राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का कुरुक्षेत्र दौरा आज; माँ भद्रकाली शक्तिपीठ में करेंगी पूजा-अर्चना, 3 बड़े कार्यक्रमों में होंगी शामिल

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज कुरुक्षेत्र के एक दिवसीय दौरे पर माँ भद्रकाली मंदिर में पूजा करेंगी और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय व गुरुकुल के भव्य कार्यक्रमों में शिरकत करेंगी।

धर्मनगरी कुरुक्षेत्र में आज भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का गरिमामय आगमन होने जा रहा है। अपने इस एक दिवसीय महत्वपूर्ण दौरे के दौरान राष्ट्रपति कुरुक्षेत्र में आयोजित तीन प्रमुख धार्मिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक आयोजनों में मुख्य रूप से शिरकत करेंगी। राष्ट्रपति के आगमन को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस विभाग द्वारा अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था और कड़े प्रबंध किए गए हैं।

🛕 माँ भद्रकाली शक्तिपीठ में विशेष पूजा-अर्चना कर देश की सुख-समृद्धि की करेंगी कामना

कुरुक्षेत्र पहुँचने पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सबसे पहले प्रसिद्ध पौराणिक माँ भद्रकाली शक्तिपीठ मंदिर जाएँगी:

  • विशेष अनुष्ठान: मंदिर परिसर में वे विधि-विधान के साथ विशेष पूजा-अर्चना और आरती करेंगी।

  • देश कल्याण का संकल्प: इस दौरान वे देश की सुख-समृद्धि, सामाजिक समरसता और शांति की कामना करेंगी। मंदिर न्यास द्वारा उनके स्वागत की भव्य तैयारियां की गई हैं।

🎓 कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के ‘हीरक जयंती’ समारोह और प्रदर्शनी का करेंगी अवलोकन

धार्मिक अनुष्ठान के पश्चात राष्ट्रपति कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय (KU) के श्रीमद्भगवद्गीता सदन पहुँचेंगी:

  • हीरक जयंती समारोह: यहाँ वे विश्वविद्यालय की ‘हीरक जयंती’ (Diamond Jubilee) के अवसर पर आयोजित विशेष प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगी।

  • शिक्षाविदों को संबोधन: इस अवसर पर वे उपस्थित शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और गणमान्य जनसमूह को संबोधित करते हुए अपने विचार साझा करेंगी।

📜 कुरुक्षेत्र गुरुकुल के 115वें स्थापना वर्ष समारोह में होंगी मुख्य अतिथि

राष्ट्रपति के दौरे का तीसरा और मुख्य कार्यक्रम ऐतिहासिक कुरुक्षेत्र गुरुकुल में आयोजित किया जाएगा:

  • 115वां स्थापना वर्ष: गुरुकुल के 115वें स्थापना वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित भव्य समारोह में वे बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करेंगी।

  • सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक कार्यक्रम: गुरुकुल परिसर में राष्ट्रपति का स्वागत पारंपरिक तरीके से किया जाएगा, जहाँ वे भारतीय संस्कृति, मूल्य-आधारित शिक्षा और गुरुकुल परंपरा के योगदान पर प्रकाश डालेंगी।

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