बरेली जिला अस्पताल में बढ़ा संकट: एक बेड पर दो बच्चों का इलाज, बदहाली का आलम
बरेली में गर्मी का कहर: जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में बेड की कमी, अल्ट्रासाउंड के लिए 3 महीने की वेटिंग और गंदगी से मरीज परेशान। जानें क्या है अस्पताल का हाल।
बरेली में बढ़ती गर्मी का असर अब बच्चों की सेहत पर साफ दिखाई देने लगा है. जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में मरीजों की संख्या अचानक बढ़ गई है, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खुल रही है. मंगलवार को 30 बेड की क्षमता वाले वार्ड में करीब 40 बच्चों को भर्ती करना पड़ा, जिसके चलते एक-एक बेड पर दो-दो बच्चों का इलाज किया जा रहा है.
अस्पताल में भर्ती अधिकांश बच्चे उल्टी, दस्त, पेट दर्द और बुखार जैसी समस्याओं से पीड़ित हैं. डॉक्टरों के अनुसार, मौसम में तेजी से बदलाव और गर्मी के कारण ऐसे मामलों में इजाफा हुआ है. हालांकि, बेड की कमी के बावजूद अस्पताल प्रशासन इलाज जारी रखने का दावा कर रहा है.
बच्चा वार्ड के आसपास गंदगी का अंबार
वहीं, अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर मरीजों और उनके परिजनों में नाराजगी देखने को मिल रही है. परिजनों का कहना है कि बच्चा वार्ड के आसपास गंदगी का अंबार लगा हुआ है. कूड़ेदान के पास कुत्ते घूमते नजर आते हैं और गंदा पानी बहता रहता है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है. मच्छरों की समस्या भी गंभीर बनी हुई है.
ओपीडी में भी हालात बेहतर नहीं हैं. डायरिया, उल्टी-दस्त और पेट दर्द के मरीजों की लंबी कतारें लगी हुई हैं. मरीजों का कहना है कि पर्चा बनवाने और दवा लेने के लिए घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है. कई लोगों ने आरोप लगाया कि डॉक्टर बाहर से दवाएं लिख रहे हैं और अस्पताल में पीने के पानी तक की उचित व्यवस्था नहीं है.
अल्ट्रासाउंड के लिए 3 महीने की वेटिंग
इसके अलावा, मरीजों को अल्ट्रासाउंड जैसी जांच के लिए भी तीन-तीन महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है, जिसके चलते उन्हें मजबूरी में बाहर जांच करानी पड़ रही है. भीषण गर्मी में लंबी कतारों में खड़े होकर दवा लेने की मजबूरी ने मरीजों की परेशानी और बढ़ा दी है.
कुल मिलाकर, बढ़ती गर्मी के बीच जिला अस्पताल की अव्यवस्थाएं मरीजों, खासकर बच्चों के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही हैं. स्वास्थ्य विभाग के लिए यह स्थिति चिंता का विषय है और जल्द सुधार की जरूरत महसूस की जा रही है.