कौन थे लाफिंग बुद्धा? जानें उनके जीवन की कहानी और घर में रखने के जरूरी नियम
जानिए कौन थे लाफिंग बुद्धा और घर या दुकान में इनकी मूर्ति रखने की सही दिशा। फेंगशुई और वास्तु शास्त्र के महत्वपूर्ण नियम पढ़ें।
भारत में जिस तरह वास्तु शास्त्र को घर की ऊर्जा और सुख-समृद्धि से जोड़ा जाता है, उसी तरह चीन में फेंगशुई की परंपरा काफी मशहूर है. लाफिंग बुद्धा की मूर्ति आपने अक्सर घर, ऑफिस या दुकानों में जरूर देखी होगी. आमतौर पर इसे सुख-समृद्धि, खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है. लेकिन जिस शख्स को आज दुनिया ‘लाफिंग बुद्धा’ के नाम से जानती है, वो आखिर कौन थे और उसकी हंसती हुई मूर्ति घरों में रखने की परंपरा कैसे शुरू हुई? लाफिंग बुद्धा को फेंगशुई और वास्तु में इसे रखने की दिशा और तरीके को लेकर भी कई मान्यताएं हैं. आइए जानते हैं लाफिंग बुद्धा की कहानी और इससे जुड़े जरूरी नियम.
जैसे भारत में कुबेर देव धन के देवता हैं, तो चीन में लाफिंग बुद्धा को भी ऐसा ही सम्मान प्राप्त है. इन्हें सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. लोग इन्हें अपने घर या दुकान में रखना बहुत शुभ मानते हैं. आइए एक नजर डालते हैं लाफिंग बुद्धा के जीवन पर और उनकी मूर्ति को घर में रखने के नियम.
लाफिंग बुद्धा कौन थे?
लाफिंग बुद्धा को लेकर मान्यता है कि उनका नाम होतेई था और वो चीन-जापान के 10वीं सदी के एक प्रसिद्ध और खुशमिजाज बौद्ध भिक्षु थे. कहा जाता है कि बौद्ध धर्म अपनाने और आत्मज्ञान प्राप्त करने के बाद वो लगातार हंसने लगे. इसके बाद उन्होंने लोगों को खुश रखना और उनके चेहरे पर मुस्कान लाना ही अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया. उनके इसी खुशमिजाज अंदाज की वजह से लोग उन्हें लाफिंग बुद्धा कहने लगे. समय के साथ उनकी छवि खुशहाली और प्रसन्नता के प्रतीक के तौर पर मशहूर हो गई.
ऐसे शुरू हुई घर में रखने की परंपरा
वहीं, एक दूसरी मान्यता में लाफिंग बुद्धा को चीन के पुताइ नाम के भिक्षु से जोड़ा जाता है. कहा जाता है कि पुताइ को घूमना-फिरना और लोगों के साथ वक्त बिताना पसंद था. अपने मजाकिया और मस्तमौला अंदाज से वो लोगों को खूब हंसाते थे. धीरे-धीरे लोग उन्हें एक शुभ प्रतीक के रूप में देखने लगे और उनकी मूर्तियां घरों में रखी जाने लगीं. इनका मोटा पेट संतोष और खुशहाली का संकेत माना जाता है. अपनी थैली में वो खुशियां और सौभाग्य रखते हैं.
लाफिंग बुद्धा किस दिन खरीदना चाहिए?
फेंगशुई और वास्तु शास्त्र के मुताबिक, लाफिंग बुद्धा को खुद अपने पैसों से खरीदकर घर लाना शुभ नहीं माना जाता है. इसे हमेशा किसी दूसरे शख्स से गिफ्ट में दिया जाना सबसे अच्छा माना गया है. इसलिए इसे खरीदने के लिए कोई खास दिन नहीं होता है.
लाफिंग बुद्धा कौन सा शुभ होता है?
फेंगशुई और वास्तु शास्त्र के मुताबिक, गिफ्ट में मिला हुआ या थैला और सोने का सिक्का लिए हुए लाफिंग बुद्धा सबसे शुभ माना जाता है. मूर्ति की ऊंचाई कम से कम ढाई से तीन फीट होनी चाहिए.
लाफिंग बुद्धा को किस दिशा में रखना चाहिए?
लाफिंग बुद्धा को घर या ऑफिस में दक्षिण-पूर्व (आग्नेय) दिशा या पूर्व दिशा में रखना सबसे शुभ माना जाता है. इन्हें मेन दरवाजे के सामने अंदर की ओर रखें, ताकि आने वाले मेहमानों को ये साफ दिखाई दें.
लाफिंग बुद्धा कहां नहीं रखना चाहिए?
लाफिंग बुद्धा को रसोई, डाइनिंग टेबल, बाथरूम या जमीन पर भूलकर भी नहीं रखना चाहिए. हमेशा किसी साफ टेबल, स्टूल या काउंटर पर ही रखना चहिए.
लाफिंग बुद्धा दुकान में कहां रखना चाहिए?
दुकान में लाफिंग बुद्धा को मेन एंट्रेस गेट के सामने इस तरह रखें कि दुकान में आने वाले हर ग्राहक की नजर पड़े. इसे जमीन पर न रखकर कम से कम 30 इंच की थोड़ी ऊंची और साफ जगह पर रखना चाहिए.
घर में कौन सा लाफिंग बुद्धा रखना चाहिए?
घर में पीतल, तांबा, चांदी या सोने की परत वाली धातु की लाफिंग बुद्धा की मूर्ति रखना सबसे शुभ माना जाता है. धातु (खासतौर पर पीतल या चांदी) की मूर्तियां घर में पॉजिटिव एनर्जी लाने में मदद करती हैं.