Yamunanagar: पिता के इलाज के लिए इटली गया था इकलौता बेटा, अब लौटेगा सिर्फ शव; परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
हरियाणा के यमुनानगर से एक ऐसी खबर आई है जो किसी के भी रोंगटे खड़े कर दे। एक बेटा जो अपने बीमार पिता की याददाश्त और सेहत वापस लाने के लिए सात समंदर पार इटली गया था,
यमुनानगर: हरियाणा के यमुनानगर से एक ऐसी खबर आई है जो किसी के भी रोंगटे खड़े कर दे। एक बेटा जो अपने बीमार पिता की याददाश्त और सेहत वापस लाने के लिए सात समंदर पार इटली गया था, आज खुद मौत की आगोश में सो गया है। यमुनानगर के रामखेड़ी गांव के गगनप्रीत की इटली में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। पीछे छूट गया है एक लाचार बिस्तर पर पड़ा पिता, एक बिलखती मां और वो सिस्टम, जिसकी लापरवाही ने एक होनहार युवक की जान ले ली।
3 अप्रैल 2023 को इटली गया था गगनप्रीत
3 अप्रैल 2023… यह वो तारीख थी जब यमुनानगर के रामखेड़ी गांव का गगनप्रीत अपनी आंखों में सुनहरे सपने लेकर इटली के लिए रवाना हुआ था। घर की माली हालत बेहद खराब थी और पिता पिछले 18 सालों से बिस्तर पर थे। गगनप्रीत का मकसद सिर्फ पैसा कमाना नहीं, बल्कि अपने पिता का इलाज करवाना था। लेकिन इटली की धरती उस मासूम के लिए बेरहम साबित हुई।
परिजनों के गंभीर आरोप
परिजनों का आरोप है कि जिस एजेंट ने उसे विदेश भेजा, उसने उसे यातनाएं दीं और काम के बदले पैसे तक नहीं दिए। खुद को बचाने के लिए गगनप्रीत इटली में शहर दर शहर भटकता रहा। न सिर पर छत थी, न जेब में पैसे। हालात इतने बदतर हुए कि उसे रिफ्यूजी कैंपों में रातें गुजारनी पड़ीं। अपनों से दूर, तंगहाली और एजेंट की प्रताड़ना ने गगनप्रीत को डिप्रेशन के उस अंधेरे कुएं में धकेल दिया, जहां से वह 4 फरवरी को मौत की खबर बनकर बाहर निकला।
घर का इकलौता सहारा था गगनप्रीत
घर का इकलौता सहारा जा चुका है। दो भाई-बहनों में सबसे बड़ा गगनप्रीत पूरे परिवार की उम्मीद था। आज उस घर में सिर्फ चीखें हैं। पिता, जिन्हें खुद होश नहीं, वो बार-बार बस यही कह रहे हैं— “मेरा गगनप्रीत मर गया, मेरे इलाज के लिए गया था।” मां का रो-रोकर बुरा हाल है, क्योंकि उनके पास इतने पैसे भी नहीं हैं कि बेटे के शव को भारत मंगवा सकें।
पीड़ित परिवार की CM सैनी से गुहार
पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री नायब सैनी से मदद की गुहार लगाई है। सरकार ने भरोसा तो दिया है, लेकिन सवाल वही है कि क्या ये मदद गगनप्रीत के आखिरी दीदार करवा पाएगी? गगनप्रीत की यह दास्तान उन हजारों युवाओं के लिए एक चेतावनी है जो मजबूरी में विदेश की ओर रुख करते हैं और कभी-कभी उनका लौटकर आना सिर्फ एक ताबूत बनकर रह जाता है।