मां की डांट को चुनौती मानकर बना सेना में अफसर, नवीन कौशिक के लेफ्टिनेंट बनने पर गांव में जश्न
जींद के अहिरका गांव के नवीन कौशिक चेन्नई OTA से पास आउट होकर बने लेफ्टिनेंट। मां की डांट को बनाया अपनी प्रेरणा।
जींद: अहिरका गांव के 22 वर्षीय नवीन कौशिक ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर परिवार और गांव का नाम रोशन किया है. चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA) में पासिंग आउट परेड के बाद नवीन पहली बार अपने गांव पहुंचे, तो ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों और फूल-मालाओं के साथ उनका जोरदार स्वागत किया. नवीन का स्वागत करने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण और युवा मौजूद रहे.
मां की डांट को बनाया चुनौती: नवीन की सफलता के पीछे मेहनत के साथ उनकी मां की डांट का भी दिलचस्प किस्सा है. नवीन ने बताया कि पढ़ाई के दिनों में जब वह घर के काम में हाथ नहीं बंटाते थे तो उनकी मां अक्सर ताना मारते हुए कहती थीं- ‘काम क्यों नहीं करता, क्या कहीं का लेफ्टिनेंट लगा हुआ है?’ मां के ये शब्द नवीन के मन में बैठ गए. उन्होंने इसी बात को चुनौती के रूप में लिया और ठान लिया कि एक दिन वह सच में लेफ्टिनेंट बनकर दिखाएंगे. आज वही बात हकीकत बन चुकी है.
सीडीएस की जानकारी मिली तो शुरू की तैयारी: नवीन ने बताया कि बचपन से ही उनका सपना देश की सेवा करने का था. दिल्ली में ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान उन्हें सीडीएस (कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज) परीक्षा के बारे में जानकारी मिली. इसके बाद उन्होंने अनुशासन और लगातार मेहनत के साथ तैयारी शुरू कर दी. लिखित परीक्षा और एसएसबी इंटरव्यू की कठिन प्रक्रिया को पार करने के बाद उनका चयन सैन्य प्रशिक्षण के लिए हुआ. चेन्नई में प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्हें भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन मिला.
युवाओं को दिया मेहनत का संदेश: नवीन ने कहा कि आज इंटरनेट के जरिए युवाओं के पास पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए तमाम संसाधन उपलब्ध हैं. युवा 11वीं-12वीं कक्षा से ही एनडीए की तैयारी शुरू कर सकते हैं. उन्होंने युवाओं से सही दिशा में तैयारी करने, अनुशासन बनाए रखने और इंटरनेट का सकारात्मक इस्तेमाल करने की अपील की.
माता-पिता की आंखों में छलके खुशी के आंसू: पासिंग आउट परेड में नवीन के कंधों पर लेफ्टिनेंट के सितारे सजते देख उनके पिता दलबीर शर्मा और माता भावुक हो गए. माता-पिता ने कहा कि बेटे ने बचपन में देखे अपने सपने को मेहनत से पूरा कर दिखाया है. नवीनi के गांव लौटने पर पूरे अहिरका में उत्सव जैसा माहौल रहा. ग्रामीणों ने कहा कि नवीन की सफलता गांव के दूसरे युवाओं को भी सेना में जाने के लिए प्रेरित करेगी.