ओवैसी के बाद रामपुर पहुंचे अखिलेश यादव, मुस्लिम वोट बैंक और आजम खान को लेकर छिड़ी सियासी जंग
उत्तर प्रदेश में 2027 के चुनाव से पहले मुस्लिम वोटों पर दावेदारी तेज। ओवैसी के हमलों के बाद अखिलेश यादव के रामपुर दौरे और मुस्लिम नेतृत्व के समीकरण पर विशेष रिपोर्ट।
उत्तर प्रदेश। सूबे में विधानसभा चुनाव भले ही अभी दूर हों, लेकिन 2027 की सियासी बिसात पर मोहरे अभी से चलने लगे हैं। हाल ही में असदुद्दीन ओवैसी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के रामपुर दौरों ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। ओवैसी ने रामपुर पहुंचकर मुसलमानों की रहनुमाई और नेतृत्व के अभाव को लेकर सपा और अन्य दलों को घेरा था, वहीं महज चार दिन बाद अखिलेश यादव ने रामपुर पहुंचकर जेल में आजम खान और उनके परिवार से मुलाकात कर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। इस पूरी कवायद को मुस्लिम वोट बैंक पर अपनी पकड़ मजबूत करने की बड़ी जंग के रूप में देखा जा रहा है।
📊 यूपी में मुस्लिम वोटों का गणित और ओवैसी की चुनौती: क्या सपा के मजबूत किले में सेंध लगा पाएंगे AIMIM प्रमुख?
उत्तर प्रदेश की लगभग 73 सीटों पर मुस्लिम आबादी 30 प्रतिशत से अधिक और 70 सीटों पर 20 से 30 प्रतिशत के बीच है, जो चुनावी परिणामों को सीधा प्रभावित करती है। बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद से इस वर्ग का एकमुश्त झुकाव अमूमन समाजवादी पार्टी की तरफ रहा है, क्योंकि मतदाता भाजपा को हराने में सक्षम दल को प्राथमिकता देते हैं। हालांकि, ओवैसी लगातार मुस्लिम नेतृत्व को खड़ा करने की बात कहकर सपा के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन देखना यह होगा कि क्या यह भीड़ वोटों में तब्दील हो पाती है या नहीं।