डूमस्क्रॉलिंग से खराब हो सकती है नींद और मानसिक सेहत, ऐसे छोड़ें फोन देखने की लत
रात में देर तक फोन पर नेगेटिव खबरें देखने (डूमस्क्रॉलिंग) से नींद और मानसिक सेहत पर पड़ता है बुरा असर। जानें इससे बचने के उपाय।
रात में बिस्तर पर जाने के बाद फोन पर न्यूज, सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो देखते-देखते घंटों निकल जाना आजकल नॉर्मल है. खासकर जब व्यक्ति लगातार नेगेटिव न्यूज, क्राइम, दुर्घटनाओं, विवाद या डर पैदा करने वाली सूचनाओं को स्क्रॉल करता रहता है और चाहकर भी फोन नहीं रख पाता. इस तरह के कंटेंट को देखने की आदत को डूमस्क्रॉलिंग कहा जाता है. यह सिर्फ स्क्रीन टाइम बढ़ने की समस्या नहीं है, बल्कि नींद और मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकती है.
डॉ. बिप्लब दास (डायरेक्टर, न्यूरोलॉजी, बत्रा हॉस्पिटल, दिल्ली) बताते हैं कि रात में लगातार नकारात्मक कंटेंट देखने से दिमाग सोने से पहले भी एक्टिव और अलर्ट कंडीशन में रह सकता है. व्यक्ति बिस्तर पर तो पहुंच जाता है, लेकिन उसका मस्तिष्क लगातार नई सूचनाओं को प्रोसेस करता रहता है. इससे नींद आने में देरी, नींद की गुणवत्ता में कमी और अगले दिन थकान व चिड़चिड़ापन महसूस हो सकता है.
सुबह क्यों महसूस होती है बेचैनी?
आंखों में दर्द, नींद पूरी न होने के अलावा दिमाग पर इसका बहुत ज्यादा बुरा असर पड़ता है. कुछ मामलों में इस वजह से सुबह एंग्जायटी तक होती है. डॉक्टर कहते हैं कि देर रात तक फोन चलाने से अक्सर सोने का समय कम हो जाता है. वहीं, सोने से पहले देखी गई परेशान करने वाली खबरें और सूचनाएं दिमाग में बनी रह सकती हैं. ऐसे में व्यक्ति को बिना किसी साफ वजह के बेचैनी, घबराहट, चिड़चिड़ापन, मन भारी लगना या पूरे दिन को लेकर चिंता महसूस हो सकती है.
डॉ. दास कहते हैं कि लगातार खराब नींद हमारे फोकस, मूड और स्ट्रेस को संभालने की पावर को प्रभावित कर सकती है. इसलिए सुबह की बेचैनी को हमेशा केवल मानसिक कमजोरी नहीं समझना चाहिए. कई बार इसके पीछे नींद की कमी और रात की गलत डिजिटल आदतें भी भूमिका निभाती हैं.
हालांकि, फोन को एंग्जायटी का एकमात्र कारण मानना सही नहीं है. कई बार पहले से मौजूद तनाव या चिंता के कारण भी व्यक्ति बार-बार फोन चेक करता है. इस तरह एक चक्र बन सकता है. स्ट्रेस की वजह से फोन देखना, नकारात्मक कंटेंट देखना, नींद खराब होना और फिर अगले दिन तनाव बढ़ जाना.
डॉ ब्रहमानंद लाल बताते हैं कि ये आदत मानसिक तनाव बढ़ाने के साथ-साथ नींद को भी प्रभावित कर सकती है. अगर चिंता, बेचैनी या नींद की परेशानी लगातार बनी रहती है और आपकी रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगे, तो डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है.
कैसे रोकें डूमस्क्रॉलिंग?
दिल्ली के डॉ. लाल हॉस्पिटल में डॉ. ब्रह्मानंद लाल ने बताया कि इससे बचने के लिए सोने से कम से कम 30 मिनट पहले फोन अलग रखने की आदत डालें और धीरे-धीरे इस अवधि को 60 मिनट तक बढ़ाएं. फोन को बेड से दूर रखें और रात में न्यूज या सोशल मीडिया के नोटिफिकेशन बंद कर दें.
बेड पर जाने के बाद स्क्रीन देखने के बजाय किताब पढ़ना, हल्का संगीत सुनना या कुछ मिनट रिलैक्सेशन एक्सरसाइज करना बेहतर विकल्प हो सकता है. सुबह उठते ही फोन देखने से भी बचें. दिन की शुरुआत पानी पीने, हल्की स्ट्रेचिंग, कुछ मिनट प्राकृतिक रोशनी में रहने और दिन की प्राथमिकताएं तय करने से करें.
कब डॉक्टर को दिखाएं
अगर लगातार कई हफ्तों तक नींद खराब रहे, सुबह की बेचैनी बनी रहे, घबराहट के दौरे पड़ें या एंग्जायटी का असर रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ने लगे, तो डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है. डॉ. दास के मुताबिक फोन हमारी जरूरत है, लेकिन रात में उसे दिमाग का आखिरी और सुबह का पहला साथी बना लेना अच्छी नींद के लिए ठीक नहीं है. शरीर के साथ दिमाग को भी सोने से पहले डिजिटल ब्रेक की जरूरत होती है.