभग 10 रुपए प्रति 180 ml बोतल होगा. हालांकि, बीयर की कीमतें वही रहेंगी. गिरी ने कहा कि इस सोचे-समझे तरीके से बीयर जैसे कम अल्कोहल वाले हाई-क्वालिटी प्रोडक्ट्स के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिससे राज्य सरकार के टैक्स रेवेन्यू को कोई नुकसान नहीं होगा. हालांकि हार्ड लिकर की कंज्यूमर कीमतों में थोड़ी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन बीयर जैसे कम अल्कोहल वाले ड्रिंक्स को इससे बचा लिया गया है. उन्होंने आगे कहा कि इस बैलेंस्ड तरीके से शराब इंडस्ट्री पर कोई असर नहीं पड़ेगा. रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीयर की कुल खपत में भारत दुनिया भर में 13वें नंबर पर है, जिसमें उत्तर भारत सबसे आगे है, और दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से इसकी ज़्यादा डिमांड है.

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