कच्चे तेल की कीमतों में फिर लगी आग; अमेरिका द्वारा ईरान के केश्म द्वीप पर हमले के बाद ब्रेंट क्रूड $106 के पार
अमेरिका द्वारा ईरान के केश्म द्वीप पर हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ गई है। ब्रेंट क्रूड उछलकर 106.45 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में मंगलवार सुबह एक बार फिर जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। एशियाई बाजार के शुरुआती कारोबार में तेल के दाम तब अचानक चढ़ गए, जब यह बड़ी खबर सामने आई कि अमेरिका ने ईरान के केश्म द्वीप (Qeshm Island) पर सैन्य हमला कर दिया है। दोनों देशों के बीच पिछले आठ महीनों से चल रहे खूनी संघर्ष में इस ताजा कार्रवाई ने तनाव को और अधिक बढ़ा दिया है। तेल बाजार को इस बात का गहरा डर सता रहा है कि इस हमले के बाद मिडिल ईस्ट (खाड़ी देशों) से होने वाली कच्चे तेल की सप्लाई लंबे समय तक बाधित हो सकती है।
मंगलवार को भारतीय समयानुसार दोपहर 12:30 बजे तक ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) वायदा 1.57 फीसदी चढ़कर 106.45 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 1.66 फीसदी की बढ़त के साथ 98.06 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। इससे ठीक एक दिन पहले सोमवार को ब्रेंट क्रूड में बड़ी गिरावट आई थी और यह 8.66 डॉलर (7.63 फीसदी) टूटकर 104.77 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था।
🎯 केश्म द्वीप पर अमेरिका ने क्यों किया हमला? रणनीतिक और सामरिक वजहें
सैन्य कार्रवाई के पीछे के कारण:
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वॉल स्ट्रीट जर्नल का खुलासा: अमेरिकी प्रतिष्ठित अखबार ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ ने अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के हवाले से केश्म द्वीप पर हुए हमले की पुष्टि की है।
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बचाव में उठाया गया कदम: कुछ अमेरिकी अधिकारियों ने इस सैन्य कार्रवाई को ‘बचाव में उठाया गया कदम’ करार दिया है। उनका तर्क है कि यह हमला ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों पर हमले करने से रोकने के लिए किया गया है।
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बाजार विश्लेषकों की राय: केसीएम ट्रेड (KCM Trade) के चीफ मार्केट एनालिस्ट टिम वॉटरर ने बताया कि जब वैश्विक बाजार को यह उम्मीद लग रही थी कि पूरा मामला कूटनीतिक रास्तों से सुलझ जाएगा, तभी इस अचानक सैन्य कार्रवाई की खबर ने माहौल पूरी तरह बदल दिया। इससे तेल बाजार में जोखिम प्रीमियम फिर से बढ़ गया है।
🚢 होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते तेल सप्लाई पर भारी असर; 20% हिस्सा होता है प्रभावित
आवाजाही और वैश्विक प्रभाव:
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फरवरी से जारी संघर्ष: अमेरिका और ईरान के बीच यह गंभीर संघर्ष फरवरी के अंत में शुरू हुआ था। इस जंग की वजह से सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ से होने वाली समुद्री आवाजाही काफी हद तक कम हो गई है।
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वैश्विक सप्लाई का पांचवां हिस्सा: इस जंग के छिड़ने से पहले दुनिया भर के कुल कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई का करीब पांचवां हिस्सा (यानी 20 फीसदी) इसी समुद्री रास्ते से होकर गुजरता था।
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6 महीने के उच्च स्तर पर दाम: अक्टूबर के आखिर में ब्रेंट क्रूड छह महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया था। बाजार को इस बात की आशंका पहले से थी कि अमेरिकी मध्यावधि चुनावों (Midterm Elections) के बाद मिडिल ईस्ट का यह भू-राजनीतिक संघर्ष और अधिक भड़क सकता है।
🕊️ एक तरफ सैन्य कार्रवाई, तो दूसरी तरफ शांति की कोशिशें; राष्ट्रपति ट्रंप पर भारी राजनीतिक दबाव
शांति वार्ता और कूटनीतिक गतिविधियां:
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तेहरान का रुख: एक तरफ जहां सैन्य हमले जारी हैं, वहीं दूसरी तरफ जंग रोकने के लिए कूटनीतिक बातचीत के दरवाजे भी खुले हैं। तेहरान ने सोमवार को बयान दिया कि युद्ध खत्म करने के लिए ईरान और अमेरिका के बीच लगातार संपर्क बना हुआ है। हाल ही में कतर के मध्यस्थों के साथ ईरान की कई दिनों तक मैराथन बैठकें चली हैं।
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शीर्ष नेतृत्व का संदेश: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने बताया कि सुप्रीम लीडर अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने शांति वार्ता के लिए सरकार को कुछ जरूरी अधिकार सौंपे हैं।
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डोनाल्ड ट्रंप पर दबाव: अमेरिका में महंगे पेट्रोल और ईंधन की कीमतों की वजह से आम मतदाताओं पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह ईरान के साथ चल रहा युद्ध माना जा रहा है, जिसके चलते अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप पर इस जंग को जल्द से जल्द खत्म करने का भारी राजनीतिक दबाव है। ट्रंप ने हालांकि सोमवार को यह संदेह जताया कि क्या वह ईरान पर फिर से बड़े पैमाने पर सैन्य हमले शुरू करने की अपनी धमकी पर अमल करेंगे, साथ ही यह भी संकेत दिया कि तेहरान के साथ कोई ठोस समझौता हो सकता है।
🌐 अबू धाबी में रूस-यूक्रेन की शांति बैठक आयोजित कराएगा अमेरिका
दूसरा बड़ा कूटनीतिक मोर्चा:
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रूस-यूक्रेन शांति प्रयास: मिडिल ईस्ट के तनाव के बीच अमेरिका एक अन्य कूटनीति मोर्चे पर भी सक्रिय रूप से शांति की कोशिशों में जुटा है।
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अबू धाबी बैठक: अमेरिका आगामी 10 से 11 नवंबर को संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी शहर में यूक्रेन और रूस के प्रतिनिधिमंडलों को एक मंच पर लाएगा।
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चर्चा के मुख्य बिंदु: इस उच्चस्तरीय बैठक में यूक्रेन के खिलाफ मॉस्को के युद्ध को समाप्त करने, युद्ध के बाद के पुख्ता सुरक्षा समझौतों और क्षेत्रीय तनाव को कम करने के लिए आपसी रणनीतिक चर्चा की जाएगी।