एशियन गेम्स में मेडल जीतकर अपने पैतृक गांव शामगढ़ पहुंचीं रजिया ढिल्लों, ग्रामीणों ने किया भव्य स्वागत

एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाली रजिया ढिल्लों का गांव पहुंचने पर जोरदार स्वागत। जानिए उनकी सफलता की कहानी।

करनाल : एशियन गेम्स में करनाल के छोटे से गांव शामगढ़ की बेटी राजिया ढिल्लों ने ब्रॉन्ज मेडल जितवाया और देश का नाम रोशन किया।  रजिया आज अपने गांव में पहुँची जहा पर ग्रामीणों ने रजिया का जोरदार तरीके से स्वागत किया, हरियाणा के लिए ये बहुत बड़ी उपलब्धि हैं।

भारत की झोली में ये मेडल शूटिंग के महिला स्कीट इवेंट में आया था, जहां राइजा ढिल्लो माहेश्वरी चौहान और पारिनाज धालीवाल की तिकड़ी का कमाल का प्रदर्शन देखने को मिला था।. इन तीनों के लगाए अचूक निशाने से भारत ब्रॉन्ज मेडल जीतने में कामयाब रहा. इससे पहले राजिया ने कई मेडल अपने नाम किए हैं, अलग – अलग इवेंट में, लेकिन ये उपलब्धि बड़ी है क्योंकि ये पहला मौका है जब किसी महिला टीम ने स्कीट शूटिंग में मेडल अपने नाम किया हो।

रजिया ने बताया 15 साल की उम्र में शूटिंग में कदम रखा और उसके बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा , जिसके बाद वो लगातार मेडल अपने नाम कर रही है। अब आने वाला टूर्नामेंट वर्ल्ड चैंपियन का है जिसमें ओलिंपिक के लिए कोटा मिलेगा,  राजिया का पूरा फोकस वहीं रहेगा। रजिया ने कहा अपने गांव पहुंचने पर जिस तरह से ग्रामीणों ने मेरा स्वागत किया है वह मुझे सबसे अच्छा लगा इसके लिए मैं दिल से उनका धन्यवाद करती हूं।

रसिया ने कहा परिवार वालों का साथ सबसे अधिक मुझे मिला किस कारण मैं आज इस मुकाम पर पहुंची हूं। भविष्य में भी उन्होंने अपने अच्छे प्रदर्शन की बात कही है और देश के लिए मेडल लाने की बात भी कहिए हरियाणा की खेल नीति के बारे में भी रजिया ने कहा हरियाणा अपने खिलाड़ियों को अन्य प्रदेशों के मुकाबले अच्छी सुविधा देता है। हर खेल के लिए हरियाणा सबसे अच्छी सुविधा देता है।

रजिया के पिता रविजीत सिंह ढिल्लो ने कहा बहुत खुशी और गर्व महसूस हो रहा है जैसे सारी मीडिया में आया है यह भारत की ऐतिहासिक जीत है और इस जीत में हमारे गांव की बेटी ने इतिहास रचा है इससे ज्यादा शान हमारे गांव शामगढ़ वासियों के लिए हो नहीं सकती, रसिया के पिता ने कहा सबसे ज्यादा परिवार का सहयोग होना बहुत जरूरी है।उन्होंने बताया रजिया ने छोटी उम्र में ही खेलना शुरू किया था। अब बड़ी हो चुकी है। और अब ये अपने फैसले खुद लेनी लगी है।

रजिया की माँ गुल ढिल्लो ने कहा बेटी बहुत मेहनत करती है और मेहनत का फल बेटी को मिला है। उन्होंने बताया बेटी को रात को दिल्ली में जब रिसीव करने के लिए गए तो वहां पर महोल ही कुछ और था उसे महल को देखकर लगा बेटी पहुंच गई है। रजिया की मां ने बताया बेटी ने जब छोटी उम्र में खेलना शुरू किया था तो उसके पापा रजिया के साथ खेल प्रतियोगिता में हिस्सा लेने जाते थे पिछले 2 साल से वह खुद प्रतियोगिता में हिस्सा लेने जा रही है लेकिन वह अकेली नहीं होती सरकार द्वारा उसे कोच और स्टाफ उपलब्ध करवाया गया है। उन्होंने कहा सरकार ने रजिया को पूरी टीम प्रोवाइड करवाई है जो हमेशा साथ में रहती है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.