ग्रेटर नोएडा के घर खरीदारों के पक्ष में बड़ा फैसला, NCDRC ने दिया रकम वापस करने का आदेश
NCDRC ने सनवर्ल्ड वंदिता प्रोजेक्ट के बिल्डर को 12% ब्याज के साथ खरीदारों की पूरी रकम दो महीने में लौटाने के आदेश दिए हैं।
ग्रेटर नोएडा के यमुना सिटी के सेक्टर-22डी स्थित सनवर्ल्ड वंदिता ग्रुप हाउसिंग परियोजना में 14 वर्षों से फ्लैट का इंतजार कर रहे खरीदारों को राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) से बड़ी राहत मिली है। आयोग ने बिल्डर को सभी खरीदारों की जमा पूरी रकम 12 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाने के आदेश दिए हैं। रकम का भुगतान दो महीने में करना होगा। वहीं, देरी पर 15 प्रतिशत सालाना ब्याज देना पड़ेगा।
1400 खरीदारों ने किया था निवेश
यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) ने सेक्टर-22डी में सनवर्ल्ड वंदिता परियोजना को साल 2011 में भूखंड आवंटित किया था। 2012 में बिल्डर ने परियोजना लॉन्च करते हुए बुकिंग शुरू की। इस परियोजना में करीब 1400 खरीदारों द्वारा निवेश किया गया।
खटखटाया था आयोग का दरवाजा
वर्ष 2013 तक खरीदारों ने 20 से 80 प्रतिशत तक फ्लैट की रकम जमा कर दी। बिल्डर बायर्स एग्रीमेंट किए गए। खरीदारों ने वर्ष 2017 में जब साइट का निरीक्षण किया तो वहां किसी प्रकार का कोई निर्माण नहीं दिखा। इसके बाद 2018 में खरीदारों ने फ्लैट न मिलने और रकम वापस न होने पर आयोग का रुख किया।
64 खरीदारों ने डाली थी याचिका
कुल 64 खरीदारों की याचिका पर यह मामला विचाराधीन रहा। 31 अगस्त को मामले में आयोग की पीठ में एवीएम जे. राजेंद्र (सेवानिवृत्त) और न्यायमूर्ति सरोज यादव ने सुनवाई की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेजों पर विचार करने के बाद पीठ ने बिल्डर की ओर से परियोजना में देरी के लिए किसानों की याचिकाओं और मुकदमेबाजी को जिम्मेदार ठहराने वाली दलील स्वीकार नहीं की।
मुकदमा खर्च भी देने के आदेश
पीठ ने इस बारे में कहा कि परियोजना का विज्ञापन कर खरीदारों से रकम लेने के बाद जरूरी मंजूरियां और अनुपालन सुनिश्चित करना बिल्डर की जिम्मेदारी थी। इसके बाद आयोग ने खरीदारों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए जमा रकम ब्याज समेत लौटाने का आदेश दिया।आयोग ने खरीदारों को 25 हजार रुपये मुकदमा खर्च के तौर पर भी देने के आदेश दिए हैं।
देरी का यह कारण बताया
आयोग में बिल्डर की ओर से रखे गए पक्ष में बताया गया कि यीडा ने 16 अगस्त 2011 को सेक्टर 22डी में टीएस-7 भूखंड आवंटित किया था। लीज डीड के बाद किसानों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में कई याचिका दाखिल की। किसानों के विरोध और मुकदमों के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हुआ। इसलिए निर्माण में हुई देरी ऐसी परिस्थितियों के कारण हुई जो बिल्डर के नियंत्रण से बाहर थीं।
रकम की आस में बिल्डर को रशीदें सौंप दीं
कुछ खरीदारों ने मूल बिल्डर बायर्स एग्रीमेंट और भुगतान की मूल रसीदें तक बिल्डर को इस उम्मीद में सौंप दीं कि उन्हें पैसा वापस मिल जाएगा। इसके बावजूद रकम वापस नहीं की गई। एक खरीदार को पोस्ट-डेटेड चेक दिए जाने की बात भी शिकायत में है, लेकिन वह चेक खाते में रकम न होने के कारण बाउंस हो गया। यहीं से खरीदारों का विवाद केवल फ्लैट मिलने में देरी का नहीं रहा, बल्कि जमा रकम वापस न मिलने का भी हो गया।
खरीदारों को बड़ी राहत
सनवर्ल्ड वंदिता परियोजना के खरीदार पुनीत अग्रवाल ने कहा- आयोग में करीब 9 वर्षों से चल रहे मामले के फैसले से खरीदारों को बड़ी राहत मिली है। बिल्डर ने मौके पर कोई निर्माण नहीं किया और जीरो पीरियड का लाभ भी ले लिया। इस फैसले से परियोजना में फंसे अन्य खरीदारों के लिए भी रास्ता खुल गया है।