नोएडा प्राधिकरण बोर्ड बैठक में बड़े फैसले, सुपरटेक केपटाउन के लिए को-डेवलपर को मंजूरी
नोएडा प्राधिकरण की 224वीं बोर्ड बैठक में सुपरटेक केपटाउन के लिए को-डेवलपर ब्रिकबॉस इन्फ्रा को मंजूरी दी गई। साथ ही औद्योगिक जमीन पर ट्रांसफर चार्ज घटाकर 7% कर दिया गया।
नोएडा। नोएडा प्राधिकरण की बुधवार को आयोजित 224वीं बोर्ड बैठक में शहर के विकास और रियल एस्टेट से जुड़े कई अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। औद्योगिक विकास आयुक्त एवं नोएडा-ग्रेनो प्राधिकरण के चेयरमैन दीपक कुमार की अध्यक्षता में सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक चली इस उच्चस्तरीय बैठक में अधूरी पड़ी सुपरटेक केपटाउन (Supertech Capetown) परियोजना को पूरा कराने के लिए को-डेवलपर कंपनी लाने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी गई।
इस फैसले से अब न केवल अधूरे पड़े टावरों का निर्माण कार्य गति पकड़ेगा, बल्कि करीब 600 से अधिक फ्लैट खरीदारों के नाम रजिस्ट्री होने का रास्ता भी साफ हो गया है। इसके अलावा बोर्ड ने कार्यशील औद्योगिक जमीन की खरीद-फरोख्त पर लगने वाले ट्रांसफर शुल्क को 10 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत करने की घोषणा कर उद्योगपतियों को बड़ी राहत दी है।
🏢 ब्रिकबॉस इन्फ्रा पूरा करेगी सुपरटेक केपटाउन का काम, पहले चुकाना होगा 130 करोड़ का बकाया
बोर्ड बैठक में सेक्टर-74 स्थित भूखंड संख्या-जीएच-1ए (सुपरटेक केपटाउन) में को-डेवलपर के रूप में मैसर्स ब्रिकबॉस इन्फ्रा प्राइवेट लिमिटेड को काम सौंपने की स्वीकृति दे दी गई।
-
परियोजना का विवरण: यह परियोजना कुल 3130.97 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैली है और इसमें कुल 7 टावर प्रस्तावित हैं। इनमें से 2 टावरों का अधिभोग प्रमाण पत्र (OC) पूर्व में जारी हो चुका है, जबकि बाकी बचे 5 टावरों का काम पूरा कर ओसी जारी किया जाएगा।
-
रजिस्ट्री का रास्ता साफ: प्रोजेक्ट में कुल 846 फ्लैट्स का निर्माण प्रस्तावित है, जिनमें से 200 की रजिस्ट्री हो चुकी है। अब शेष 646 फ्लैट खरीदारों को जल्द अपने मकान का मालिकाना हक मिलने की उम्मीद है।
-
शर्त: नए बिल्डर को प्राधिकरण का लंबित 130 करोड़ रुपये का बकाया प्राथमिकता के आधार पर चुकाना होगा। उल्लेखनीय है कि इस प्लॉट का वर्ष 2017 में सब-डिवीजन किया गया था।
📊 अमिताभ कांत समिति की रिपोर्ट: बिल्डरों ने जमा कराए 913 करोड़ रुपये, 4931 फ्लैट्स की हुई रजिस्ट्री
बैठक के दौरान अमिताभ कांत समिति की सिफारिशों की अद्यतन स्टेटस रिपोर्ट भी बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत की गई।
-
रजिस्ट्री में तेजी: अब तक विभिन्न बिल्डरों द्वारा 913 करोड़ रुपये का बकाया जमा कराया जा चुका है, जिसके तहत 4931 फ्लैटों की रजिस्ट्री सफलतापूर्वक संपन्न हो चुकी है।
-
36 डिफ़ॉल्टर बिल्डर्स: बकाया जमा न कराने के कारण 36 बिल्डर परियोजनाओं को डिफ़ॉल्टर घोषित किया गया है। बोर्ड ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि रजिस्ट्री की प्रक्रिया में और तेजी लाई जाए।
बैठक में नोएडा प्राधिकरण के सीईओ कृष्णा करुणेश, यमुना प्राधिकरण के सीईओ राकेश सिंह समेत कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
🏭 औद्योगिक भूखंडों के ट्रांसफर चार्ज में कटौती और समयवृद्धि शुल्क की नई दरें तय
कार्यशील औद्योगिक भूखंड खरीदने और बेचने वाले उद्यमियों को राहत देते हुए ट्रांसफर शुल्क 10% से घटाकर 7% कर दिया गया है।
-
पारिवारिक छूट: स्टांप एक्ट की तर्ज पर खून के रिश्तों (Family Relations) में जमीन ट्रांसफर करने पर प्राधिकरण में भी शुल्क से छूट प्रदान करने का निर्णय लिया गया।
-
समयवृद्धि शुल्क (Extension Fee): इकाई को कार्यशील करने की मूल अवधि (3 या 5 वर्ष) समाप्त होने के बाद अधिकतम 3 साल की अतिरिक्त समयवृद्धि दी जाएगी। इसके लिए प्रथम, द्वितीय और तृतीय वर्ष का समयवृद्धि शुल्क क्रमशः 3%, 5% और 7% निर्धारित किया गया है।
⚽ स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट: 31 दिसंबर 2026 तक किसानों से आपसी सहमति से ली जाएगी बची हुई जमीन
स्पोर्ट्स सिटी (सेक्टर-78, 79, 150 और 152) के लेआउट प्लान पर आई 225 से अधिक आपत्तियों का जल्द से जल्द निस्तारण कर नए सिरे से नक्शा जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं।
-
सहमति से अधिग्रहण: स्पोर्ट्स सिटी की परियोजनाओं में छोटे-छोटे टुकड़ों में बची हुई जमीनों को किसानों से आपसी सहमति के आधार पर लेने का निर्णय लिया गया है।
-
अंतिम तिथि: इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए 31 दिसंबर 2026 की समय-सीमा तय की गई है। इसके बाद अधिगृहीत जमीन बिल्डरों को आवंटित कर योजना को सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार आगे बढ़ाया जाएगा।
📌 बैठक में लिए गए अन्य प्रमुख निर्णय
-
ऑटो शोरूम प्रोजेक्ट: नोएडा-ग्रेनो एक्सप्रेसवे की सर्विस रोड के समीप सेक्टर-105 में नए ऑटो शोरूम निर्माण योजना को हरी झंडी दी गई।
-
बिजनेस पार्क: सेक्टर-32 स्थित सिटी सेंटर के खाली मैदान पर आधुनिक बिजनेस पार्क विकसित करने की योजना स्वीकृत की गई।
-
महिला छात्रावास अनुबंध: सेक्टर-62 स्थित 500 बेड के महिला छात्रावास का अनुबंध 10 वर्षों के लिए बढ़ाने और देरी पर लगे ब्याज को माफ करने का निर्णय लिया गया।
-
जीसीसी हब व आईटी पार्क: वैश्विक आईटी-आईटीईएस मानकों के ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस और जीसीसी हब के लिए सेक्टर-147 में 6800 वर्ग मीटर जमीन पर नई योजना लाई जाएगी।
-
लीज रेंट में बड़ी राहत: सेक्टर-32 (प्लॉट सीसी-1) की बनी यूनिटों के उपपट्टाधारकों के लिए लीज रेंट दर 612 रुपये प्रति वर्ग मीटर से घटाकर 232 रुपये प्रति वर्ग मीटर वार्षिक कर दी गई है।
-
व्यावसायिक रजिस्ट्री दायरा बढ़ा: कमर्शियल प्लॉट की यूनिट्स की रजिस्ट्री अब एचयूएफ (HUF), सोसाइटी, ट्रस्ट तथा एक से अधिक व्यक्तियों के संयुक्त नाम पर कराने की अनुमति दे दी गई है।