क्या बदलेगा जादवपुर यूनिवर्सिटी का नाम? जानिए बीजेपी और टीएमसी का क्या है रुख

बीजेपी विधायक सरbari मुखर्जी द्वारा जादवपुर यूनिवर्सिटी का नाम ऋषि अरबिंदो करने की मांग पर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक विवाद शुरू।

जादवपुर यूनिवर्सिटी के नाम को लेकर एक नया विवाद शुरू हो गया है. बीजेपी विधायक सरबरी मुखर्जी ने इसका नाम बदलकर ऋषि अरबिंदो के नाम पर रखने की मांग की. उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो राज्यपाल, मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्रियों को एक बड़ी पिटीशन भेजी जाएगी. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने हालांकि साफ कर दिया कि पार्टी ने नाम बदलने पर कोई फैसला नहीं लिया है और सरबरी मुखर्जी की बात को उनकी निजी राष्ट्रवादी राय बताया. साथ ही यूनिवर्सिटी बनाने में अरबिंदो की भूमिका को भी माना. तृणमूल नेता कुणाल घोष ने इस कोशिश को गैर-जरूरी बताया और ऐसी कोशिशों को मानवता विरोधी बताया और कहा कि जादवपुर पहले से ही बेहतरीन यूनिवर्सिटी है और इसका नाम नहीं बदला जाना चाहिए.

यह विवाद जादवपुर यूनिवर्सिटी कैंपस के अंदर एक नेशनलिस्ट कन्वेंशन में शुरू हुआ, जहां भाजपा नेताओं ने कैंपस में भारत-विरोधी और माओवादी एक्टिविटी के खिलाफ अपनी आवाज उठाई है.

ऋषि अरबिंदो के नाम पर जादवपुर का नाम

सभा को संबोधित करते हुए जादवपुर से बीजेपी विधायक सरबरी मुखर्जी ने कहा कि यूनिवर्सिटी का कॉन्सेप्ट ऋषि अरबिंदो ने अंग्रेजों के खिलाफ बंगाली बुद्धिजीवियों को जगाने के लिए बनाया था, और इसलिए इसका नाम उस विरासत को दिखाना चाहिए.

उन्होंने घोषणा की कि अगर जरूरत पड़ी, तो गवर्नर, मुख्यमंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री और यहां तक कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री को भी जादवपुर यूनिवर्सिटी का नाम ऋषि अरबिंदो के नाम पर रखने के लिए एक बड़ी पिटीशन दी जाएगी. मुखर्जी ने यह भी कहा कि कई राष्ट्रवादी लोग इस विचार का समर्थन करते हैं, और लोग यूनिवर्सिटी के गेट के बाहर उस चीज का विरोध करने के लिए एकजुट हुए हैं जिसे उन्होंने देश-विरोधी एक्टिविटी बताया.

बीजेपी विधायक के बयान के कुछ ही घंटों के बाद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने इससे बयान से दूरी बना ली है. उन्होंने कहा कि जादवपुर यूनिवर्सिटी का नाम बदलने पर कोई फैसला नहीं लिया गया है. उन्होंने मुखर्जी के बयान को उनकी पर्सनल राष्ट्रवादी राय बताया, जबकि इस बात से सहमत थे कि ऋषि अरबिंदो ने यूनिवर्सिटी बनाने की पहल की थी और पार्टी उन योगदानों को ध्यान में रखती है. उनका यह स्पष्टीकरण कैंपस पॉलिटिक्स पर चल रही बड़ी राजनीतिक लड़ाई के बीच आया है, जिसमें भाजपा और ABVP जादवपुर के अंदर लेफ्ट-एक्सट्रीमिस्ट असर के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं.

बीजेपी विधायक की मांग पर गरमाई सियासत

वहीं, तृणमूल नेताओं ने तुरंत पलटवार किया. कुणाल घोष ने कहा कि यूनिवर्सिटी का नाम बदलने की ऐसी कोशिशें अपने आप में मानवता विरोधी है और कहा कि हर कोई ऋषि अरबिंदो से प्यार करता है लेकिन नाम बदलने की कोई जरूरत नहीं है. उन्होंने जादवपुर को बेहतरीन यूनिवर्सिटी बताया और BJP सरकार के नाम बदलने के तरीके पर हमला करते हुए कहा, कोई हैरानी नहीं कि वे जो कर रहे हैं वह हमेशा समाज के खिलाफ होता है.

नाम बदलने की मांग ने जादवपुर यूनिवर्सिटी के आसपास चल रहे तनाव में एक नई परत जोड़ दी है, जहां हाल की झड़पों, दीवार पर लिखने और स्टूडेंट-पुलिस के बीच टकराव ने पहले ही लोगों का ध्यान खींचा है. जहां भाजपा नेता इस मुद्दे को कैंपस के अंदर एक बड़े राष्ट्रवादी अभियान का हिस्सा बता रहे हैं. वहीं विपक्षी नेता और कुछ शिक्षाविद चेतावनी दे रहे हैं कि एक ऐतिहासिक संस्था का नाम बदलने से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के तौर पर उसकी पहचान कमज़ोर हो सकती है. अभी के लिए, यह प्रस्ताव एक पॉलिटिकल बयान बना हुआ है, और राज्य सरकार या यूनिवर्सिटी अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई औपचारिक कदम उठाने की खबर नहीं है.

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