सरकार ने बढ़ाई मुश्किल क्षेत्रों से निकलने वाली नेचुरल गैस की कीमत, अब इतनी होगी नई सीलिंग प्राइस
सरकार ने मुश्किल क्षेत्रों से निकलने वाली नेचुरल गैस की अधिकतम कीमत को बढ़ाकर 9.89 डॉलर प्रति MMBtu कर दिया है। जानें पूरी डिटेल।
केंद्र सरकार ने रिलायंस इंडस्ट्रीज और बीपी (BP) के केजी-डी6 (KG-D6) जैसे कठिन और मुश्किल भौगोलिक क्षेत्रों से निकलने वाली नेचुरल गैस की अधिकतम कीमत (सीलिंग प्राइस) में संशोधन किया है। 1 अक्टूबर से अगले छह महीने की अवधि के लिए इस सीलिंग प्राइस को बढ़ाकर 9.89 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (MMBtu) कर दिया गया है, जो इससे पहले 8.90 डॉलर प्रति MMBtu थी। पेट्रोलियम मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) द्वारा जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, यह नई दरें 1 अक्टूबर 2026 से 31 मार्च 2027 के बीच डीपवॉटर, अल्ट्रा-डीपवॉटर और हाई-प्रेशर, हाई-टेम्परेचर क्षेत्रों से निकाली जाने वाली गैस पर प्रभावी होंगी।
📊 ONGC और ऑयल इंडिया के पुराने फील्ड्स के लिए APM गैस की कीमतें तय, नए कुओं पर 10% प्रीमियम
सरकारी कंपनियों ओएनजीसी (ONGC) और ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) द्वारा अपने नॉमिनेशन फील्ड्स से निकाली जाने वाली एपीएम (APM) गैस के लिए अक्टूबर महीने के वास्ते 11.22 डॉलर प्रति MMBtu की कीमत तय की गई है, हालांकि पीपीएसी के नियमों के अनुसार वास्तविक कैप कीमत 7 डॉलर प्रति MMBtu पर ही सीमित रहेगी। इसके अलावा, सरकार इन कंपनियों के नए कुओं से निकलने वाली गैस पर मौजूदा एपीएम कीमत का 10 प्रतिशत अतिरिक्त प्रीमियम पाने की अनुमति देती है, जिससे नए कुओं से निकलने वाली गैस की प्रभावी कीमत 7.70 डॉलर प्रति MMBtu तक पहुंच सकती है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा क्षेत्र में नए भंडारों के विकास के लिए कंपनियों को निवेश हेतु प्रोत्साहित करना है।
📈 साल 2023 के नए फॉर्मूले और प्राइसिंग सिस्टम के पीछे का मुख्य उद्देश्य
अप्रैल 2023 में सरकार ने पुराने फील्ड्स से मिलने वाली गैस की कीमत निर्धारित करने के लिए एक आधुनिक फॉर्मूला अपनाया था, जो कच्चे तेल के आयात की मासिक औसत कीमत के 10 प्रतिशत से जुड़ा हुआ है। इसमें फ्लोर और सीलिंग की सीमा तय की जाती है। डीपवॉटर और अन्य चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों के लिए अलग प्राइसिंग व्यवस्था इसलिए शुरू की गई थी ताकि तकनीकी रूप से कठिन हाइड्रोकार्बन संसाधनों में भारी निवेश आकर्षित किया जा सके। नेचुरल गैस का उपयोग फर्टिलाइजर उत्पादन, बिजली बनाने और सीएनजी-पीएनजी सप्लाई में मुख्य फीडस्टॉक के रूप में किया जाता है, जिससे इन कीमतों का असर कई औद्योगिक सेक्टरों पर पड़ता है।