मौलाना फजलुर रहमान की सेना को सीधी चुनौती: वर्दी उतारकर चुनाव लड़ें असीम मुनीर
JUI-F प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने पाकिस्तानी सेना को राजनीति से दूर रहने की नसीहत दी। असीम मुनीर पर साधा निशाना, कहा- वर्दी उतारकर चुनाव लड़ें।
पाकिस्तान में जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम फजल यानी JUI-F के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान सेना फील्ड मार्शल असीम मुनीर को सीधे चुनौती दी है. मौलाना फजलुर रहमान ने कहा कि अगर सेना को राजनीति करनी है तो वह वर्दी उतारकर आए. अपनी पार्टी बनाएं और चुनाव लड़ें. तब पता चल जाएगा कि लोग वर्दी वालों को कितने वोट देते हैं. यह आपका अधिकार है कि आप जिसे चाहें सरकार को सौंप दें और जिससे चाहें सरकार छीन लें.
मौलाना फजलुर रहमान ने सेना को लेकर कहा कि आप भी हमारे पाकिस्तानी हैं. आप भी हमारे कलमा पढ़ने वाले भाई हैं. लेकिन देश में रहते हुए, मेरे लिए भी एक सीमा है. मुझे अपनी सीमा से बाहर नहीं जाना चाहिए. संसद की अपनी सीमा है, हर विभाग का अपना अधिकार क्षेत्र है. इसी तरह, सेना का भी अपना अधिकार क्षेत्र है. सेना की भी एक जिम्मेदारी है. अपनी जिम्मेदारी पर नजर रखें.
‘कौन सत्ता में रहेगा तय करना सेना का काम नहीं’
उन्होंने आगे कहा कि सेना का काम देश की सुरक्षा करना है. राजनीति में दखल देना नहीं.यह तय करना सेना का काम नहीं है कि देश में सरकार कौन बनाएगी और कौन सत्ता से बाहर जाएगा। साथ ही रहमान ने यह भी कहा कि आतंकवाद से निपटने के नाम पर आम नागरिकों को हथियार देने या मिलिशिया बनाने की मांग भी गलत है. इससे वे खुद कोई मिलिशिया नहीं बना रहे हैं , बल्कि आम लोगों के हाथ में हथियार आने से आगे चलकर खून-खराबा और निजी दुश्मनी बढ़ने का खतरा है.
‘खैबर पख्तूनख्वा में कोई सरकार नहीं है’
मौलाना फजलुर रहमान ने कहा कि आज पाकिस्तान बिखर रहा है. खैबर पख्तूनख्वा में कोई सरकार नहीं है. पश्चिम में सूरज डूबने के बाद, सुबह सूरज उगने तक, पुलिस अपने थानों से बाहर नहीं निकलती. अगर पुलिस थानों से बाहर नहीं आएगी, तो सड़कें हथियारबंद समूहों के हवाले हो जाएंगी, फिर सड़कें और रास्ते डाकुओं के रहम-ओ-करम पर होंगे.
अपनों के लिए कफन खरीदते बीत रहा समय-फजलुर रहमान
उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान में विद्रोह हुए थे. पूरा बलोच क्षेत्र पाकिस्तान के नियंत्रण से बाहर हो गया था. आज भी, वहां पाकिस्तान सरकार का कोई अधिकार नहीं चलता. लेकिन हम बलोच क्षेत्र को संभाले हुए थे. अब पख्तून क्षेत्र भी खून में डूब रहा है. पख्तून क्षेत्र में, दो-तीन दिनों के भीतर, हमें पचास से ज़्यादा लाशें मिली हैं. बाजारों में हमने बस अपने अपनों के लिए कफ़न खरीदे हैं.
हालात ऐसे कि बच्चे स्कूल जाने के लिए सुरक्षित नहीं
मौलाना फजलुर रहमान ने आगे कहा कि क्या पाकिस्तान के लोगों की किस्मत यही है उन्हें अपना जीवन खून बहाते हुए बिताना पड़े? उन्होंने आरोप लगाया कि न तो मेरा बच्चा स्कूल जाने के लिए घर से बाहर निकल सकता है, न ही मेरे प्रांत का गरीब आदमी दिहाड़ी मज़दूरी के लिए बाहर निकल सकता है. अगर वह बाहर निकलता भी है, तो वह खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करता है.
असीम मुनीर पर लगाया देश को लूटपाट और हत्या की ओर धकेलने का आरोप
मौलाना फजलुर रहमान ने बिना नाम लिए असीम मुनीर पर तंज कसते हुए कहा कि आप तो चले जाएंगे, लेकिन आप मेरी मातृभूमि को आने वाली पीढ़ियों तक चलने वाली आपसी दुश्मनी, हत्या और लूटपाट की ओर धकेल रहे हैं. यह राजनीति किसी और को समझाइए. हमें समझाने की कोशिश मत कीजिए. अगर राजनीति करनी है, तो वर्दी उतारकर, चुनाव लड़िए.