करोड़ों के प्लॉट घोटाले और फर्जी बैंक खाते से जुड़े मामले में फंसीं रोशनी बिश्नोई, अदालत ने नहीं दी राहत
हरियाणा के पूर्व सीएम भजनलाल की बेटी रोशनी बिश्नोई को करोड़ों के प्लॉट धोखाधड़ी मामले में गुरुग्राम कोर्ट से राहत नहीं मिली है।
चंडीगढ़ : हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल की बेटी रोशनी बिश्नोई को करोड़ों रुपये के प्लॉट से जुड़े कथित धोखाधड़ी मामले में अदालत से राहत नहीं मिली है। गुरुग्राम अदालत ने रोशनी बिश्नोई की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की, फर्जी दस्तावेज और बैंक खाते के जरिए रकम ट्रांसफर करने के आरोप है। गुरुग्राम के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश यशविंदर पॉल सिंह की अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। मामला एक मृत व्यक्ति के नाम पर कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर करोड़ों रुपये मूल्य की संपत्ति को धोखाधड़ी से हस्तांतरित करने से जुड़ा है।
मृत व्यक्ति के नाम पर तैयार किए गए कथित फर्जी दस्तावेज
मामले की शिकायत धर्मबीर ने की थी। शिकायत के अनुसार उनके पिता सुनील कुमार को गुरुग्राम के सेक्टर-23/23ए में एक कनाल का प्लॉट आवंटित किया गया था। सुनील कुमार का निधन 15 जुलाई 2010 को हो चुका था। आरोप है कि उनकी मृत्यु के बाद उनके नाम का इस्तेमाल करते हुए फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और प्लॉट के हस्तांतरण की प्रक्रिया को अंजाम दिया गया। शिकायत में कृष्ण लाल बिश्नोई और उनके बेटे विकास बिश्नोई पर कथित तौर पर साजिश रचने का आरोप लगाया गया है। आरोप यह भी है कि किर्ता राम नामक व्यक्ति ने सुनील कुमार का प्रतिरूपण किया और उनके नाम पर संपत्ति संबंधी दस्तावेज तैयार किए गए।
चार करोड़ के प्लॉट को करीब 2.42 करोड़ में बेचने का आरोप
शिकायतकर्ता के अनुसार संबंधित प्लॉट का बाजार मूल्य करीब चार करोड़ रुपये था, जबकि इसे 2,42,74,500 रुपये में बेचे जाने का आरोप है। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले में करीब दस करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और अधिकारियों की कथित मिलीभगत के भी आरोप लगाए हैं। इस मामले में सेक्टर-14 थाना गुरुग्राम में 5 सितंबर 2023 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धोखाधड़ी, जालसाजी, प्रतिरूपण और आपराधिक साजिश समेत विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।
फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस और बैंक खाते का मामला
अभियोजन के अनुसार जांच में रोशनी बिश्नोई की कथित भूमिका सामने आई है। पुलिस रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि मृतक सुनील कुमार के नाम पर फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस तैयार किया गया। इसके बाद इसी पहचान का इस्तेमाल कर एक्सिस बैंक में सुनील कुमार के नाम पर कथित तौर पर फर्जी बैंक खाता खोला गया। जांच एजेंसी के अनुसार इस खाते से 2,38,43,750 रुपये रोशनी बिश्नोई के बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए। अभियोजन ने इसे मामले में उनकी कथित भूमिका का महत्वपूर्ण आधार बताया है।
ईमेल के जरिए सह-आरोपी को दस्तावेज भेजने का आरोप
अभियोजन पक्ष ने अदालत में यह भी दावा किया कि रोशनी बिश्नोई ने कथित तौर पर फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस अपनी ईमेल आईडी से सह-आरोपी विकास बिश्नोई को भेजा था। इसके अलावा अन्य आरोपियों के बयानों में भी उनकी कथित संलिप्तता सामने आने की बात कही गई। अभियोजन ने अदालत को बताया कि उनके खिलाफ एक अन्य एफआईआर संख्या 318 भी दर्ज है, जिसमें वह वांछित हैं। जांच एजेंसी ने उनकी हिरासत में पूछताछ को जरूरी बताते हुए कहा कि इससे अन्य ईमेल, दस्तावेज और वित्तीय लेनदेन का पता लगाने में मदद मिल सकती है।
बचाव पक्ष ने कहा- न गवाह, न प्रतिरूपणकर्ता
अग्रिम जमानत के लिए रोशनी बिश्नोई की ओर से पेश वकील ने अभियोजन के आरोपों को चुनौती दी। बचाव पक्ष का कहना था कि रोशनी न तो कथित प्रतिरूपणकर्ता थीं और न ही संपत्ति के लेनदेन में गवाह या लाभार्थी थीं। बचाव पक्ष ने यह तर्क भी दिया कि केवल उनके बैंक खाते में रकम ट्रांसफर होना अपने आप में अपराध में उनकी संलिप्तता साबित नहीं करता। इसके अलावा एफआईआर में उनका नाम नहीं होने और शिकायत दर्ज करने में हुई देरी का मुद्दा भी अदालत के सामने उठाया गया।
अभियोजन ने जमानत का किया विरोध
अभियोजन पक्ष ने बचाव की दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि जांच के दौरान रोशनी बिश्नोई की भूमिका से जुड़े प्रथम दृष्टया साक्ष्य सामने आए हैं। फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस तैयार करने और उसे ईमेल के माध्यम से सह-आरोपी तक पहुंचाने का आरोप गंभीर है। अभियोजन ने कहा कि कथित तौर पर उनके खाते में 2.38 करोड़ रुपये से अधिक की राशि पहुंची है। ऐसे में यह पता लगाना जरूरी है कि यह धन किस उद्देश्य से ट्रांसफर किया गया और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे। इसी आधार पर पुलिस ने हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता जताई।
सह-आरोपियों की जमानत भी हो चुकी है खारिज
अदालत ने मामले में सह-आरोपियों की जमानत याचिकाएं पहले खारिज होने और रोशनी बिश्नोई के खिलाफ प्रथम दृष्टया सामने आए साक्ष्यों को भी ध्यान में रखा। इन्हीं परिस्थितियों में अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत के इस आदेश के बाद अब मामले की जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई पर नजर रहेगी। हालांकि, जमानत याचिका खारिज होना आरोप सिद्ध होने के समान नहीं है। मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान ही होगी।