लोधी, पाल, कुर्मी और ब्राह्मण चेहरों पर दांव, जानिए बीजेपी ने किस समाज को दिया कितना प्रतिनिधित्व

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी के 8 उम्मीदवारों की सूची में जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों का पूरा गणित सामने आया है। जानिए किस वर्ग को क्या मिला।

उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) द्वारा घोषित 8 उम्मीदवारों की सूची ने राज्य की राजनीतिक गलियारों में नए समीकरणों पर चर्चा तेज कर दी है। इस नई लिस्ट में पार्टी ने जातीय और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व का पूरा संतुलन साधने की कोशिश की है। बीजेपी ने इस बार 2 ब्राह्मण, 3 ओबीसी (OBC), 2 दलित और 1 राजपूत चेहरे को अपना उम्मीदवार बनाया है, जिसमें लोधी, पाल-गड़रिया, कुर्मी, खटीक और पासी समाज के चेहरों को प्रमुखता दी गई है।

📊 ओबीसी वर्ग पर खास फोकस: लोधी, पाल और कुर्मी चेहरों को मिला बड़ा प्रतिनिधित्व

पार्टी ने पिछड़ों वर्ग को साधते हुए तीन प्रमुख जातियों को मैदान में उतारा है। केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा की जगह लोधी समाज से आने वाले राज्य सरकार के मंत्री धर्मपाल सिंह को उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं, गीता शाक्य की जगह पाल/गड़रिया समाज से आने वाले यूपी बीजेपी ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश पाल को टिकट मिला है। इसके अलावा, बरेली के वरिष्ठ नेता संतोष गंगवार की बेटी श्रुति गंगवार (कुर्मी समाज) को भी उम्मीदवार बनाया गया है, जो गैर-यादव ओबीसी राजनीति और 2027 के चुनावों के मद्देनजर बेहद अहम माना जा रहा है।

⚖️ ब्राह्मण, दलित और राजपूत समीकरण: दो चेहरे ब्राह्मण और सिख प्रतिनिधित्व में बदलाव

सवर्ण और दलित मतदाताओं को साधने के लिए पार्टी ने प्रयागराज के वरिष्ठ अधिवक्ता राधाकांत ओझा और लंबे समय से संगठन में सक्रिय गोपी कृष्ण पाण्डेय के रूप में दो ब्राह्मण चेहरों पर दांव लगाया है। दलित वर्ग से विद्यासागर सोनकर (खटीक समाज) और प्रियंका सिंह रावत (पासी समाज) को जगह मिली है। वहीं, राजपूत कोटे से राम प्रताप सिंह चौहान को उम्मीदवार बनाया गया है, जबकि इस बार सूची से सिख प्रतिनिधित्व (हरदीप सिंह पुरी) को हटा दिया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सूची आगामी विधानसभा चुनावों के लिए बीजेपी के दीर्घकालिक सामाजिक ताने-बाने का मजबूत खाका है।

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