पुजारियों और दोहलीदारों को दान की जमीन पर मालिकाना हक का रास्ता साफ, SDM को मिलीं शक्तियां

हरियाणा सरकार ने दोहलीदार (पुजारी), बुटीमार और भौडेदार को दान में मिली जमीन का मालिकाना हक देने के लिए SDM को शक्तियां प्रदान की हैं। पढ़ें नई अधिसूचना की पूरी जानकारी।

चंडीगढ़। हरियाणा में जिन ब्राह्मणों, पुजारियों और पुरोहितों को दान में जमीन मिली थी, उनके मालिकाना हक को लेकर यदि कोई अड़चन या कानूनी बाधाएं हैं, तो उन्हें अब जल्द से जल्द दूर किया जाएगा।

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने अधिसूचना जारी करते हुए उप मंडल अधिकारी (नागरिक) यानी SDM को भी इन समस्याओं की सुनवाई और निस्तारण की शक्तियां प्रदान कर दी हैं। राजस्व विभाग ने प्रथम श्रेणी के सहायक कलेक्टर के रूप में एसडीएम को यह अधिकार सौंपा है। अभी तक यह शक्तियां केवल जिला कलेक्टर (उपायुक्त) के पास ही केंद्रित थीं।

📑 वित्त आयुक्त एवं ACS डॉ. सुमिता मिश्रा ने जारी की नई अधिसूचना

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्त आयुक्त (राजस्व) एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने मंगलवार को इस संबंध में अधिसूचना जारी की।

अधिसूचना के अनुसार, हरियाणा में:

  • दोहलीदार (पुजारी)

  • बुटीमार (झाड़ीनुमा जमीन की सफाई करके खेती करने वाले)

  • भौडेदार (मंदिरों या धार्मिक स्थलों में सेवा करने वाले)

  • मुकररीदार (जिन्हें निश्चित समय के लिए जमीन दी गई हो)

इन सभी को दान में मिली जमीनों के मालिकाना अधिकार निहित करने के लिए SDM को प्रथम श्रेणी के सहायक कलेक्टर के रूप में शक्तियां प्रदान की गई हैं। अब एसडीएम अपनी शक्तियों का उपयोग करके मालिकाना हक से जुड़े विवादों और तकनीकी अड़चनों की सुनवाई करेंगे तथा मामलों का त्वरित निस्तारण करवाएंगे।

⚖️ मनोहर सरकार ने बनाया था कानून, अब प्रक्रिया हुई और आसान

पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल के कार्यकाल के दौरान दोहलीदारों को मालिकाना अधिकार देने के लिए नवंबर 2023 में कानून बनाया गया था। इसके नियम के अनुसार, यदि दान में मिली जमीन पर खेती करने या सेवा कार्य का समय 20 वर्ष या उससे अधिक हो चुका है, तो उन्हें उस जमीन का मालिकाना हक प्रदान किया जाएगा।

इस कानून के बनने के बावजूद कई मामले तकनीकी वजहों से अब तक लंबित चल रहे थे। अभी तक सिर्फ उपायुक्तों (DC) के पास यह अधिकार होने के कारण मामलों के निपटारे में समय लग रहा था। इस नए फैसले से उपायुक्तों पर काम का दबाव कम होगा और एसडीएम स्तर पर ही सुनवाई होने से किसानों और पुजारियों के मामलों का शीघ्र निपटारा हो सकेगा।

Leave A Reply

Your email address will not be published.