दिल्ली: निजी बिजली कंपनियों के CAG ऑडिट पर सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम रोक
दिल्ली की बिजली वितरण कंपनियों (BRPL, BYPL, TPDDL) के CAG ऑडिट पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगाई है। 38,500 करोड़ के रेगुलेटरी एसेट्स का है पूरा मामला।
दिल्ली सरकार ने निजी बिजली वितरण कंपनियों ((DISCOMs) के खातों की कैग ऑडिट का आदेश दिया था. इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने CAG ऑडिट का रास्ता साफ किया था और कंपनियों की कैग ऑडिट के विरोध की याचिका को खारिज कर दिया था. लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की बिजली कंपनियों के CAG ऑडिट पर रोक लगा दी है. यह पूरा मामला डिस्कॉम पर बकाया करीब 38,500 करोड़ रुपये के रेगुलेटरी एसेट्स (RA) से जुड़ा है.
कोर्ट ने कैग ऑडिट प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाई
सुप्रीम कोर्ट ने डिस्कॉम के कैग ऑडिट प्रक्रिया पर फिलहाल के लिए अंतरिम रोक लगाई है. इसका अर्थ हुआ कि जब तक इस मामले में अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक CAG ऑडिट आगे नहीं बढ़ेगा. इस मामले में बड़ा सवाल यह है कि क्या निजी बिजली कंपनियों का ऑडिट CAG कर सकता है या नहीं. यह विवाद पहले भी 2015 में अदालतों तक पहुंच चुका है.
दिल्ली सरकार ने कैग ऑडिट का दिया था आदेश
गुरुवार यानी 02 जुलाई को दिल्ली सरकार ने बिजली डिस्कॉम कंपनियों का CAG ऑडिट कराने का आदेश जारी किया था. आदेश के बाद भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक यानी CAG को उन इस मुद्दे पर गहन जांच करनी थी कि कै सेडिस्कॉम पर बकाया करीब 38,500 करोड़ रुपये के रेगुलेटरी एसेट्स तहत पहुंच गया. लेकिन दिल्ली सरकार के आदेश के खिलाफ एक दिन बाद ही सुप्रीम कोर्ट पहुंच गईं. जिन तीन कंपनियों का ऑडिट होना था उनमें बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड (BRPL), बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड (BYPL) और टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (TPDDL) शामिल हैं.
दिल्ली विद्युत नियामक आयोग के निर्णय की वैधता पर सवाल
वहीं, इसी से जुड़े DERC(दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन) की अपील पर भी सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की. जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस चंद्रशेखर की पीठ ने कहा कि राष्ट्रीय लेखा परीक्षक की नियुक्ति के संबंध में दिल्ली विद्युत नियामक आयोग के निर्णय की वैधता पर सवाल उठता है. इसलिए इसकी जांच आवश्यक है.
DERC ने कहा-सीएजी ऑडिट की जिम्मेदारी सौंपना वैधानिक ढांचे के विपरीत
याचिका में DERC की तरफ से कहा गया था कि सीएजी को निजी वितरण कंपनियों का ऑडिट की जिम्मेदारी सौंपना वैधानिक ढांचे के विपरीत है. DERC ने अपने याचिका में कहा कि दिल्ली विद्युत नियामक आयोग को इसके लिए एक स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट नियुक्त करना चाहिए, कंपनियों का कैग ऑडिट सही तरीके से किया जा सके.