मुंबई के व्यापारी शिवचरण गुप्ता की अस्थियां गंगा में विसर्जित, 10 साल बाद परिवार को सोशल मीडिया से मिली थी मौत की खबर

सोनीपत वृद्धाश्रम में रहे मुंबई के व्यापारी शिवचरण गुप्ता की अस्थियां हरिद्वार में गंगा में प्रवाहित की गईं।

सोनीपत : मुंबई के बड़े कपड़ा कारोबारी रहे शिवचरण गुप्ता की अस्थियां आज गंगा में प्रवाहित की गई। अहमदाबाद से हरिद्वार आ रहे उनके बड़े भाई व्यापारी महेंद्र कुमार अस्थियों को विसर्जित किया। इसके लिए समाज कल्याण शिक्षा समिति के सदस्य बुधवार को हरिद्वार रवाना हुए।

समाज कल्याण शिक्षा समिति को शिव चरण गुप्ता की अस्थियां हरिद्वार में विसर्जित करने के लिए बेटियों का इंतजार था। लेकिन अब तक भी उनका आना तय नहीं हुआ है। इधर, पिता की अंत्येष्टि में नहीं पहुंची बेटियों का वायरल वीडियो देखकर महेंद्र कुमार को छोटे भाई की मौत का पता लगा। इसके बाद उन्होंने खुद ऑनलाइन समिति के संपर्क नंबर तलाश कर उनसे बात की।

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मीडिया से भाई की मौत की जानकारी मिलने पर हरिद्वार पहुंचे महेंद्र गुप्ता ने कहा, ‘मैं तो 10 साल पहले ही भाई शिवचरण की मौत मान चुका था। नेपाल में आए भूकंप के दौरान उनकी मौत हो गई होगी, ऐसा मान बैठा था। अब सोशल मीडिया से सच्चाई पता चली तो यहां पहुंच गया।’ शिवचरण गुप्ता सात भाई-बहन थे। पिछले 10 साल से शिवचरण के परिवार से किसी का कोई संपर्क नहीं था।

 

वहीं, वृद्धाश्रम प्रबंधन ने शिवचरण की बड़ी बेटी से दोबारा बातचीत की।बेटी ने कहा कि अस्थियों का अच्छे से विसर्जन कर दिया जाए।उसने वृद्धाश्रम प्रबंधन से कहा कि आप मेरे पिता के छोटे भाई समझकर पूरी रस्में निभा देना।बेटी ने यह भी कहा कि अगर उसकी तबीयत ठीक होती तो वह खुद हरिद्वार जरूर आती।बड़ी बेटी ने कहा कि वह इस पूरे घटनाक्रम को  लेकर बहुत शर्मिंदा हैं और वो अपने पिता से बहुत प्यार करती थीं, लेकिन उनकी कुछ मजबूरियां रही होंगी। बेटी के मुताबिक, उनके पिता उनके पास रहने के लिए तैयार नहीं थे।बेटियों ने अंतिम रस्मों की जिम्मेदारी वृद्धाश्रम प्रबंधन को सौंप दी है।

 

बेटी ने वृद्ध आश्रम प्रबंधन आनंद कुमार को अस्थि विसर्जन के बाद हवन और कन्याओं को भोजन करवाने की बात भी कही।वहीं बेटियां अपने घर पर तेरहवीं की रस्म करवाएंगी।इस पूरे मामले में शिवचरण गुप्ता के बड़े भाई महेंद्र गुप्ता ने भी बेटियों की मजबूरी को समझने की बात कही।उन्होंने कहा कि बेटियों की भी कोई मजबूरी रही होगी।बेटियों के नहीं पहुंचने के बीच बड़े भाई और सामाजिक संस्थाओं से जुड़े लोगों ने अंतिम रस्में निभाईं। अंतिम संस्कार के बाद अब अस्थि विसर्जन की जिम्मेदारी भी संस्था और समाजसेवियों ने निभाई।इस पूरे मामले ने एक बार फिर परिवार के रिश्तों और बुजुर्गों के प्रति जिम्मेदारियों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

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