मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय कानून के लिए काम करने वाली नावी पिल्लई को मिला नोबेल शांति पुरस्कार

वर्ष 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार नवनेथम नावी पिल्लई को देने की घोषणा की गई है। उन्हें यह सम्मान मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय कानून के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए मिला है।

नोबेल कमेटी ने वर्ष 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा कर दी है। इस साल यह प्रतिष्ठित सम्मान दक्षिण अफ्रीका की जानी-मानी मानवाधिकार कार्यकर्ता और पूर्व जज नवनेथम ‘नावी’ पिल्लई को प्रदान किया जाएगा। नोबेल पुरस्कार के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट के अनुसार, उन्हें शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को मजबूत करने तथा युद्ध अपराधों के खिलाफ उनके ऐतिहासिक संघर्ष के लिए इस सम्मान से नवाजा गया है। इस घोषणा के साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बार फिर इस पुरस्कार से वंचित रहना पड़ा है।

⚖️ रंगभेद के खिलाफ संघर्ष से लेकर अंतरराष्ट्रीय न्याय तक का सफर

तमिल मूल के परिवार में जन्मीं नावी पिल्लई ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा मानवाधिकारों की रक्षा और न्याय दिलाने के लिए समर्पित किया है। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ नेल्सन मंडेला के साथ कानूनी लड़ाई लड़ी थी। इसके अलावा, वह रवांडा इंटरनेशनल क्रिमिनल ट्रिब्यूनल और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में महत्वपूर्ण पदों पर रह चुकी हैं। उनके प्रमुख कार्यों में युद्ध अपराधों, मानवता के खिलाफ अपराधों और नरसंहार के मामलों में न्यायिक कार्रवाई को आगे बढ़ाना शामिल है।

🌍 क्यों मिला नावी पिल्लई को यह पुरस्कार?
  • युद्ध अपराधों के खिलाफ कड़े कदम: उन्होंने दुनिया भर में युद्ध अपराधों और नरसंहार के मामलों में जवाबदेही तय करने के लिए न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत किया।

  • रवांडा नरसंहार में ऐतिहासिक भूमिका: रवांडा न्यायाधिकरण में जज रहते हुए उन्होंने यौन हिंसा को मानवता के खिलाफ अपराध के रूप में मान्यता दिलाने में अहम योगदान दिया।

  • ताकतवर देशों को कानून के दायरे में लाना: उनका यह स्पष्ट मत रहा है कि दुनिया में स्थायी शांति केवल सैन्य ताकत से नहीं, बल्कि कानून, न्याय और जवाबदेही से ही स्थापित हो सकती है।

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