निठारी कांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली के निधन के बाद फिर ताजा हुए दो दशक पुराने जख्म
निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली की मौत के बाद पीड़ित परिवार ने जताई साजिश की आशंका। दो दशक पुराना मामला फिर चर्चा में।
दो दशक पहले नोएडा के जिस निठारी गांव ने अपने बच्चों के गायब होने का दर्द झेला था, शुक्रवार को उसी इलाके में एक बार फिर पुरानी यादें ताजा हो गईं। बेटी ज्योति को खो चुके सुनीता और झब्बू लाल ने कहा कि सुरेंद्र कोली के आत्महत्या करने की बात गले नहीं उतर रही। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच होनी चाहिए।
सेक्टर में करीब ढाई दशक से कपड़े प्रेस कर परिवार चलाने वाले झब्बू लाल और उनकी पत्नी सुनीता की बेटी ज्योति भी उन बच्चों में शामिल थी, जो वर्ष 2005-6 के दौरान लापता हुई थी। शुक्रवार दोपहर करीब डेढ़ बजे दोनों अपने रोजमर्रा के काम में व्यस्त थे, तभी मीडिया के लोगों से उन्हें कोली की मौत की जानकारी मिली। यह सुनकर दोनों कुछ देर तक स्तब्ध बैठे रहे। करीब दो मिनट बाद सुनीता ने कहा, कोली ने आत्महत्या नहीं की, उसे मारा गया है। अगर उसे आत्महत्या करनी होती तो वह जेल में ही कर लेता। उसकी मौत के पीछे कोई साजिश हो सकती है। जब तक मोनिंदर सिंह पंढेर को फांसी नहीं मिलती, तब तक उन्हें अपनी बेटी के मामले में न्याय का अहसास नहीं होगा। पत्नी की बात के बीच झब्बू लाल ने कहा कि निठारी कांड को लेकर कोली के पास कुछ दस्तावेज थे और वह भविष्य में किसी तरह का खुलासा कर सकता था। कोली की मौत की निष्पक्ष तरीके से जांच होनी चाहिए।
निठारी निवासी 72 साल के रोहताश कुमार के मुताबिक दिसंबर 2006 में नाले में एक मासूम का पंजा मिलने के बाद अचानक घटनाओं की कड़ियां जुड़ने लगीं और सेक्टर-31 स्थित डी-5 कोठी जांच एजेंसियों के निशाने पर आ गई थीं। बुजुर्ग ओमप्रकाश ने आगे बताया कि इस घटना के बाद डी-5 कोठी को लेकर ग्रामीणों के मन में आज भी डर है।
ऐसे सुर्खियों में आया मामला
ज्योति के गायब होने के बाद परिवार लंबे समय तक उसके लौटने की उम्मीद करता रहा। लेकिन निठारी में एक के बाद एक बच्चों और युवतियों के गायब होने की घटनाएं सामने आती गईं। दिसंबर 2006 में डी-5 कोठी के आसपास नाले से मानव अवशेष मिलने के बाद पूरा मामला देशभर में सुर्खियों में आ गया। जांच में मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके घरेलू सहायक सुरेंद्र कोली के नाम सामने आए।
पत्नी से हुई थी मुलाकात
अक्तूबर 2023 में इलाहाबाद हाई कोर्ट से कई मामलों में राहत मिलने के दौरान कोली की पत्नी शांति देवी ने डासना जेल में उससे मुलाकात की थी। तब कोली ने अपनी पत्नी से कहा था कि वह जेल की चारदीवारी के भीतर रहकर आखिरी दम तक अपनी बेगुनाही की लड़ाई लड़ेगा। उससे मिलने एक बार उसका बेटा भी आया था।
मां एक बार मिलने आईं
कोली के परिवार ने उससे पूरी तरह दूरी बना ली थी। डासना जेल में रहने के दौरान केवल एक बार साल 2014 में उसकी मां कुंती देवी उत्तराखंड के अल्मोड़ा से उससे मिलने पहुंची थीं। करीब आठ साल बाद मां को सामने देखकर कोली जेल की सलाखों के पीछे फूट-फूट कर रो पड़ा था। मां से कहा था कि मैं बेगुनाह हूं। मुझे फंसाया गया।
20 साल में भी खुलासा नहीं
निठारी में किसने 19 मासूमों की हत्या की, इसका खुलासा 20 वर्षों में नहीं हो सका। तमाम जांचों और दावों के बाद भी यह पता नहीं चल सका कि आखिरकार खूनी कोठी में किसने मासूमों को मार कर पकाया था। इस कांड के खुलासे में देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी भी फेल हो गई थी। नवंबर 2025 में सुरेंद्र कोली भी सुप्रीम कोर्ट से बरी होने के बाद जेल से बाहर आ गया था। इसके बाद से ही वह सभी से दूरी बनाए हुए था। उसने इस कांड को लेकर कभी कोई टिप्पणी नहीं की और न ही कहीं कोई इंटरव्यू दिया। तमाम संस्थाओं ने उससे संपर्क करने के प्रयास किए, लेकिन वह सभी से बच रहा।
कोली को मुख्य आरोपी भी माना जाता रहा है
माना जा रहा था कि सुरेंद्र कोली इस कांड के रहस्यों को खोल सकता है और उसे ही इस कांड का मुख्य आरोपी भी माना जाता रहा है। कोली की मौत के बाद 19 हत्याओं को लेकर लोग अब कयास ही लगाते रहेंगे कि आखिर किसने मासूमों की हत्या की और किसने उनके साथ दु्ष्कर्म किया। किस ने उनकी लाशों के टुकड़े कर नाले में बहाए।
इन बच्चों की हत्या हुई
रचना, रिम्पा हलधर, कु.बीना, पायल, ज्योति, हर्ष, निशा, पुष्पा विश्वास, सतेंद्र, दीपाली, मैक्स, नंदा देवी, पिंकी सरकार, दीपिका उर्फ पायल, शेख रजा खान, सोनी, अंजलि, आरती, एक अज्ञात युवती।