मोरनी हिल्स अवैध गेस्ट हाउस मामला: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का कड़ा रुख, नए निर्माण पर पूरी तरह लगाई रोक

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंचकूला के मोरनी हिल्स में नए गेस्ट हाउस के निर्माण पर रोक लगाई। 24 में से 22 अवैध गेस्ट हाउस सील, सरकार से स्टेटस रिपोर्ट तलब।

चंडीगढ़: पंचकूला के संवेदनशील और प्राकृतिक रूप से समृद्ध मोरनी हिल्स क्षेत्र में अवैध रूप से बनाए जा रहे और संचालित हो रहे गेस्ट हाउसों के मुद्दे पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने क्षेत्र में किसी भी प्रकार के नए गेस्ट House (गेस्ट हाउस) के निर्माण पर पूरी तरह से रोक लगाते हुए स्पष्ट किया है कि अब नए निर्माण की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसके साथ ही, अदालत ने प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि यदि क्षेत्र में कोई अन्य गेस्ट हाउस भी बिना वैध अनुमति के संचालित पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध तत्काल सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

📝 स्थानीय निवासी याद राम और अन्य ने दाखिल की थी जनहित याचिका; माहौल खराब होने का लगाया था आरोप

याचिका और दलीलें:

  • याचिकाकर्ताओं की मांग: स्थानीय निवासी याद राम व अन्य की ओर से पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर क्षेत्र में धड़ल्ले से चल रहे अवैध गेस्ट हाउसों को तत्काल बंद करवाने की मांग की गई थी।

  • सुरक्षा पर चिंता: याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि इन अनधिकृत गेस्ट हाउसों के कारण इलाके का सामाजिक माहौल लगातार खराब हो रहा है, जिससे महिलाओं और बच्चियों का घरों से बाहर निकलना तक मुश्किल हो गया है। इनमें से अधिकांश गेस्ट हाउस बिना किसी आवश्यक सरकारी मंजूरी या लाइसेंस के संचालित किए जा रहे थे।

⚖️ हाईकोर्ट की खंडपीठ में सुनवाई; 24 में से 22 गेस्ट हाउसों पर लग चुका है ताला

अदालत की कार्रवाई और सीलिंग अभियान:

  • खंडपीठ के निर्देश: मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा तथा न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई।

  • कारण बताओ नोटिस और सीलिंग: सुनवाई के दौरान अदालत को अवगत कराया गया कि मोरनी क्षेत्र में अनधिकृत रूप से संचालित हो रहे कुल 24 गेस्ट हाउसों को प्रशासन की ओर से कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी किए गए थे, जिनमें से त्वरित कार्रवाई करते हुए 22 गेस्ट हाउसों को पूरी तरह सील किया जा चुका है।

  • स्टेटस रिपोर्ट तलब: मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को इस पूरे मामले में अद्यतन स्थिति रिपोर्ट (Status Report) अदालत में दाखिल करने के कड़े निर्देश दिए हैं।

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