मनीषा मौत मामले में परिजनों को बड़ी राहत; पंचकूला सीबीआई कोर्ट ने क्लोजर रिपोर्ट खारिज कर दिए दोबारा जांच के आदेश
पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने भिवानी की शिक्षिका मनीषा की मौत मामले में क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने परिजनों की याचिका पर दोबारा जांच के आदेश जारी किए हैं।
हरियाणा के भिवानी की शिक्षिका मनीषा की संदिग्ध मौत के मामले में पीड़ित परिवार को न्याय की दिशा में अदालत से बहुत बड़ी राहत मिली है। पंचकूला स्थित सीबीआई की विशेष मजिस्ट्रेट अदालत ने शनिवार को सीबीआई (CBI) द्वारा दाखिल की गई क्लोजर रिपोर्ट को चुनौती देने वाली परिजनों की विरोध याचिका पर सुनवाई करते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया।
अदालत ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को सिरे से खारिज करते हुए मामले की फिर से निष्पक्ष जांच (Re-Investigation) करने के आदेश जारी किए हैं। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच एजेंसी उन सभी अहम तथ्यों की गहराई से दोबारा जांच करे, जो पीड़ित परिवार की तरफ से अदालत के समक्ष उठाए गए हैं।
🚨 हत्या या आत्महत्या? परिजनों के वकील हर्ष मोहन सिंह ने खड़े किए गंभीर सवाल
मृतका के परिजनों की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता हर्ष मोहन सिंह ने अदालत में सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग, एफएसएल (FSL) रिपोर्ट और घटनास्थल से जुड़े कई संदेहास्पद तथ्यों को सामने रखा।
उन्होंने अदालत में जोरदार दलील दी कि उपलब्ध साक्ष्यों और परिस्थितियों के आधार पर इसे महज आत्महत्या मान लेने के बजाय हत्या की आशंका (Murder Angle) को ध्यान में रखकर भी जांच होनी चाहिए। अब इस आदेश के बाद सीबीआई को एक बार फिर नए सिरे से जांच करनी होगी कि आखिर मनीषा की मौत की असली वजह हत्या थी या आत्महत्या।
📞 डायल 112 पर कॉल और 400 मीटर के दायरे में तलाश: 3 दिन बाद मिला था शव
परिजनों के वकील ने पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाते हुए अदालत को बताया:
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लापता होने के बाद की स्थिति: मनीषा 11 अगस्त 2025 को लापता हुई थी, जिसके तुरंत बाद परिजनों ने आपातकालीन नंबर डायल 112 पर कॉल की थी और खुद भी उसकी सघन तलाश शुरू की थी।
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शव बरामदगी पर संशय: जिस क्षेत्र में तलाश की जा रही थी, वह महज 400 मीटर का दायरा था, जहां आसपास आबादी और मुख्य रास्ता भी था, फिर भी किसी को शव नहीं दिखा।
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13 अगस्त को मिला शव: आखिरकार 13 अगस्त को मनीषा का शव भिवानी के सिंघानी गांव के पास खेतों में बरामद हुआ। बचाव पक्ष ने इन विषम परिस्थितियों को जांच का बेहद अहम बिंदु बताते हुए सीबीआई की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे।
✍️ सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग और डीएसपी के उल्लेख पर गहराया विवाद
अधिवक्ता हर्ष मोहन सिंह ने अदालत में दो सुसाइड नोट का मुद्दा उठाते हुए कहा कि परिजनों के अनुसार, एक नोट की लिखावट (हैंडराइटिंग) मनीषा के मूल हस्ताक्षरों से मेल नहीं खाती थी, जबकि फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट में इसे मैच दिखाया गया।
इसके अलावा, उन्होंने दूसरे सुसाइड नोट में एक डीएसपी (DSP) के नाम का उल्लेख होने और उससे जुड़ी जांच के ढुलमुल रवैये पर भी सवाल उठाए। परिजनों का कहना था कि हैंडराइटिंग, बरामद दवाओं और एम्स (AIIMS) दिल्ली की मेडिकल रिपोर्ट से जुड़े तथ्यों की निष्पक्ष व वैज्ञानिक पड़ताल होना बेहद जरूरी था।
🧪 जहर की पुष्टि न होना और गर्दन के निशानों पर उठते सवाल
परिजनों के वकील ने अदालत के सामने तथ्य रखा कि एफएसएल (FSL) रिपोर्ट में जहर खाने की कोई स्पष्ट पुष्टि नहीं हुई है। इसके साथ ही मृतका की गर्दन पर मिले संदिग्ध निशानों को लेकर भी जांच एजेंसी पर लापरवाही का आरोप लगाया गया।
पीड़ित पक्ष का सीधा आरोप था कि सीबीआई ने एक स्वतंत्र केंद्रीय जांच एजेंसी की तरह सभी पहलुओं की गहराई से पड़ताल करने के बजाय स्थानीय पुलिस की पुरानी रिपोर्ट को ही अपनी जांच का आधार बना लिया। परिजनों द्वारा पेश की गई इन मजबूत दलीलों को स्वीकार करते हुए सीबीआई कोर्ट ने सभी बिंदुओं पर दोबारा विस्तृत जांच का आदेश दिया है।