यूजीसी और राज्यपाल तक पहुँची सीयूएच महेंद्रगढ़ के पीएचडी शोधार्थी की शिकायत, जानिए क्या है पूरा विवाद
हरियाणा केंद्रीय विवि (CUH) में पीएचडी शोधार्थी ने गाइड पर पीएचडी न करने देने का दबाव बनाने का आरोप लगाया। 80 छात्रों के धरने के बाद VC ने 3 दिन में समाधान का आश्वासन दिया।
हरियाणा के महेंद्रगढ़ स्थित हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (CUH) के हिंदी विभाग में पीएचडी (PhD) के दूसरे वर्ष के शोधार्थी मनोज ने अपने रिसर्च गाइड और अन्य शिक्षकों पर पीएचडी पूरी न करने देने और अनुचित दबाव बनाने का गंभीर आरोप लगाया है। शोधार्थी के समर्थन में सोमवार को विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के लगभग 80 विद्यार्थियों ने एकजुट होकर प्रशासनिक ब्लॉक-4 के बाहर सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक जोरदार धरना दिया। करीब तीन घंटे तक चले इस विरोध-प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और मामले में तुरंत हस्तक्षेप कर पारदर्शी समाधान की मांग की।
📜 जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल और शिकायत के बाद बढ़ा दबाव
विवाद का घटनाक्रम और शोधार्थी मनोज के आरोप:
-
जातिसूचक टिप्पणी का आरोप: शोधार्थी मनोज ने बताया कि 19 मार्च 2025 को कक्षा के दौरान डॉ. अरविंद सिंह तेजावत ने उसके साथ कथित तौर पर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए अपमानजनक व्यवहार किया था।
-
उच्च अधिकारियों से शिकायत: इस घटना के विरोध में मनोज ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC), राज्यपाल, प्रदेश के शिक्षा मंत्री, विश्वविद्यालय प्रशासन और ग्रीवेंस कमेटी (Grievance Committee) को लिखित शिकायतें सौंपी थीं।
-
इस्तीफे और प्रार्थना पत्र का दबाव: मनोज का आरोप है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद से ही उस पर लगातार पीएचडी छोड़ने या शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया जाने लगा। 21 सितंबर को दोपहर 12 बजे उसके गाइड डॉ. कामराज सिंधू ने अपने कार्यालय में बुलाकर प्रार्थना पत्र लिखने को कहा और ऐसा न करने पर शोध व पीएचडी पूरी न होने देने की धमकी दी। इसके अलावा विभाग के कुछ अन्य शिक्षकों द्वारा भी उस पर मानसिक दबाव बनाया जा रहा है।
🏛️ कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने छात्रों से की बात; 3 दिन में कार्रवाई का दिया भरोसा
प्रशासनिक हस्तक्षेप और धरना समाप्ति:
-
मौके पर पहुँचे अधिकारी: छात्रों के उग्र प्रदर्शन की सूचना मिलते ही विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार और उप-कुलपति सुनील कुमार खुद धरना स्थल पर पहुँचे और आंदोलनकारी छात्रों की समस्याएं व मांगें सुनीं।
-
शोधार्थी की मांगें: शोधार्थी मनोज ने कुलपति के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए मामले में निष्पक्ष जांच कराने, उसकी पढ़ाई में किसी भी प्रकार की अड़चन न आने देने और संबंधित शिक्षक से लिखित में माफी मंगवाने की मांग की।
-
3 दिन का अल्टीमेटम: कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने मामले की समीक्षा कर तीन दिनों के भीतर न्यायोचित समाधान निकालने का ठोस आश्वासन दिया। कुलपति के आश्वासन के बाद छात्रों ने अपना धरना स्थगित कर दिया। हालांकि, छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित 3 दिनों में समस्या का हल नहीं हुआ, तो वे पुनः अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू करेंगे।