घर में लगा सकते हैं एक से ज्यादा तुलसी? जानें क्या कहता है वास्तु शास्त्र
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में एक से अधिक तुलसी के पौधे लगाना शुभ होता है। जानें तुलसी लगाने की सही दिशा, नियम और इससे जुड़ी जरूरी बातें।
हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को बहुत पावन माना गया है. हम सभी के घर के आंगन में तुलसी का पौधा लगा हुआ है और विधि-विधान से इस पौधे को माता मानकर इसकी पूजा की जाती है. हिदू धार्मिक मान्यता है कि इस पौधे में माता लक्ष्मी वास करती हैं. इस पौधे की पूजा करने से घर में सुख-संपन्नता आती है. घर धन धान्य से भर जाता है. तुलसी भगवान विष्णु को बहुत प्रिय है. जिस घर में तुलसी की विधि-विधान से पूजा की जाती है, वहां भगवान विष्णु का आशीर्वाद सदेव बना रहता है.
वास्तु शास्त्र में भी तुलसी के पौधे को बहुत खास माना गया है. इसमें इसकी सही दिशा और इसे रखने के स्थान के बारे में बताया गया है. तुलसी का पौधा प्राचीन काल से ही हिंदू परंपराओं का अनमोल भाग रहा है. ये पौधा हमेशा अच्छी ऊर्जा को आकर्षित करता है और वातावरण को पावन बनाता है, लेकिन कई बार इस पौधे को लेकर मन में एक सवाल आता है कि क्या घर में एक से ज्यादा तुलसी की पौधा लगाया जा सकता है? आइए जानते हैं कि इसको लेकर वास्तु शास्त्र में क्या कहा गया है?
घर में लगा सकते हैं एक से अधिक तुलसी
वास्तु शास्त्र में घर में एक से अधिक तुलसी के पौधे लगाने की अनुमति है. यानी घर में एक अधिक तुलसी का पौधा लगाना शुभ होता है, लेकिन कोशिश करें कि आप इन्हें विषम संख्या में ही लगाएं जैसे कि 3, 5 या 7 पौधे एक साथ लगाएं. बहुत ज्यादा तुलसी के पौधे भी न लगाएं. क्योंकि ऐसा करने पर सभी तुलसी के पौधों की सही से देखभाल नहीं हो पाती, जिससे इसकी पूजा के पूर्ण फल भी नहीं मिलते हैं.
तुलसी का पौधा लगाने की सही दिशा
तुलसी का पौधा हमेशा घर की पूर्व दिशा में ही लगाना शुभ होता है. इस पौधे को उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण में ही लगाया जा सकता है. सही दिशा में लगाए गए तुलसी के पौधे से घर में हमेशा अच्छी ऊर्जा आती है. ये पौधा कभी दक्षिण दिशा में नहीं लगाएं. क्योंकि ये पितरों और यम की दिशा मानी जाती है.
तुलसी लगाने के नियम
तुलसी को हमेशा घर के आंगन या बालकनी में ही लगाएं. इसको साफ स्थान पर रखें. भूलकर भी तुलसी के पौधे को घर की गलत दिशा में न लगाएं. इससे लाभ के स्थान पर नुकसान हो सकता है. ध्यान रखें कि घर में लगा तुलसी का पौधा कभी सूखे नहीं. इसमें रविवार और एकादशी के दिन को छोड़कर नियमित रूप से जल चढ़ाएं.