वैधृति योग 2026: कब है? जानें इसके अशुभ प्रभाव और बचाव के सरल उपाय

ज्योतिष शास्त्र में वैधृति योग को अशुभ क्यों माना जाता है? 22 जुलाई 2026 को बनने वाले इस योग का समय, नकारात्मक प्रभाव और दोष निवारण के प्रभावी उपाय यहां जानें।

ज्योतिष शास्त्र में बहुत से शुभ और अशुभ योगों के बारे में बताया गया है, जिनका अच्छा और बुरा प्रभाव जीवन पर देखने को मिलता है. ज्योतिष शास्त्र में ऐसा ही एक अशुभ योग होता है वैधृति योग. इस अशुभ योग को ज्योतिष शास्त्र के दो सबसे महत्वपूर्ण ग्रह मन और भावनाओं के कारक चंद्रमा और आत्मा के कारक सूर्य देव बनाते हैं. इसको आमतौर पर अशुभ और बाधा उत्पन्न करने वाला योग माना जाता है.

यह योग सूर्य और चंद्रमा के देशांतर के विशेष संयोग से बनता है. ये अशुभ योग इस जुलाई माह में बनने वाला है. द्रिक पंचांग के अनुसार, सूर्य और चंद्रमा का वैधृति योग इस माह में 22 जुलाई को बनेगा. 22 जुलाई, बुधवार के दिन वैधृति योग शाम 04 बजकर 06 मिनट पर बनेगा. इस अशुभ योग का प्रभाव इसी दिन रात को 09 बजकर 51 मिनट तक रहेगा.

नकारात्मक ऊर्जा और संघर्षों को बढ़ावा देता है

ज्योतिष शास्त्र में वैधृति योग को एक बहुत चुनौतीपूर्ण योग माना जाता है. ये 27 योगों में अंतिम योग है. इस योग को बाधा, अलगाव या ऊर्जा के असंतुलन का प्रतीक बताया जाता है. यह जिंदगी में मानसिक अशांति, अप्रत्याशित बाधाएं और तनाव पैदा करता है. सूर्य और चंद्रमा की विशेष खगोलीय स्थिति (कोणीय दूरी) से बनने के कारण वैधृति योग नकारात्मक ऊर्जा और संघर्षों को बढ़ावा देता है.

इस योग की स्वामिनी असुरों की माता दिति मानी जाती हैं. इस योग के बनने के बाद महत्वपूर्ण कामों में देरी होती है. करियर, स्वास्थ्य और दांपत्य जीवन में अचानक उतार-चढ़ाव आ जाता है. वैधृति योग में विवाह समेत तमाम शुभ और मांगलिक कामों को करने की मनाही होती है. क्योंकि इस समय मांगलिक कार्यों का शुभ फल नहीं मिलता. कुल मिलाककर ये कहा जा सकता है कि वैधृति योग जीवन में हर ओर से अशांति पैदा करता है.

वैधृति योग के उपाय

वैधृति योग के दोषों को खत्म के लिए विद्वानों और पंडितों द्वारा रुद्राभिषेक कराने की सलाह दी जाती है. इस योग में चावल, चीनी, दूध और सफेद वस्त्रों का जरूरतमंदों को दान करने के लिए कहा जाता है. इस योग में भगवान शिव के महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने के लिए जाता है.

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