समाधान शिविर में बदला नियम, अब इन 6 मामलों पर नहीं होगी सुनवाई

समाधान शिविर में अब RTI, नौकरी, ट्रांसफर और विकास कार्यों जैसी 6 श्रेणियों की शिकायतें नहीं सुनी जाएंगी। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

भिवानी। जिला प्रशासन के समाधान शिविर में अब विकास कार्यों, नौकरी एवं रोजगार, सरकारी कर्मचारियों के स्थानांतरण, आरटीआई, कर्मचारी सेवा संबंधी मामलों और सामान्य सुझावों से जुड़ी शिकायतें नहीं सुनी जाएंगी। प्रशासन ने छह श्रेणियों के मामलों को समाधान शिविर से बाहर कर दिया है।

इससे शिविर में अनावश्यक और निजी हित की शिकायतों को कम कर जनहित से जुड़े मामलों के त्वरित समाधान पर फोकस किया जाएगा। लघु सचिवालय के डीआरडीए सभागार में प्रत्येक सोमवार और वीरवार को सुबह 10 से दोपहर 12 बजे तक समाधान शिविर लगता है। उपायुक्त मुख्य रूप से शिकायतें सुनते हैं। उनकी अनुपस्थिति में नगराधीश, एसडीएम, जिला पंचायत एवं विकास अधिकारी सहित अन्य अधिकारी जनसुनवाई करते हैं। शिविर में औसतन 35 से 50 शिकायतें आती हैं।

इनमें कई का मौके पर ही अधिकारियों को निर्देश देकर समाधान कराया जाता है जबकि जांच या विभागीय कार्रवाई वाले मामलों में संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए जाते हैं।

समाधान शिविर में इन छह मामलों पर रहेगी सुनवाई की मनाही
1. विकास कार्यों से संबंधित मांग: ऐसे विकास कार्यों की मांग या शिकायत जिनके लिए मुख्यालय या उच्च स्तर से स्वीकृति जरूरी है।
2. स्थानांतरण संबंधी अनुरोध: सरकारी अधिकारी, कर्मचारी या अन्य सरकारी अथवा एचकेआरएन कर्मचारी के स्थानांतरण से जुड़े अनुरोध।
3. आरटीआई से संबंधित आवेदन: सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 के तहत आवेदन या आरटीआई से संबंधित कोई भी मामला।
4. नौकरी एवं रोजगार की मांग: किसी भी प्रकार की नौकरी या रोजगार उपलब्ध कराने से संबंधित मांग।
5. कर्मचारियों के सेवा संबंधी मामले: सरकारी कर्मचारियों के पदोन्नति, स्थानांतरण, वरिष्ठता, वेतन, सेवा लाभ और अन्य व्यक्तिगत सेवा संबंधी मामले।
6. सामान्य सुझाव: ऐसे सुझावात्मक मामले जिनका संबंध किसी व्यक्तिगत शिकायत या समस्या के निवारण से नहीं है।

समाधान शिविर में पहुंच रहे अजब-गजब मामले
जनसुनवाई के दौरान कई बार ऐसी निजी और पारिवारिक समस्याएं भी सामने आती हैं जिनका समाधान संबंधित स्तर पर हो सकता है। कई छोटी समस्याओं के लिए भी लोग अधिकारियों तक पहुंचते हैं। इससे उनका समय और पैसा दोनों खर्च होता है। शिकायतों को पोर्टल पर अपलोड कर समय सीमा में समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश हैं। उपायुक्त इनकी समय-समय पर मॉनिटरिंग कर संबंधित अधिकारियों से जवाब भी लेते हैं।

समाधान शिविर में विकास के मामलों से प्रशासन को इस तरह पल्ला नहीं झाड़ना चाहिए। वार्डों में गलियों के निर्माण, सीवर और पानी की लाइनों की दिक्कतों से संबंधित मामले पहले समाधान शिविर में रखे जाते रहे हैं। व्यक्तिगत शिकायतें नहीं रखना सही है।

अगर विकास के मामले ही समाधान शिविर से हट जाएंगे तो यह चाय-पानी का शिविर बनकर रह जाएगा। बाकी समस्याओं का समाधान भी अधिकारियों से नहीं होता। वार्डों में सार्वजनिक कामों को लेकर लोग पार्षदों पर दबाव बनाते हैं। ऐसे मामले अधिकारी नहीं सुनेंगे तो समाधान शिविर बंद कर देना चाहिए।

हरियाणा सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग (समाधान प्रकोष्ठ) ने सभी उपायुक्तों और नगर आयुक्तों को निर्देश जारी किए हैं। इनमें मुख्यालय स्तर पर प्रशासनिक अनुमोदन की आवश्यकता वाले बड़े विकास कार्य, सरकारी कर्मचारियों के स्थानांतरण, आरटीआई आवेदन, नौकरी एवं रोजगार की मांग, सामान्य मांगें, कर्मचारी सेवा संबंधी मामले और सुझावों को समाधान प्रकोष्ठ पर अपलोड न करने का निर्णय लिया गया है। सभी संबंधित अधिकारियों को इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।
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