डोपिंग बिल-2026: अब खेल में डोपिंग होगी अपराध, दोषियों को होगी जेल
केंद्र सरकार मानसून सत्र में डोपिंग बिल-2026 पेश करेगी। खिलाड़ियों के साथ कोच और सप्लायर भी होंगे रडार पर। दोषियों को हो सकती है 5 साल तक की कैद।
केंद्र सरकार मानसून सत्र में NADA (राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी) से जुड़ा डोपिंग बिल-2026 संसद में पेश कर सकती है. नए बिल में डोपिंग को अपराध की श्रेणी में लाने का प्रावधान हो सकता है. मौजूदा नियमों को पहले से और सख्त बनाया जा सकता है. सिर्फ डोपिंग करने वाले खिलाड़ी ही नहीं बल्कि ड्रग्स सप्लाई करने वाले, कोच, हॉस्टल प्रशासन और इसमें शामिल अन्य लोगों को भी कानून के दायरे में लाया जा सकता है. इस बिल का मकसद ये है कि डोपिंग के पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई हो और असली दोषियों को सजा मिल सके.
प्रस्तावित प्रावधान में प्रतिबंधित दवाओं की आपूर्ति में शामिल लोगों के लिए 5 साल तक की कैद की सजा का प्रावधान है. इस संबंध में सरकार ने संशोधन का ड्राफ्ट लोगों की राय जानने के लिए खेल मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराया था. साथ ही सभी हितधारकों से 18 जून तक प्रतिक्रिया देने की अपील की गई थी. खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने पूर्व में कह चुके हैं कि लोगों की राय को शामिल करते हुए संशोधित विधेयक को मानसून सत्र के दौरान पेश किए जाने की उम्मीद है.
प्रस्तावित संशोधन की खास बातें
प्रस्तावित संशोधन में कहा गया है, जो भी खेल में डोपिंग के मकसद से या उससे संबंधित किसी भी उद्देश्य से एथलीट को डोपिंग की अनुमति देता है या उससे कॉन्टैक्ट करता है, उसे साल तक की जेल या दो लाख रुपये तक के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जाएगा. इस मामले को लेकर मांडविया कई मंच पर कह चुके हैं कि डोपिंग महज एक खेल उल्लंघन नहीं रह गया बल्कि ये खिलाड़ियों का शोषण करने वाले एक संगठित तंत्र में तब्दील हो गया है.
2018 में भी पेश किया गया था ड्राफ्ट
बता दें कि पिछले 3 साल से डोपिंग के दोषी देशों की वाडा लिस्ट में भारत लगातार शीर्ष पर है. ये चिंता की बात है. खासकर तब जब देश 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी का लक्ष्य बना रहा है. बता दें कि नया प्रस्ताव 2018 में पेश किए गए एक पूर्व मसौदे से मिलता-जुलता है, जिसमें संगठित नेटवर्क और व्यक्तियों द्वारा एथलीटों को प्रतिबंधित पदार्थों की आपूर्ति करने पर 4 साल की जेल की सजा के साथ-साथ 2 लाख रुपये के जुर्माने की सिफारिश की गई थी.
हालांकि, उन प्रावधानों को 2022 में पारित कानून से हटा दिया गया. फिर पिछले साल संशोधित किया गया. नए संशोधनों के तहत चिकित्सा पेशेवरों को भी जांच के दायरे में लाया गया है. जो डॉक्टर जानबूझकर प्रतिबंधित पदार्थों की दवा लिखते हैं, डोपिंग उल्लंघन में संलिप्त पाए जाने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.