UP Secretariat: पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी पड़ी भारी; सचिवालय के अनुभाग अधिकारी द्वारिका प्रसाद बर्खास्त

उत्तर प्रदेश सचिवालय ने सरकारी सेवा नियमों के गंभीर उल्लंघन पर अनुभाग अधिकारी द्वारिका प्रसाद को बर्खास्त कर दिया है. उन पर पहली पत्नी के जीवित रहते बिना तलाक लिए दूसरी शादी करने का आरोप 11 साल की लंबी जांच के बाद सिद्ध हुआ, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई.

उत्तर प्रदेश सचिवालय के प्रशासन विभाग ने सरकारी सेवा नियमों के गंभीर उल्लंघन के मामले में सख्त कार्रवाई करते हुए अनुभाग अधिकारी द्वारिका प्रसाद को सेवा से बर्खास्त कर दिया है. उन पर पहली पत्नी के जीवित रहते बिना तलाक लिए दूसरी शादी करने का आरोप सिद्ध हुआ है, जिसके बाद उन पर यह कार्रवाई की गई.

जानकारी के अनुसार द्वारिका प्रसाद की पहली पत्नी कुसुम देवी ने वर्ष 2015 में शिकायत दर्ज कराई थी. इसके बाद मामले की करीब 11 वर्षों तक विस्तृत जांच चली. जांच में पाया गया कि द्वारिका प्रसाद ने अपनी सेवा पुस्तिका में पहली पत्नी का नाम दर्ज रखा था, जबकि दूसरी महिला, जो स्वयं सरकारी कर्मचारी हैं, ने अपने आधिकारिक अभिलेखों में पति के रूप में द्वारिका प्रसाद का नाम दर्ज कराया था. जांच के दौरान पहली पत्नी के वोटर आईडी, बैंक पासबुक और अन्य दस्तावेजों में भी पति के रूप में द्वारिका प्रसाद का नाम दर्ज पाया गया.

विस्तारित जांच में साबित हुआ आरोप

शुरुआती जांच में कुछ साक्ष्यों के अभाव में द्वारिका प्रसाद को क्लीन चिट मिल गई थी, लेकिन सचिवालय प्रशासन विभाग ने जांच रिपोर्ट का गहन विश्लेषण किया. इसके बाद तीनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करने और पुलिस से सत्यापन कराने का निर्णय लिया गया. पुलिस रिपोर्ट में भी दूसरी पत्नी के साथ उनके संबंधों की पुष्टि हुई. विस्तारित जांच में आरोप पूरी तरह सिद्ध पाए गए.

UPPSC की संस्तुति के बाद कार्रवाई

मामले में कार्रवाई के लिए पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से बर्खास्तगी की अनुमति मांगी गई थी. आयोग की संस्तुति मिलने के बाद विभाग ने द्वारिका प्रसाद को सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी कर दिया.

इस संबंध में सचिवालय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव मनीष सिंह चौहान ने कहा कि सरकारी सेवा में नैतिकता, पारदर्शिता और सेवा नियमों का पालन अनिवार्य है. ऐसे मामलों में विभाग शून्य सहिष्णुता की नीति पर काम कर रहा है, ताकि प्रशासनिक सेवाओं की विश्वसनीयता और अखंडता बनी रहे.

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